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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   4.5 km long major drain to be constructed in Mundka-Najafgarh

Delhi NCR News: मुंडका-नजफगढ़ में 4.5 किमी लंबा प्रमुख नाला बनेगा, लागत 225 करोड़ पहुंची

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Aug 2026 09:09 PM IST
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- ईएफसी से संशोधित लागत की मंजूरी के बाद शुरू होगा काम, मानसून में जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में जलभराव और जल निकासी की समस्या से निपटने के लिए मुंडका-नजफगढ़ क्षेत्र में 4.5 किलोमीटर लंबा प्रमुख नाला बनाया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत में करीब 4.09 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। पहले परियोजना की अनुमानित लागत 220.93 करोड़ रुपये तय की गई थी, जबकि एल-1 बोलीदाता ने 225.02 करोड़ रुपये की दर कोट की है। यह राशि स्वीकृत अनुमान से अधिक है। अब दिल्ली जल बोर्ड संशोधित लागत की मंजूरी आर्थिक वित्त समिति (ईएफसी) से लेने की तैयारी कर रहा है।
जल बोर्ड के अनुसार, नाले का निर्माण मुंडका, नजफगढ़ और आसपास के इलाकों में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव को कम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। रेलवे लाइन के साथ बनने वाले इस प्रमुख नाले के साथ एक सप्लीमेंट्री नाला भी बनाया जाएगा। इससे क्षेत्र की जल निकासी क्षमता बढ़ेगी और बारिश के पानी की निकासी बेहतर हो सकेगी।
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रेलवे लाइन के साथ बनेगा नाला
परियोजना के तहत प्रमुख नाला दिल्ली-भटिंडा रेलवे लाइन के साथ मुंडका हाल्ट स्टेशन के किमी 9/26-28 से नजफगढ़ तक प्रस्तावित है। वहीं, सप्लीमेंट्री नाला किमी 15/10-12 के पास बनाया जाना है। अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना पूरी होने के बाद पश्चिमी दिल्ली के इस क्षेत्र में बारिश के पानी की निकासी का नेटवर्क मजबूत होगा।
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हर मानसून में जलभराव की समस्या
मुंडका, नांगलोई, नजफगढ़ और आसपास के इलाकों में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। कई स्थानों पर जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में पानी जमा हो जाता है। नए नाले के निर्माण से जल निकासी में सुधार और लंबे समय तक जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे मच्छरों और जलजनित बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है।


मंजूरी के बाद जारी होगा वर्क ऑर्डर
अधिकारियों के अनुसार, एल-1 बोलीदाता की 225.02 करोड़ रुपये की दर को देखते हुए संशोधित लागत का प्रस्ताव ईएफसी के समक्ष रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर वर्क ऑर्डर जारी किया जा सकेगा। अधिकारियों के मुताबिक, मंजूरी और निर्माण शुरू होने के बाद परियोजना को पूरा करने में करीब 18 से 24 महीने लग सकते हैं।
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