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Uttarakhand: पीपलकोटी मार्ग चौड़ा करने पर WII असहमत, अध्ययन में मिली बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की उपस्थिति

Wed, 22 Jul 2026 01:39 PM IST
Renu Saklani विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 22 Jul 2026 01:39 PM IST
सार

राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गुजरने वाले इस मार्ग के विस्तार को लेकर वन्यजीव संरक्षण और यातायात सुविधा के बीच संतुलन की चुनौती खड़ी हो गई है। रिपोर्ट में वन्यजीवों की मौजूदगी सामने आने के बाद अब वैकल्पिक निर्माण तकनीकों पर मंथन शुरू हो गया है।

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Wildlife Institute of India (WII) disagrees with Pipalkoti road widening Uttarakhand news in hindi
बाघ (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने पीपलकोटी-पशुलोक बैराज मार्ग को चौड़ा करने की योजना पर असहमति जता दी है। दरअसल संस्थान के अध्ययन में मौके पर बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की उपस्थिति मिली है। संस्थान ने इसकी रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग को सौंप दी है।

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पशु लोक बैराज-गरुड़ चट्टी-पीपलकोटी तक करीब 22 किमी मार्ग (जगमोहन मोटर मार्ग) है। यह मार्ग राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है। इस मार्ग की अनुमति 1987 में दी गई थी, तब टाइगर रिजर्व नहीं था। वर्तमान में मार्ग सिंगल लेन है, लोनिवि वाहनों के बढ़ते दबाव से निपटने के लिए इसे चौड़ा करने की तैयारी में था।

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वर्ष-2025 में इसका प्रस्ताव स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड में गया था, बोर्ड में तय हुआ कि योजना के दृष्टिगत पहले डब्ल्यूआईआई से अध्ययन कराया जाए। अब डब्ल्यूआईआई ने अध्ययन रिपोर्ट लोनिवि को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार जहां पर मार्ग को चौड़ा किया जाना है, वहां पर बाघ समेत अन्य कई वन्यजीवों की उपस्थिति मिली है। कैमरा ट्रैप में फोटोग्राफ आने की बात भी कही जा रही है। ऐसे में डब्ल्यूआईआई मार्ग को चौड़ा करने पर सहमत नहीं है।

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अब एलिवेटेड रोड, अंडरपास पर विचार

अब यहां एलिवेटेड रोड या अंडरपास जैसे आधुनिक विकल्पों पर विचार हो रहा है। लोनिवि ने डब्ल्यूआईआई से ही इसके अध्ययन का अनुरोध किया है, जिससे पर्यावरण को कम क्षति पहुंचाए और वन्यजीवों का मूवमेंट प्रभावित किए बगैर आवाजाही आसान की जा सके।

3813 अधिक पेड़ों को काटना पड़ता

जब इस मार्ग के चौड़ीकरण का प्रस्ताव बनाया गया था, उस समय सड़क को चौड़ा करने के लिए 3813 पेड़ों को काटने की बात आई थी। यह एक बड़ी संख्या थी, इसके बाद ही अध्ययन कराने का भी फैसला लिया गया था।

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क्या कहते हैं अधिकारी

लोक निर्माण विभाग के विभागाध्यक्ष राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि डब्ल्यूआईआई से नए विकल्पों की संभावना को देखने को कहा गया है। अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह बताते हैं कि डब्ल्यूआईआई से अब एलिवेटेड रोड या अंडरपास जैसे अन्य विकल्पों की संभावना को देखने के लिए पुन: अध्ययन करने का अनुरोध किया गया है। अगर एलिवेटेड बनता है तो दो किमी की दूरी कम होगी। इससे पेड़ का कटान भी कम होगा। साथ ही वन्यजीवों का मूवमेंट भी प्रभावित नहीं होगा।



 

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