बीजेपी ने एक तीर से साधे दो निशाने
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आम आदमी पार्टी के बाद अब भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर औद्योगिक घराने को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। चांदनी चौक लोकसभा के भाजपा प्रत्याशी हर्षवर्धन ने कांग्रेस के प्रत्याशी कपिल सिब्बल पर रिलायंस दूरसंचार कंपनी को करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने संबंधित मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। यही नहीं हर्षवर्धन ने सिब्बल पर अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस की कंपनी को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा कि जनता के हितों की परवाह नहीं करते हुए 650 करोड़ रुपये का जुर्माना माफ कर दिया। उन्होंने सिब्बल से पूछा कि जुर्माना वसूलने की जगह दोबारा सेवाएं शुरू करने की इजाजत कैसे दी गई।
वाजपेयी सरकार का है मामला
हर्षवर्धन ने बताया कि वाजपेयी सरकार में एक टेलीकॉम नीति बनी थी, जिसमें टेलीफोन और मोबाइल की सुविधा देने वाली कंपनियों को फायदा नहीं होने की स्थिति में सब्सिडी का प्रावधान था।
यह नीति कांग्रेस की सरकार में भी जारी रही। रिलायंस कंपनी ने पूर्वोत्तर राज्यों में 22 नवंबर, 2010 से अचानक दूरसंचार सेवाएं देनी बंद कर दी। बाद में यह बहाना बनाया गया कि कंपनी को घाटा हो रहा है। जबकि वाजपेयी सरकार इस कंपनी को सब्सिडी दे चुकी थी।
उन्होंने बताया कि सरकार और प्राइवेट कंपनियों के बीच कोई विवाद होने पर टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटिलमेंट आर्बीट्रेशन ट्रिब्यूनल के पास जाना चाहिए था न कि सेवाएं बंद कर देनी थी। लेकिन इस मामले में रिलायंस कंपनी ने सरकार के सभी निर्देश, कानूनों, नीतियों और संस्थाओं का उल्लंघन किया।
'रिलायंस ने बनाया बहाना'
रिलायंस कंपनी ने पूर्वोत्तर राज्यों में 22 नवंबर, 2010 से अचानक दूरसंचार सेवाएं देनी बंद कर दी। बाद में यह बहाना बनाया गया कि कंपनी को घाटा हो रहा है।
इस पर तत्कालीन दूरसंचार सचिव ने रिलायंस कंपनी पर प्रति परिक्षेत्र 50 करोड़ रुपया जुर्माना और लाइसेंस निरस्त करने की बात की। मगर, न तो लाइसेंस रद्द किया गया और न ही कंपनी बंद की गई। सिब्बल ने दो दिन के अंदर ही रिलायंस का एकतरफा पक्ष किया और दूरसंचार सचिव के आदेश को दरकिनार कर कंपनी को सभी अधिकार दे दिए।
इसमें जनता के हितों की परवाह किए बिना 650 करोड़ रुपये का जुर्माना माफ कर दिया। हर्षवर्धन ने इसी मुद्दे पर कपिल सिब्बल से पूछा कि जुर्माना वसूलने की जगह दोबारा सेवाएं शुरू करने की इजाजत कैसे दी गई।