{"_id":"698cc02feb58c8d8a80c6fd8","slug":"nhrc-expresses-serious-concern-over-harassment-of-minors-issues-notice-to-police-commissioner-seeking-respons-2026-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram: नाबालिगों के यौन उत्पीड़न पर NHRC की गंभीर चिंता, पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram: नाबालिगों के यौन उत्पीड़न पर NHRC की गंभीर चिंता, पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
पीटीआई, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 11 Feb 2026 11:16 PM IST
विज्ञापन
सार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हरियाणा के गुरुग्राम में एक निर्माणाधीन भवन में पांच नाबालिगों को कथित तौर पर 18 घंटे तक बंधक बनाकर उनके साथ यौन उत्पीड़न और बर्बरता की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने हरियाणा के गुरुग्राम में एक निर्माणाधीन भवन में पांच नाबालिगों को कथित तौर पर 18 घंटे तक बंधक बनाकर उनके साथ यौन उत्पीड़न और बर्बरता की मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस गंभीर मामले में शहर के पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
Trending Videos
एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि यदि समाचार रिपोर्ट में बताई गई बातें सच हैं, तो यह बच्चों के मानवाधिकारों का एक गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने कहा कि गुरुग्राम के डीएलएफ फेज 3 इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत में 11 से 14 वर्ष की आयु के पांच बच्चों को कथित तौर पर 18 घंटे तक बंधक बनाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों को कॉन्ट्रैक्टर और उसके चार कर्मचारियों ने निर्माण सामग्री चुराने के संदेह में हिरासत में लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
यौन उत्पीड़न और बर्बर यातना का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बंधक बनाए गए बच्चों के कपड़े उतरवाए गए, उनका यौन उत्पीड़न किया गया और उन्हें क्रूर यातनाएं दी गईं। आरोप है कि अपराधियों ने उन पर पेट्रोल भी डाला। यह घटना मानवाधिकारों के हनन का एक गंभीर मामला दर्शाती है, जिस पर आयोग ने तत्काल कार्रवाई की है।
विस्तृत रिपोर्ट के लिए दो सप्ताह का समय
आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर से दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। एनएचआरसी इस बात पर जोर दे रहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का घोर उल्लंघन होगा। आयोग इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है।