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Delhi NCR News: लक्ष्मी नगर के कोचिंग हब में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, खतरे में हजारों छात्रों की जान
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-100 से अधिक कोचिंग सेंटरों में फायर सुरक्षा के इंतजाम नदारद, संकरी सीढ़ियों और एक ही निकास द्वार के सहारे पढ़ रहे विद्यार्थी
प्रथम चौहान
नई दिल्ली। दिल्ली में रोजाना हजारों विद्यार्थी बेहतर भविष्य का सपना लेकर कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं। पूर्वी दिल्ली में लक्ष्मी नगर से विकास मार्ग, शकरपुर और निर्माण विहार तक कोचिंग संस्थानों की कतार लगी है। नॉर्थ कैंपस के बाद लक्ष्मी नगर को दिल्ली के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में गिना जाता है। यहां बैंकिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कॉमर्स और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सैकड़ों संस्थान संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इन संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
टॉप फ्लोर पर चल रहे अधिकांश संस्थान
लक्ष्मी नगर इलाके में 100 से अधिक कोचिंग सेंटर होने की बात सामने आ रही है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे संस्थानों की है, जो बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर चल रहे हैं। ग्राउंड फ्लोर का किराया अधिक होने के कारण संचालक ऊपरी मंजिलों को प्राथमिकता देते हैं। कई इमारतों में आने-जाने के लिए केवल एक संकरी सीढ़ी है। आपात स्थिति में छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था भी कई जगह नजर नहीं आती।
फायर सुरक्षा के इंतजाम पर सवाल
कई कोचिंग संस्थानों में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर, हौज रील और अन्य अग्निशमन उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नजर नहीं आती। कुछ इमारतों में बिजली के कई मीटर और तारों का जाल भी दिखाई देता है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या आग लगने की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है। संकरी गलियों और एक ही निकास मार्ग के कारण आग लगने पर भगदड़ की स्थिति में छात्रों को बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।
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क्षमता से अधिक छात्रों को पढ़ाने का आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि कुछ कोचिंग संस्थानों में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा है। 60-70 छात्रों की क्षमता वाले कमरों में करीब 100 विद्यार्थियों को पढ़ाए जाने की बात कही जा रही है। वेंटिलेशन के लिए एग्जॉस्ट फैन और गर्मी से राहत के लिए एसी लगाए गए हैं, लेकिन आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए अतिरिक्त दरवाजे या पर्याप्त खिड़कियां कई जगह नहीं हैं।
बेसमेंट में मीटरों के बीच चल रही कोचिंग
लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन के पास एक बेसमेंट में संचालित कोचिंग सेंटर में प्रवेश करते ही बिजली मीटरों का बड़ा समूह दिखाई देता है। इसके सामने रिसेप्शन और बगल में कक्षा संचालित हो रही थी। यहां भी पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। प्रवेश और निकास के लिए एक ही रास्ता होने से किसी हादसे की स्थिति में विद्यार्थियों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है।
इलाके की कई इमारतें पुरानी हैं और कुछ में दरारें भी दिखाई देती हैं। वर्ष 2019 में सूरत के कोचिंग सेंटर में आग की घटना के बाद एमसीडी ने लक्ष्मी नगर में दो कोचिंग सेंटर सील किए थे और 27 संस्थानों को नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
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प्रथम चौहान
नई दिल्ली। दिल्ली में रोजाना हजारों विद्यार्थी बेहतर भविष्य का सपना लेकर कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं। पूर्वी दिल्ली में लक्ष्मी नगर से विकास मार्ग, शकरपुर और निर्माण विहार तक कोचिंग संस्थानों की कतार लगी है। नॉर्थ कैंपस के बाद लक्ष्मी नगर को दिल्ली के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में गिना जाता है। यहां बैंकिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कॉमर्स और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले सैकड़ों संस्थान संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इन संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
टॉप फ्लोर पर चल रहे अधिकांश संस्थान
लक्ष्मी नगर इलाके में 100 से अधिक कोचिंग सेंटर होने की बात सामने आ रही है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे संस्थानों की है, जो बहुमंजिला इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर चल रहे हैं। ग्राउंड फ्लोर का किराया अधिक होने के कारण संचालक ऊपरी मंजिलों को प्राथमिकता देते हैं। कई इमारतों में आने-जाने के लिए केवल एक संकरी सीढ़ी है। आपात स्थिति में छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था भी कई जगह नजर नहीं आती।
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फायर सुरक्षा के इंतजाम पर सवाल
कई कोचिंग संस्थानों में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर, हौज रील और अन्य अग्निशमन उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नजर नहीं आती। कुछ इमारतों में बिजली के कई मीटर और तारों का जाल भी दिखाई देता है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या आग लगने की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है। संकरी गलियों और एक ही निकास मार्ग के कारण आग लगने पर भगदड़ की स्थिति में छात्रों को बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।
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क्षमता से अधिक छात्रों को पढ़ाने का आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि कुछ कोचिंग संस्थानों में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा है। 60-70 छात्रों की क्षमता वाले कमरों में करीब 100 विद्यार्थियों को पढ़ाए जाने की बात कही जा रही है। वेंटिलेशन के लिए एग्जॉस्ट फैन और गर्मी से राहत के लिए एसी लगाए गए हैं, लेकिन आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए अतिरिक्त दरवाजे या पर्याप्त खिड़कियां कई जगह नहीं हैं।
बेसमेंट में मीटरों के बीच चल रही कोचिंग
लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन के पास एक बेसमेंट में संचालित कोचिंग सेंटर में प्रवेश करते ही बिजली मीटरों का बड़ा समूह दिखाई देता है। इसके सामने रिसेप्शन और बगल में कक्षा संचालित हो रही थी। यहां भी पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। प्रवेश और निकास के लिए एक ही रास्ता होने से किसी हादसे की स्थिति में विद्यार्थियों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है।
इलाके की कई इमारतें पुरानी हैं और कुछ में दरारें भी दिखाई देती हैं। वर्ष 2019 में सूरत के कोचिंग सेंटर में आग की घटना के बाद एमसीडी ने लक्ष्मी नगर में दो कोचिंग सेंटर सील किए थे और 27 संस्थानों को नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।