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Delhi Jal Board: दिल्ली में घर बनाने वालों को बड़ी राहत, अब 25% आईएफसी भुगतान पर भी मिलेगी एनओसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:34 AM IST
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सार
अब इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (आईएफसी) का पूरा पैसा पहले जमा किए बिना भी एनओसी मिलेगी, जिससे कई रुके हुए प्रोजेक्ट्स फिर से शुरू हो पाएंगे। दिल्ली जल बोर्ड ने आईएफसी को लेकर अहम फैसला लिया है, जिससे आम लोगों और डेवलपर्स को राहत मिलेगी।
पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
दिल्ली में घर बनाने और निर्माण कार्य शुरू करने वालों के लिए राहत भरी खबर है। अब इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (आईएफसी) का पूरा पैसा पहले जमा किए बिना भी एनओसी मिलेगी, जिससे कई रुके हुए प्रोजेक्ट्स फिर से शुरू हो पाएंगे। दिल्ली जल बोर्ड ने आईएफसी को लेकर अहम फैसला लिया है, जिससे आम लोगों और डेवलपर्स को राहत मिलेगी।
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अब बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के समय कुल आईएफसी का सिर्फ 25% भुगतान करके प्रोविजनल एनओसी ली जा सकेगी। बाकी राशि पानी के कनेक्शन की अंतिम मंजूरी के समय, उस समय की दरों के मुताबिक जमा करनी होगी।
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जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक कर ये फैसला लिया। सरकार ने इसे लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान माना है। पिछले कुछ बरसों में आईएफसी की गणना प्रणाली बदलने के बाद शुल्क में 5 से 10 गुना तक बढ़ोतरी हो गई थी। इससे कई लोगों के प्रोजेक्ट्स रुक गए थे और बिल्डिंग अप्रूवल में देरी हो रही थी।
पुराने रुके प्रोजेक्ट भी शुरू हो पाएंगे
नए फैसले के बाद अब लोग कम खर्च में अपना निर्माण कार्य शुरू कर सकेंगे। इससे न सिर्फ पुराने रुके हुए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलेगी, बल्कि नए निर्माण कार्यों को भी रफ्तार मिलेगी। मंत्री ने कहा कि सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ऊंचा आईएफसी लोगों को घर बनाने से रोक रहा है। अब सिस्टम को लोगों के अनुकूल बनाया गया है, ताकि उन्हें अनावश्यक बोझ न झेलना पड़े।
200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियां आईएफसी से बाहर
मंत्री ने बताया कि 200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियां आईएफसी से पूरी तरह मुक्त रहेंगी, जबकि बड़े प्लॉट्स के लिए भी नियमों को सरल और तर्कसंगत बनाया गया है। अनुमान है कि कई मामलों में कुल आईएफसी देनदारी 50 से 70 फीसदी तक कम हो सकती है। इस कदम से निर्माण और पुनर्विकास गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। साथ ही, पारदर्शिता बढ़ेगी और लोग नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।