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Delhi NCR News: कम उम्र में कोलेस्ट्रॉल जांच से हृदय रोग का बोझ होगा कम
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(एएचए और एसीसी ने डिस्लिपिडेमिया के दिशा निर्देश जारी किए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल की बीमारियों की रोकथाम के लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) ने डिस्लिपिडेमिया (कोलेस्ट्रॉल स्तर में असंतुलन) के दिशा निर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में लगभग 81 फीसदी आबादी डिस्लिपिडेमिया से प्रभावित है। हृदय रोग का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के पूर्व कार्डियोलॉजी प्रोफेसर और वर्तमान में मेदांता-मूलचंद हार्ट सेंटर में सहायक निदेशक डॉ. तरुण कुमार ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में कम उम्र (लगभग 19–20 वर्ष) से ही कोलेस्ट्रॉल जांच की सिफारिश भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। दिशा-निर्देश में दक्षिण एशियाई आबादी को एक प्रमुख जोखिम वृद्धि के रूप में मान्यता दी गई है। इसका मतलब है कि भारतीयों में कम कोलेस्ट्रॉल स्तर पर भी हृदय रोग का खतरा अधिक होता है। हालांकि, भारत में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया पहले से ही 18 वर्ष की उम्र में पहली लिपिड जांच पर जोर देता है।
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नई दिल्ली। दिल की बीमारियों की रोकथाम के लिए अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) ने डिस्लिपिडेमिया (कोलेस्ट्रॉल स्तर में असंतुलन) के दिशा निर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में लगभग 81 फीसदी आबादी डिस्लिपिडेमिया से प्रभावित है। हृदय रोग का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के पूर्व कार्डियोलॉजी प्रोफेसर और वर्तमान में मेदांता-मूलचंद हार्ट सेंटर में सहायक निदेशक डॉ. तरुण कुमार ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में कम उम्र (लगभग 19–20 वर्ष) से ही कोलेस्ट्रॉल जांच की सिफारिश भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। दिशा-निर्देश में दक्षिण एशियाई आबादी को एक प्रमुख जोखिम वृद्धि के रूप में मान्यता दी गई है। इसका मतलब है कि भारतीयों में कम कोलेस्ट्रॉल स्तर पर भी हृदय रोग का खतरा अधिक होता है। हालांकि, भारत में कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया पहले से ही 18 वर्ष की उम्र में पहली लिपिड जांच पर जोर देता है।
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