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अमर उजाला शब्द सम्मान: मेल-मुलाकात से खिली अपनेपन की शाम, शब्दों के मंच पर सुरों का साथ

आदित्य पांडेय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 12 Feb 2026 03:22 AM IST
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सार

उस्ताद शुजात हुसैन खान ने जैसे ही सितार पर अपनी अंगुलियां फेरीं, दर्शक मानो कुर्सियों को पकड़कर बैठ गए और पूरा माहौल सुरों और शब्दों से गूंज उठा। 

Amar Ujala Shabd Samman: An evening of intimacy blossomed with meetings
अमर उजाला शब्द सम्मान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अमर उजाला शब्द सम्मान 2025 में इस बार साहित्य और संगीत का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने सभागार में मौजूद लोगों को देर तक अपनी कुर्सियों से उठने नहीं दिया। उस्ताद शुजात हुसैन खान ने जैसे ही सितार पर अपनी अंगुलियां फेरीं, दर्शक मानो कुर्सियों को पकड़कर बैठ गए और पूरा माहौल सुरों और शब्दों से गूंज उठा। 

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आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में आयोजित इस समारोह में शुरुआत से ही उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में पहुंचे सभी आगंतुकों का रेड कार्पेट पर स्वागत किया गया।
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सभागार में प्रवेश करते ही देश के अलग-अलग हिस्सों से आए साहित्यकारों, लेखकों, कवियों और प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े लोगों के बीच मेल-मुलाकात का दौर शुरू हो गया। माहौल में अपनापन और उत्सुकता दोनों साफ झलक रहे थे। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत के बाद मंच से देश की दो प्रतिष्ठित महिला साहित्यकारों का परिचय कराया गया।
 
मथुरा में जन्मीं हिंदी की जानी-मानी कथाकार ममता कालिया और इंफाल में जन्मीं मणिपुरी भाषा की विशिष्ट लेखिका डॉ. अरमबम ओंगबी मेमचौबी का नाम लेते ही सभागार तालियों से गूंज उठा। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान ने मंच संभाला।

उन्होंने जैसे ही सितार पर पहली धुन छेड़ी, दर्शकों से दाद मिलने लगी। उनकी प्रस्तुति धीरे-धीरे गहराती गई और सभागार में बैठे लोग मंत्रमुग्ध होकर कुर्सी पर चिपकर सुनते रहे। भगवान शंकर पर आधारित एक बंदिश ने तो पूरे माहौल को भक्ति रस में डुबो दिया। 

कार्यक्रम को सभी ने सराहा। साहित्य प्रेमी प्रदीप अरोड़ा ने कहा कि कार्यक्रम में मौजूद हर शख्स का साहित्य के प्रति लगाव को साफ महसूस किया जा सकता था। जगदीश प्रधान ने इसे प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि जब साहित्य को इतना बड़ा मंच मिलता है तो लिखने की ऊर्जा बढ़ती है। 

उस्ताद की मुस्कान ने मोहा मन, चुटीली बातों ने रिझाया 
उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कार्यक्रम में जहां अपने सितार की धुन के जरिये श्रोताओं को बांधे रखा, वहीं अपनी चुटीली बातों से माहौल को हल्का और खुशनुमा भी बनाया। प्रस्तुति के बीच-बीच में कही गईं उनकी टिप्पणियों पर सभागार तालियों से गूंजता रहा।

सितार वादन के दौरान उस्ताद ने दर्शकों से सीधा संवाद भी किया। उन्होंने हॉल में कुछ महिलाओं को आपस में बातचीत करते देखा तो मुस्कुराते हुए बोले, महिलाओं की बातें कभी खत्म नहीं होतीं।

यह सुनते ही सभागार में ठहाके और तालियां गूंज उठीं। एक और मौके पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, अब कार्यक्रम में करीना, कैटरीना तो आने से रहीं, अब मुझे ही सुनना पड़ेगा। उनका इशारा था कि सभी श्रोता ध्यान से बैठकर संगीत का आनंद लें। इस टिप्पणी पर भी लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। 

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