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विधायकों की गिरफ्तारी से आने वाले चुनावों में मुश्किल में दिख रही AAP
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 26 Jul 2016 06:03 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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भले ही आम अदमी पार्टी अपने एक के बाद एक गिरफ्तार हो रहे विधायकों के साथ मजबूती से खड़ी है लेकिन दिन पर दिन घटती उनकी संख्या से पार्टी बहुत चिंतित भी है।
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गिरफ्तार हो चुके विधायकों की संख्या अब 11 तक पहुंच चुकी है और अगर इनका औसत निकाला जाए तो यह प्रति माह 1 विधायक है। हालांकि पार्टी इस बात को लेकर आशांवित है कि उसे इन सब को राजनीतिक साजिश बताकर फायदा मिलेगा और अगले साल होने वाले तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में इस बात का लाभ होगा। लेकिन जिस बात को वो अनदेखा नहीं कर सकते वो हैं दिल्ली में गर्वनेंस में आ रही परेशानियां।
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आम अदमी पार्टी की सरकार अपने पहले साल में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी के क्षेत्र में बेहतर योजना बनाकर धीरे-धीरे अच्छा काम कर रही थी। पार्टी यह मान रही थी कि वह 2017 के दिल्ली नगर निगम चुनाव में जनता के सामने अपने अच्छे काम के रिपोर्ट कार्ड के साथ जाएगी।
हालांकि पार्टी ने जब से पंजाब, गुजरात और गोवा चुनाव की तैयारियां शुरु की हैं तब से उसने अपने आप को अनपेक्षित मुसीबत में डाल लिया है। पार्टी के विधायक जो आने वाले तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते थे, आज वही अपने आप को मुश्किलों से घिरा पा रहे हैं।
चाहे गिरफ्तार हो चुके विधायक ये कहें कि उन पर लगे झूठे आरोप और गिरफ्तारियां उन्हें डराने में नाकाम रहे, लेकिन वो अपने विधानसभा क्षेत्र की महिला शिकायतकर्ताओं से कुछ ज्यादा ही सतर्क हो गए हैं।
एक विधायक जो पहली बार आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़कर विधायक बना है का कहना है कि 'उन पर लग रहे इन झूठे केसों से किसी का भी भला नहीं होगा। अब सब झूठ जैसा लगता है। अब अगर कोई महिला अपनी शिकायत लेकर पहुंचती है तो सबसे पहले मन में ये खयाल आता है कि कहीं ये किसी विरोधी की साजिश तो नहीं? हां, यह निश्चित ही हमारे काम को प्रभावित करता है और हमारे विरोधी को फायदा पहुंचाता है। सिर्फ यही नहीं यह हमारे अन्य क्षेत्रवासियों को भी प्रभावित करता है क्योंकि इस वजह से जिन लोगों को असल में मदद चाहिए उन्हें नहीं मिल पाती।'
वो विधायक आगे कहता है कि उनमें से अधिकतर ने अपने साख पर राजनीति में प्रवेश लिया है। वो सब पर भरोसा करते हैं और अपने विधानसभा क्षेत्र को आगे ले जाने की कोशिश करते हैं। यही वो चीज है जो हमें दूसरों से अलग करती है। लेकिन हाल में जो घटनाएं हुई हैं उन्होंने हमें सोचने पर और खुले रूप से काम न कर पाने पर मजबूर कर दिया है।
इस वक्त आम आदमी पार्टी परेशानियों से घिरी है और उसके सामने ऐसे बहुत से चैलेंज हैं जिनके लिए वो बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। लेकिन अगर पार्टी इस तूफान से निकलने में कामयाब होती है आने वाले तीन राज्यों के चुनाव में उसके पास बताने और करने को बहुत कुछ होगा।
(साभार- इंडियन एक्सप्रेस)