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सैदुल्लाजाब इमारत हादसा: तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
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हादसे में छह लोगों की हुई थी मौत, भवन मालिक, बिल्डर समेत तीन पर गैर इरादतन हत्या और लापरवाही के आरोप, 22 अगस्त को होगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सैदुल्लाजाब में 30 मई को इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ साकेत कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया है। पुलिस ने भवन मालिक कर्मवीर सिंह, बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश गुप्ता को आरोपी बनाया है।
तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में गैर इरादतन हत्या, निर्माण व मरम्मत के दौरान लापरवाही, लोगों की जान और सुरक्षा खतरे में डालने तथा गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपपत्र पर सुनवाई के लिए मामला 22 अगस्त को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में पेश किया जाएगा।
हादसा 30 मई की शाम सैदुल्लाजाब की गली नंबर पांच में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास हुआ था। इमारत में कई कार्यालय और एक कैफे संचालित हो रहे थे। पास में एक महिला किचन भी चल रहा था। हादसे के समय वहां कर्मचारी और खाना खाने आए लोग मौजूद थे। अचानक इमारत भरभराकर गिर गई और कई लोग मलबे में दब गए। हादसे में छह लोगों की मौत हुई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे।
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पुलिस के अनुसार, 30 मई को शाम करीब 7:30 बजे महरौली थाने का बीट स्टाफ इलाके में गश्त कर रहा था। इसी दौरान पुलिस को इमारत गिरने की सूचना मिली। शाम 7:38 बजे पहली पीसीआर कॉल दर्ज हुई। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और अतिरिक्त बल तथा आपातकालीन एजेंसियों को सूचना दी। बचाव अभियान शुरू कर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। कई लोगों को सुरक्षित बचाया गया, लेकिन छह लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
अवैध निर्माण की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
हादसे की मजिस्ट्रेट जांच में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इमारत में अवैध निर्माण की शिकायतें पहले की गई थीं, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हादसे के बाद जांच को प्रभावित करने के लिए रिकॉर्ड में बदलाव किए गए।
-मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर हुई मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि अवैध निर्माण की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती तो हादसे से बचा जा सकता था। जांच में इमारत में बिना अनुमति किए गए बदलाव और निर्माण नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को हादसे के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सैदुल्लाजाब में 30 मई को इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ साकेत कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया है। पुलिस ने भवन मालिक कर्मवीर सिंह, बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश गुप्ता को आरोपी बनाया है।
तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में गैर इरादतन हत्या, निर्माण व मरम्मत के दौरान लापरवाही, लोगों की जान और सुरक्षा खतरे में डालने तथा गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपपत्र पर सुनवाई के लिए मामला 22 अगस्त को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में पेश किया जाएगा।
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हादसा 30 मई की शाम सैदुल्लाजाब की गली नंबर पांच में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास हुआ था। इमारत में कई कार्यालय और एक कैफे संचालित हो रहे थे। पास में एक महिला किचन भी चल रहा था। हादसे के समय वहां कर्मचारी और खाना खाने आए लोग मौजूद थे। अचानक इमारत भरभराकर गिर गई और कई लोग मलबे में दब गए। हादसे में छह लोगों की मौत हुई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए थे।
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पुलिस के अनुसार, 30 मई को शाम करीब 7:30 बजे महरौली थाने का बीट स्टाफ इलाके में गश्त कर रहा था। इसी दौरान पुलिस को इमारत गिरने की सूचना मिली। शाम 7:38 बजे पहली पीसीआर कॉल दर्ज हुई। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और अतिरिक्त बल तथा आपातकालीन एजेंसियों को सूचना दी। बचाव अभियान शुरू कर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। कई लोगों को सुरक्षित बचाया गया, लेकिन छह लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
अवैध निर्माण की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
हादसे की मजिस्ट्रेट जांच में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इमारत में अवैध निर्माण की शिकायतें पहले की गई थीं, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हादसे के बाद जांच को प्रभावित करने के लिए रिकॉर्ड में बदलाव किए गए।
-मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर हुई मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को सौंपी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि अवैध निर्माण की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती तो हादसे से बचा जा सकता था। जांच में इमारत में बिना अनुमति किए गए बदलाव और निर्माण नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को हादसे के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया था।