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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   12-week-old fetus was growing near the kidney; Delhi doctors saved the woman's life.

Delhi NCR News: किडनी के पास पल रहा था 12 हफ्ते का भ्रूण, दिल्ली के डॉक्टरों ने बचाई महिला की जान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 05:38 PM IST
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एमआरआई जांच में सामने आया बेहद दुर्लभ मामला, गर्भाशय के बजाय पेट में विकसित हो रही थी प्रेगनेंसी
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की-होल विधि से बिना बड़ा चीरा लगाए किया सफल ऑपरेशन, महिला की हालत अब स्थिर

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और जटिल मेडिकल मामले का सफल इलाज कर एक महिला की जान बचाई। जांच में पता चला कि महिला की प्रेगनेंसी गर्भाशय में नहीं, बल्कि पेट के अंदर किडनी के पास विकसित हो रही थी। डॉक्टरों ने की-होल (लैप्रोस्कोपिक) सर्जरी के जरिए बिना बड़ा चीरा लगाए सफल ऑपरेशन किया।
बंगलूरू की रहने वाली महिला नियमित गर्भावस्था जांच के लिए दिल्ली के इस निजी अस्पताल पहुंची थी। शुरुआती अल्ट्रासाउंड में डॉक्टरों को पेट में एक बड़ी थैली जैसी संरचना दिखाई दी, जिसे पहले डर्मोइड सिस्ट (त्वचा के भीतर थैलीनुमा गांठ) समझा गया। लेकिन बाद में एमआरआई जांच से पता चला कि गर्भाशय की दीवार फट गई थी और 12 सप्ताह का भ्रूण पेट के अंदर किडनी और मुख्य रक्त वाहिकाओं के पास विकसित हो रहा था।
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अस्पताल के ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. मन्नन गुप्ता ने बताया कि यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी (भ्रूण का गर्भाशय के बाहर विकसित होना ) का बेहद दुर्लभ रूप है। आमतौर पर ऐसी गर्भावस्था फैलोपियन ट्यूब या ओवरी में होती है, लेकिन इस मामले में भ्रूण किडनी के पास विकसित हो रहा था। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने अपने पूरे चिकित्सा कॅरिअर में पहली बार ऐसा मामला देखा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह का मामला लगभग 30 हजार मामलों में से किसी एक में देखने को मिलती है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे दुर्लभ मामलों में समय पर जांच और इलाज बहुत जरूरी होता है, क्योंकि देरी होने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है।
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मुख्य रक्त वाहिकाओं और अहम अंगों के करीब होने से सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी
डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था मुख्य रक्त वाहिकाओं और दूसरे अहम अंगों के बहुत करीब थी। इसलिए सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। पूरी योजना और सावधानी के साथ लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन सफल रहा और महिला की हालत अब पूरी तरह स्थिर है।
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