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Delhi NCR News: प्रदूषण से फेफड़े के कैंसर के जोखिम पर एम्स में होगा अध्ययन
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-एयरकेयर नाम के अध्ययन का नेतृत्व रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक करेंगे
-अध्ययन में फेफड़े के कैंसर के 1,615 मरीजों और 1,615 कंट्रोल्स को किया जाएगा शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में हवा का प्रदूषण सिर्फ सांस की बीमारी नहीं, बल्कि फेफड़ों के कैंसर का भी बड़ा खतरा बन गया है। धूम्रपान नहीं करने वालों में भी यह तेजी से बढ़ रहा है। इसको देखते हुए एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने इस समस्या पर गहराई से जांच के लिए एयरकेयर नाम का अध्ययन शुरू किया है। इसका नेतृत्व रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर कर रहे हैं। टीम में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और अन्य विभागों के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
इस अध्ययन में फेफड़े के कैंसर के 1,615 मरीजों और 1,615 कंट्रोल्स (तुलनात्मक समूह के सदस्यों) को शामिल किया जाएगा। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि दिल्ली की जहरीली हवा, खासकर पीएम 2.5 के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़े के कैंसर का खतरा कितना बढ़ता है। धूम्रपान न करने वालों में यह कैसे कैंसर पैदा कर रहा है, क्या भारतीय लोगों में कोई खास आनुवंशिक बदलाव होता है, जो प्रदूषण से कैंसर का खतरा बढ़ाता है जैसे पहलुओं पर वैज्ञानिक जांच करेंगे।
नतीजे पर शोधकर्ता तैयार करेंगे खास स्क्रीनिंग मॉडल
एयरकेयर अध्ययन के नतीजे से भारत के लिए खास तौर पर तैयार स्क्रीनिंग (जांच) मॉडल बनाया जा सकेगा, ताकि शुरुआत में ही बीमारी पकड़ी जा सके और इलाज आसान हो। इससे नीति-निर्माताओं को प्रदूषण कम करने और लोगों की जान बचाने के लिए बेहतर कदम उठाने में मदद मिलेगी। डॉक्टरों का मानना है कि दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में तुरंत सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
तंबाकू और शराब से दूरी बहुत जरूरी
डॉ. अभिषेक शंकर ने कहा है कि कैंसर से बचने का सबसे अच्छा तरीका जोखिम वाले कारकों से दूर रहना है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 30 प्रतिशत कैंसर के मामले तंबाकू के इस्तेमाल से होते हैं। हेपेटाइटिस संक्रमण से लिवर का कैंसर (हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा) हो सकता है। बचाव के उपाय बताते हुए डॉ. शंकर ने कहा कि तंबाकू और शराब बिल्कुल न लें। एचपीवी से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाएं। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और वजन नियंत्रित रखने की सलाह दी।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के प्रोफेसर और हेड डॉ. सुनील ने कहा कि माना जाता है कि प्रदूषण के कुछ खास तत्व कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। ऐसा ही एक तत्व पीएम 2.5 है, लेकिन इसके भी कई उप-कारक हैं।
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-अध्ययन में फेफड़े के कैंसर के 1,615 मरीजों और 1,615 कंट्रोल्स को किया जाएगा शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में हवा का प्रदूषण सिर्फ सांस की बीमारी नहीं, बल्कि फेफड़ों के कैंसर का भी बड़ा खतरा बन गया है। धूम्रपान नहीं करने वालों में भी यह तेजी से बढ़ रहा है। इसको देखते हुए एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने इस समस्या पर गहराई से जांच के लिए एयरकेयर नाम का अध्ययन शुरू किया है। इसका नेतृत्व रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर कर रहे हैं। टीम में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और अन्य विभागों के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
इस अध्ययन में फेफड़े के कैंसर के 1,615 मरीजों और 1,615 कंट्रोल्स (तुलनात्मक समूह के सदस्यों) को शामिल किया जाएगा। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि दिल्ली की जहरीली हवा, खासकर पीएम 2.5 के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़े के कैंसर का खतरा कितना बढ़ता है। धूम्रपान न करने वालों में यह कैसे कैंसर पैदा कर रहा है, क्या भारतीय लोगों में कोई खास आनुवंशिक बदलाव होता है, जो प्रदूषण से कैंसर का खतरा बढ़ाता है जैसे पहलुओं पर वैज्ञानिक जांच करेंगे।
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नतीजे पर शोधकर्ता तैयार करेंगे खास स्क्रीनिंग मॉडल
एयरकेयर अध्ययन के नतीजे से भारत के लिए खास तौर पर तैयार स्क्रीनिंग (जांच) मॉडल बनाया जा सकेगा, ताकि शुरुआत में ही बीमारी पकड़ी जा सके और इलाज आसान हो। इससे नीति-निर्माताओं को प्रदूषण कम करने और लोगों की जान बचाने के लिए बेहतर कदम उठाने में मदद मिलेगी। डॉक्टरों का मानना है कि दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में तुरंत सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
तंबाकू और शराब से दूरी बहुत जरूरी
डॉ. अभिषेक शंकर ने कहा है कि कैंसर से बचने का सबसे अच्छा तरीका जोखिम वाले कारकों से दूर रहना है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 30 प्रतिशत कैंसर के मामले तंबाकू के इस्तेमाल से होते हैं। हेपेटाइटिस संक्रमण से लिवर का कैंसर (हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा) हो सकता है। बचाव के उपाय बताते हुए डॉ. शंकर ने कहा कि तंबाकू और शराब बिल्कुल न लें। एचपीवी से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाएं। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और वजन नियंत्रित रखने की सलाह दी।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के प्रोफेसर और हेड डॉ. सुनील ने कहा कि माना जाता है कि प्रदूषण के कुछ खास तत्व कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। ऐसा ही एक तत्व पीएम 2.5 है, लेकिन इसके भी कई उप-कारक हैं।