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Delhi NCR News: 8 साल की अनाथ बच्ची का यौन उत्पीड़न करने वाले 72 साल के बुजुर्ग को 20 साल की कैद
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- 72 वर्षीय बुजुर्ग को सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा ऐसे लोग बच्चों पर गिद्ध की नजर रखते हैं
- एडिशनल सेशन जज बबीता पूनिया ने कहा ऐसी घटनाएं समाज की नीव हिला देती हैं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) ने 8 वर्षीय अनाथ बालिका के यौन उत्पीड़न के मामले में 72 वर्षीय आरोपी को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को बच्ची का दादा कहकर पुकारने वाले संबंध का फायदा उठाकर उसके विश्वास का घोर दुरुपयोग करने का दोषी ठहराया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबिता पुनिया ने मंगलवार को दिए फैसले में कहा कि यह मात्र एक अपराध नहीं, बल्कि बचपन पर हमला है। अदालत ने टिप्पणी की, हम जिस समाज में रहते हैं, वहां बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे लोग बच्चों पर गिद्ध की तरह नजर रखते हैं। घटना दिसंबर 2025 की बताई गई है। पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषसिद्ध ठहराए गए आरोपी पर बालिका से गंभीर यौन उत्पीड़न का आरोप साबित हुआ। अदालत ने कहा कि 64 वर्ष के उम्र के फासले के बावजूद आरोपी ने बच्ची की असहाय स्थिति का लाभ उठाया। बच्ची अनाथ होने के कारण और भी कमजोर थी।
आरोपी को पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल की कठोर कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त 6 महीने की कैद होगी। साथ ही आपराधिक धमकी के लिए दो महीने की साधारण कैद भी सुनाई गई, जो समानांतर चलेगी। पीड़िता को 13.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। अदालत ने पीड़िता के लिए ट्रॉमा काउंसलिंग, शिक्षा सहायता (कक्षा 12 तक) और व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। न्यायाधीश बबिता पुनिया ने कहा कि कोई भी राशि बच्ची के खोए बचपन को वापस नहीं ला सकती, लेकिन पुनर्वास के लिए यह जरूरी है।
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आरोपी को पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल की कठोर कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना न चुकाने पर अतिरिक्त 6 महीने की कैद होगी। साथ ही आपराधिक धमकी के लिए दो महीने की साधारण कैद भी सुनाई गई, जो समानांतर चलेगी। पीड़िता को 13.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। अदालत ने पीड़िता के लिए ट्रॉमा काउंसलिंग, शिक्षा सहायता (कक्षा 12 तक) और व्यावसायिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। न्यायाधीश बबिता पुनिया ने कहा कि कोई भी राशि बच्ची के खोए बचपन को वापस नहीं ला सकती, लेकिन पुनर्वास के लिए यह जरूरी है।
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