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बारामती प्लेन हादसा: नए घर की दहलीज पर थमीं खुशियां, तैयारी थी डोली उठाने की, उठानी पड़ी पायलट शांभवी की अर्थी

सचिन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 30 Jan 2026 09:00 AM IST
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सार

Baramati Plane Crash Shambhavi Pathak : बृहस्पतिवार को कैप्टन शांभवी पाठक की अंतिम विदाई में शामिल होने आए लोगों के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। शांभवी की जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर शुरू होने वाला था। रिश्तेदारों ने बताया कि उसकी शादी मार्च में थी।

Baramati Plane Crash: Wedding Preparations Turn Into Funeral for Pilot Shambhavi Pathak
Captain Shambhavi Pathak - फोटो : PTI
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दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव की ए-1 ब्लॉक की एक गली आज खामोश है। वही गली, जहां कुछ दिन पहले तक नए घर में बसने की खुशी थी, रिश्तेदारों के आने-जाने की बातें थीं, गृह प्रवेश और शादी की तैयारियां चल रही थीं। अब उसी गली में सन्नाटा है। 

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सफदरजंग एन्क्लेव ए-1 मकान नंबर 313 के दरवाजे बंद हैं। घर में जैसे किसी ने वक्त को रोक दिया हो। यह घर है महाराष्ट्र के बारामती विमान हादसे में जान गंवाने वाली को-पायलट शांभवी पाठक का, जिसकी असमय मौत ने परिवार को झकझोर कर रख दिया है।

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Baramati Plane Crash: Wedding Preparations Turn Into Funeral for Pilot Shambhavi Pathak
शांभवी का घर - फोटो : अमर उजाला
शांभवी का परिवार हाल ही में यहां शिफ्ट हुआ था। गृह प्रवेश की तारीख तय करने की बातें चल रही थीं। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। बेटी की मौत की खबर ने उन सभी खुशियों को एक ही पल में मातम में बदल दिया। शांभवी के पड़ोसियों ने बताया कि वह बेहद शांत और विनम्र स्वभाव की थी। वहीं, सफदरजंग एन्क्लेव में तैनात एक गार्ड ने बताया कि शांभवी अपने परिवार से बहुत जुड़ी हुई थी। नए घर को लेकर वह भी खुश थी। 

मार्च में होने वाली थी की शादी
शांभवी की जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर शुरू होने वाला था। रिश्तेदारों ने बताया कि उसकी शादी मार्च में थी। मां अपनी बेटी के लिए नए कपड़े, गहने और भविष्य के सपने सजा रही थीं। वह एक मां थीं, जो अपनी बेटी को दुल्हन के रूप में देखने का सपना हर दिन देखती थी।

तैयारी थी डोली उठाने की, उठानी पड़ी शांभवी की अर्थी
बृहस्पतिवार को शांभवी की अंतिम विदाई में शामिल होने आए लोगों के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। करीब 25 साल की शांभवी पाठक वीएसआर वेंचर्स के लियरजेट-45 विमान में फर्स्ट ऑफिसर (पायलट) थीं। उनकी मां वायुसेना के बाल भारती स्कूल में शिक्षिका हैं। उनके पिता वायुसेना से सेवानिवृत्त पायलट हैं। उनका छोटा भाई नौसेना में कार्यरत है। पड़ोस में ब्यूटी पार्लर चलाने वाली शिल्पी कहती हैं, शांभवी बेहद सुलझी हुई, मीठी और शांत स्वभाव की लड़की थी। सुरक्षा गार्ड जितेंद्र बताते हैं कि शांभवी जब भी दिखती थीं, हमेशा नमस्ते करती थीं। उनका परिवार बेहद विनम्र था और समाज में सबका सम्मान करता है।

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