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बायोगैस ऊर्जा स्वराज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : प्रो. वीरेंद्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2026 07:10 PM IST
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-आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बायोगैस संयंत्र की वकालत की
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली । इस्राइल-अमेरिका और ईरान युद्ध से पैदा हुए ऊर्जा संकट से निपटने के लिए आईआईटी दिल्ली के ग्रामीण विकास एवं प्रौद्योगिकी केंद्र ने बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के इस्तेमाल की वकालत की है। केंद्र के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय ने कहा कि यह देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जा सकता है। यह ऊर्जा स्वराज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

भारत के सात लाख से अधिक गांवों में कृषि अवशेष, गोबर, पशु अपशिष्ट, खाद्य अपशिष्ट और अन्य जैविक पदार्थ बड़ी मात्रा में उत्पन्न होते हैं। शहरों में भी बड़ी मात्रा में जैविक कचरा है। साथ ही शक्कर मिलों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों आदि से भी बड़ी मात्रा में जैविक अपशिष्ट निकलते हैं। अगर इनको वैज्ञानिक ढंग से एकत्रित कर बायोगैस बनाया जाए तो यह स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत बन सकता है। बायोगैस को उन्नत करके कंप्रेस्ड बायोगैस में परिवर्तित किया जा सकता है। इसे परिवहन ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है।
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प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय ने बताया कि बायोगैस संयंत्रों से निकलने वाला डाइजेस्ट उच्च गुणवत्ता वाले जैव उर्वरक होते हैं। यह रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हैं। इस परिवर्तन को गति देने के लिए राष्ट्रीय ग्राम ऊर्जा प्राधिकरण या इसी प्रकार के एक मिशन आधारित संस्था स्थापित की जा सकती है।
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