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Noida: अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 300 लोगों से ठगी करने वाले तीन गिरफ्तार; पांच हजार यूजर्स का मिला डाटा

अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 30 Jan 2026 03:22 AM IST
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सार

कोतवाली फेज वन पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये जालसाज लैप्स पॉलिसी के अलावा रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर भी ठगी करते थे। इन लोगों ने 300 से अधिक लोगों से ठगी की है।

Noida: Illegal call centre busted, three arrested for duping 300 people
demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लैप्स पॉलिसी को आसानी से रिन्यू व मैच्योरिटी कराने का झांसा देकर ठगी करने वाले अवैध कॉल सेंटर का नोएडा पुलिस ने खुलासा किया है। कोतवाली फेज वन पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये जालसाज लैप्स पॉलिसी के अलावा रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर भी ठगी करते थे। इन लोगों ने 300 से अधिक लोगों से ठगी की है। आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, आठ स्मार्ट मोबाइल फोन, आठ कीपैड मोबाइल फोन, तीन पीएनटी फोन और 15 कालिंग डाटा शीट मिले हैं।

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एडीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि हाल में 20 से अधिक लोगोंं की शिकायतें आई थी कि सेक्टर 10 में एक अवैध कॉल सेंटर चल रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने बृहस्पतिवार को छापेमारी कर अवैध कॉल सेंटर का खुलासा किया। यहां से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान ग्रेनो वेस्ट के इकोविलेज निवासी वरूण शर्मा, ला रेजिडेंसी निवासी मदन गुप्ता और भंगेल निवासी प्रदीप वर्मा के रूप में हुई है।
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पूछताछ में पता चला कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार कर लोगों को लैप्स बीमा पॉलिसी को रिन्यू कराने, रियल एस्टेट में निवेश और एलआईसी पॉलिसी को कम समय में मैच्योर कराने के नाम पर झांसे में लेते थे। इसके बाद पीड़ितों से प्रोसेस को आगे बढ़ाने के लिए फीस के तौर पर रकम जमा कराई गई। साथ ही रजिस्ट्रेशन शुल्क, बीमा रिन्यू कराने का शुल्क, पॉलिसी मौच्योर कराने का फीस और रियल स्टेट में निवेश कराने का शुल्क के बहाने 10 हजार पांच रुपये से 1 लाख 5 हजार रुपये जमा करवाते थे।

पीड़ितों को कुछ दिन अलग-अलग फर्जी स्क्रीन शॉट भेजकर विश्वास भी दिया जाता था और कुछ दिनों बाद आरोपी उनसे संपर्क तोड़ लेते थे। आरोपी फर्जी बैंक खातो में लेनदेन करते थे। ये आरोपी पिछले कई महीने से फ्रॉड कर रहे थे। इस मामले में एनसीआरपी पॉर्टल पर शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस पूछताछ में पता चला कि ये आरोपी कई वेबसाइट को लेकर डार्क वेब से पॉलिसी धारकों का डाटा लेते थे।

20 खाते मिले, 1.20 करोड़ फ्रीज
पुलिस की जांच में पता चला कि झांसे में आए एक व्यक्ति से दस हजार से लेकर एक लाख रुपये फीस, रजिस्ट्रेशन और अन्य बहाने के रुपये पहले जमा करा लेते थे और कुछ दिन बाद उनसे संपर्क तोड़ लेते थे। आरोपी पुलिस से बचने के लिए रकम ऑनलाइन बेटिंग एप कराने वाले बैंक अकाउंट में मंगवाते थे। आरोपियों के पास से 20 बैंक खाते मिले हैं। वहीं पुलिस ने ठगी की 1 करोड़ 20 लाख रुपये रकम को फ्रीज कराया गया है। इनके बैंक अकाउंट पर देश के अलग-अलग राज्यों से 20 से अधिक शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल पर मिली हैं।

बिल्डिंग मालिक को भेजा जाएगा नोटिस
एडीसीपी ने बताया कि मामले में पुलिस की जांच में पता चला है कि इनके पास पांच हजार लोगों का डाटा मिला है। आरोपियों ने जस्टडायल से कुछ डाटा लेने की बात कही है। अब पुलिस संबंधिात कंपनी और बिल्डिंग मालिक को नोटिस भेजगी। पूछताछ में यह भी जानकारी मिली है कि हर दिन 100 से अधिक लोगों से संपर्क किया जाता था। इनमें कुछ लोग इनके झांसे में आ जाते थे।

ठगी की रकम से खेलते थे सट्टा
पुलिस की जांच में पता चला है कि अवैध कॉल सेंटर के संचालक ऑनलाइन सट्टे से भी जुड़े थे। आरोपी ठगी करने के बाद वह रकम ऑन लाइन बेटिंग एप पर लगाते थे। इनके पास से जो खाते मिले हैं। वह अलग अलग नाम पर हैं। प्राथमिक जांच में लग रहा है कि किसी दूसरे के नाम व फोटो लगाकर खाते खुलवाए गए हैं। इस बारे में बैंक से भी जानकारी ली जा रही है।

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