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Delhi NCR News: 9 साल की कानूनी लड़ाई के बाद विवाहिता को मिला इंसाफ, पति-सास दोषी
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कड़कड़डूमा कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पति और सास को दो महीने की सुनाई सजा
सचिन कुमार
नई दिल्ली। विवाहिता पर उसके पति और ससुरालवालों की तरफ से की गई क्रूरता के 9 साल बाद पीड़िता को कड़कड़डूमा कोर्ट से इंसाफ मिला। याचिकाकर्ता के पति और सास को दोषी मानते हुए दो-दो महीने की कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। जुर्माना न देने पर एक-एक महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नेहा गर्ग ने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा सहे गए मानसिक आघात के मुआवजे के तौर पर इस आदेश के 60 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को अदा किया जाएगा। यह राशि सीधे शिकायतकर्ता को ही दी जाएगी। मामले में अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। सुनवाई में अदालत से दोषियों ने निवेदन किया है कि उनका पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह से बेदाग है और वह पिछले लगभग 9 साल से इस मुकदमे का सामना कर रहे हैं। वह समाज के सम्मानित सदस्य हैं और प्रार्थना की जाती है कि उन्हें सबसे हल्की सजा दी जाए। वहीं, राज्य की ओर से सहायक लोक अभियोजक ने उन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए जिनके लिए दोषियों को दोषी ठहराया गया है, उनके लिए कठोर सजा दिए जाने पर जोर दिया।
पति ने बिना बताए कर ली दूसरी शादी : याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप चौहान ने अदालत को बताया कि प्रतिवादी पति और सास ने उसके साथ घरेलू हिंसा की और उसके सभी गहने और स्त्रीधन अपने कब्जे में रख लिए। याचिकाकर्ता बेरोजगार है और अपना और बेटे का भरण पोषण करने में उसे परेशानी है। पति कमाता है और उसके पास चल अचल संपत्ति भी है। वकील ने कहा कि पति ने तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली और दूसरी पत्नी ने महाराष्ट्र में उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इस याचिका में महिला ने कोर्ट से सुरक्षा आदेश, निवास का अधिकार, अपने और अपने बच्चे के लिए भरण-पोषण सहित आर्थिक सहायता और मुआवजा देने की मांग की है। पीड़िता ने आरोप लगाए थे कि शादी के दौरान दिए गए दहेज को पर्याप्त न मानकर मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी पति ने उसे लगातार पीटा, आपत्तिजनक वीडियो बनाए और डॉक्टर के पास जाने की अनुमति नहीं दी। जनवरी 2014 में स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उसे मायके लौटना पड़ा। उसके बेटे का जन्म 30 नवंबर 2014 को हुआ, लेकिन प्रतिवादी बच्चे को देखने तक नहीं आए और उसका प्रसव खर्च याचिकाकर्ता के माता-पिता ने उठाया।
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सचिन कुमार
नई दिल्ली। विवाहिता पर उसके पति और ससुरालवालों की तरफ से की गई क्रूरता के 9 साल बाद पीड़िता को कड़कड़डूमा कोर्ट से इंसाफ मिला। याचिकाकर्ता के पति और सास को दोषी मानते हुए दो-दो महीने की कारावास और एक-एक लाख रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। जुर्माना न देने पर एक-एक महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नेहा गर्ग ने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा सहे गए मानसिक आघात के मुआवजे के तौर पर इस आदेश के 60 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को अदा किया जाएगा। यह राशि सीधे शिकायतकर्ता को ही दी जाएगी। मामले में अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। सुनवाई में अदालत से दोषियों ने निवेदन किया है कि उनका पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह से बेदाग है और वह पिछले लगभग 9 साल से इस मुकदमे का सामना कर रहे हैं। वह समाज के सम्मानित सदस्य हैं और प्रार्थना की जाती है कि उन्हें सबसे हल्की सजा दी जाए। वहीं, राज्य की ओर से सहायक लोक अभियोजक ने उन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए जिनके लिए दोषियों को दोषी ठहराया गया है, उनके लिए कठोर सजा दिए जाने पर जोर दिया।
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पति ने बिना बताए कर ली दूसरी शादी : याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप चौहान ने अदालत को बताया कि प्रतिवादी पति और सास ने उसके साथ घरेलू हिंसा की और उसके सभी गहने और स्त्रीधन अपने कब्जे में रख लिए। याचिकाकर्ता बेरोजगार है और अपना और बेटे का भरण पोषण करने में उसे परेशानी है। पति कमाता है और उसके पास चल अचल संपत्ति भी है। वकील ने कहा कि पति ने तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली और दूसरी पत्नी ने महाराष्ट्र में उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इस याचिका में महिला ने कोर्ट से सुरक्षा आदेश, निवास का अधिकार, अपने और अपने बच्चे के लिए भरण-पोषण सहित आर्थिक सहायता और मुआवजा देने की मांग की है। पीड़िता ने आरोप लगाए थे कि शादी के दौरान दिए गए दहेज को पर्याप्त न मानकर मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी पति ने उसे लगातार पीटा, आपत्तिजनक वीडियो बनाए और डॉक्टर के पास जाने की अनुमति नहीं दी। जनवरी 2014 में स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उसे मायके लौटना पड़ा। उसके बेटे का जन्म 30 नवंबर 2014 को हुआ, लेकिन प्रतिवादी बच्चे को देखने तक नहीं आए और उसका प्रसव खर्च याचिकाकर्ता के माता-पिता ने उठाया।