फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   13-year-old Lakshit battles rare disease Eight months in ICU heart stopped three times

दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा 13 साल का लक्षित: आठ महीने ICU, तीन बार थमा दिल, फिर भी जिंदगी की जंग जीत गया

Sat, 11 Jul 2026 10:32 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sat, 11 Jul 2026 10:32 PM IST
सार

दिल्ली नगर निगम के स्वामी दयानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारी गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित इस बच्चे का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया।

विज्ञापन
13-year-old Lakshit battles rare disease Eight months in ICU heart stopped three times
जिंदगी की जंग जीता लक्षित - फोटो : अमर उजाला/AI

विस्तार

आठ महीने तक आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष, तीन बार कार्डियक अरेस्ट और करीब तीन महीने तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद 13 वर्षीय लक्षित ने आखिरकार जिंदगी की जंग जीत ली। दिल्ली नगर निगम के स्वामी दयानंद अस्पताल के डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारी गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित इस बच्चे का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया।

विज्ञापन

क्या बोले डॉक्टर
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि रक्त परीक्षण और आईएचबीएएस के सहयोग से एनसीवी जांच कर बीमारी की पुष्टि हुई। बीमारी तेजी से बढ़ने के कारण मरीज को सांस लेने में परेशानी हुई और उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। लंबे समय तक श्वसन सहायता की आवश्यकता होने पर ट्रेकियोस्टॉमी की गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन की 10 डोज दी गईं
डॉ. बिष्ट ने बताया कि मरीज को इंट्रावेनस इम्यूनोग्लोबुलिन की 10 डोज दी गईं। प्रत्येक डोज की कीमत करीब 15 हजार रुपये थी। इसके साथ फीडिंग ट्यूब के माध्यम से पोषण दिया गया और नियमित फिजियोथेरेपी कराई गई। लगभग चार महीने बाद मरीज सामान्य भोजन करने लगा और धीरे-धीरे उसकी मांसपेशियों में ताकत लौट आई।

विज्ञापन

अपने पैरों पर चल रहा लक्षित
उप चिकित्सा अधीक्षक एवं रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत जैन ने बताया कि इलाज के दौरान मरीज को तीन बार कार्डियक अरेस्ट आया। हर बार डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी टीम ने तत्काल उपचार कर उसकी जान बचाई। करीब आठ महीने बाद ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब हटाई गई और अब मरीज अपने पैरों पर चलने लगा है।

क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम
-यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी है।
-इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करने लगती है।
-हाथ-पैरों में कमजोरी से शुरुआत होकर लकवे जैसी स्थिति बन सकती है।
-गंभीर मामलों में मरीज की सांस लेने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है।
-समय पर इलाज और गहन निगरानी से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed