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Delhi NCR News: आयानगर में रिज फॉरेस्ट पर अतिक्रमण, 16 अवैध घर हटाने की तैयारी
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-वन विभाग के अनुसार, आयानगर गांव की यह जमीन साल 1994 और 1996 की अधिसूचनाओं के तहत रिजर्व्ड फॉरेस्ट घोषित की जा चुकी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के आयानगर इलाके में रिज फॉरेस्ट की जमीन पर हुए अतिक्रमण को लेकर वन विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में विभाग ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में रिपोर्ट दाखिल करते हुए बताया कि यहां बने 16 अवैध घरों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। वन विभाग के अनुसार, आयानगर गांव की यह जमीन साल 1994 और 1996 की अधिसूचनाओं के तहत रिजर्व्ड फॉरेस्ट घोषित की जा चुकी है। इसलिए इस जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण या खेती करना कानूनन गलत है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों द्वारा किए जा रहे मालिकाना हक के दावे मान्य नहीं हैं।
डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (साउथ) की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि यह मामला खसरा नंबर 1978 से जुड़ा है, जो पहले गांव सभा की जमीन थी। बाद में इसे सरप्लस घोषित कर वन विभाग को सौंप दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले अपने आदेश में रिज क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखने की बात कही थी और यहां किसी तरह के निर्माण पर रोक लगाई थी। वन विभाग ने फरवरी 2024 में इस इलाके का निरीक्षण किया था। इस दौरान कुल 55 घर पाए गए, जिनमें से 16 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से फॉरेस्ट लैंड पर बने हुए हैं। विभाग ने इन घरों को अवैध मानते हुए नोटिस जारी किए थे। अब इन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
इस बीच, स्थानीय आरडब्ल्यूए ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने वन विभाग को निवासियों की आपत्तियों पर विचार करने के लिए समय दिया था और तब तक जबरन कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। हालांकि, यह कोई स्थायी राहत नहीं थी। बाद में वन विभाग ने आरडब्ल्यूए के दावों को खारिज करते हुए कहा कि जमीन के रिकॉर्ड में यह अब भी गांव सभा की ही संपत्ति है और इस पर किसी का निजी मालिकाना हक साबित नहीं होता। वन विभाग ने इस मामले में एसडीएम और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने की मांग भी की है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही तय कार्यक्रम के तहत कार्रवाई को पूरा किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के आयानगर इलाके में रिज फॉरेस्ट की जमीन पर हुए अतिक्रमण को लेकर वन विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में विभाग ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में रिपोर्ट दाखिल करते हुए बताया कि यहां बने 16 अवैध घरों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। वन विभाग के अनुसार, आयानगर गांव की यह जमीन साल 1994 और 1996 की अधिसूचनाओं के तहत रिजर्व्ड फॉरेस्ट घोषित की जा चुकी है। इसलिए इस जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण या खेती करना कानूनन गलत है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ लोगों द्वारा किए जा रहे मालिकाना हक के दावे मान्य नहीं हैं।
डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (साउथ) की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि यह मामला खसरा नंबर 1978 से जुड़ा है, जो पहले गांव सभा की जमीन थी। बाद में इसे सरप्लस घोषित कर वन विभाग को सौंप दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले अपने आदेश में रिज क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखने की बात कही थी और यहां किसी तरह के निर्माण पर रोक लगाई थी। वन विभाग ने फरवरी 2024 में इस इलाके का निरीक्षण किया था। इस दौरान कुल 55 घर पाए गए, जिनमें से 16 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से फॉरेस्ट लैंड पर बने हुए हैं। विभाग ने इन घरों को अवैध मानते हुए नोटिस जारी किए थे। अब इन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
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इस बीच, स्थानीय आरडब्ल्यूए ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने वन विभाग को निवासियों की आपत्तियों पर विचार करने के लिए समय दिया था और तब तक जबरन कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। हालांकि, यह कोई स्थायी राहत नहीं थी। बाद में वन विभाग ने आरडब्ल्यूए के दावों को खारिज करते हुए कहा कि जमीन के रिकॉर्ड में यह अब भी गांव सभा की ही संपत्ति है और इस पर किसी का निजी मालिकाना हक साबित नहीं होता। वन विभाग ने इस मामले में एसडीएम और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने की मांग भी की है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही तय कार्यक्रम के तहत कार्रवाई को पूरा किया जाएगा।