Delhi: पर्यटन बजट तीन गुना से ज्यादा बढ़ा, पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल; सार्वजनिक परिवहन के लिए भी खास
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को 2026-27 के लिए लगभग ₹1,03,700 करोड़ का बजट पेश किया। पर्यटन विभाग को पिछले साल के 121 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 412 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कला, संस्कृति और भाषा विभाग के लिए 173 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
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बजट में पर्यटन, कला और संस्कृति पर खास फोकस रखते हुए सरकार ने न सिर्फ बजट में भारी बढ़ोतरी की है, बल्कि नई योजनाओं के जरिए राजधानी की पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की योजना भी बनाई है। पर्यटन विभाग को पिछले साल के 121 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 412 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कला, संस्कृति और भाषा विभाग के लिए 173 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिससे सांस्कृतिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी।
ब्रांडिंग दिल्ली योजना के तहत पर्यटन मास्टर प्लान, नई टूरिज्म पॉलिसी और डिजिटल कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए 50 करोड़ रुपये दिए गए हैं। राजधानी में पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने की घोषणा की गई है ताकि दिल्ली को वैश्विक सांस्कृतिक नक्शे पर मजबूत पहचान मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा शहर बनाना है, जहां आने वाला हर पर्यटक सिर्फ ऐतिहासिक इमारतें ही नहीं, बल्कि एक साफ-सुथरा, जीवंत और स्वागत करने वाला माहौल भी महसूस करे। 1,000 आधुनिक टॉयलेट ब्लॉक बनाए जाएंगे। शहर के राउंडअबाउट और प्रमुख चौराहों का सौंदर्याकरण किया जाएगा, 13 बड़े एंट्री प्वाइंट्स पर भव्य वेलकम गेट बनाए जाएंगे। इन सभी कामों के लिए 2026-27 में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार के सहयोग से पुरानी दिल्ली के टाउन हॉल को ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। ये पहल वन सिटी, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन विजन का हिस्सा है, जिसका मकसद दिल्ली को बेहतर सुविधाओं, कनेक्टिविटी और समृद्ध सांस्कृतिक अनुभव के साथ विश्वस्तरीय शहर बनाना है।
फिल्म पॉलिसी के लिए 5 करोड़
सरकार दिल्ली को कंसर्ट इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ा रही है। इसी के तहत नई दिल्ली फिल्म पॉलिसी लाई जाएगी, जिसके लिए 5 करोड़ रुपये रखे गए हैं। एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए नई नीति भी लाई जाएगी।
सार्वजनिक परिवहन : दिल्ली में 2029 तक सड़कों पर दौड़ेंगी 12 हजार इलेक्ट्रिक बसें
राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने बजट में बड़े एलान किए हैं। सरकार ने 2029 तक दिल्ली में 12 हजार इलेक्ट्रिक बसें दौड़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत परिवहन विभाग के लिए 8,374 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। मेट्रो विस्तार और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
6,130 नई इलेक्ट्रिक बसें चरणबद्ध तरीके से प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के तहत जोड़ी जाएंगी। मार्च 2027 तक राजधानी में कुल 7,500 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें 5,800 इलेक्ट्रिक बसें होंगी। वर्ष 2029 तक 12,000 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारने की तैयारी है।
मेट्रो : राजधानी की लाइफ लाइन के लिए मिले 2,885 करोड़ रुपये
दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण और अन्य परियोजनाओं के लिए 2,885 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। एनसीआर में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए दो नए नमो भारत कॉरिडोर-दिल्ली-एसएनबी और दिल्ली-पानीपत-सोनीपत को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से यात्रा समय में करीब 60 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। क्षेत्रीय तीव्र रेल परिवहन प्रणाली के लिए 568 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
डीटीसी : 05 नए स्वचालित परीक्षण केंद्र डीटीसी डिपो में होंगे स्थापित
200 करोड़ रुपये का बजट इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 के लिए रखा गया है। बवाना, गाजीपुर, सवदा घेवरा, जीटी करनाल रोड और दिचाओं कलां स्थित डीटीसी डिपो में पांच नए स्वचालित परीक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन पर 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बस डिपो, चार्जिंग व्यवस्था और अन्य बुनियादी ढांचे के विद्युतीकरण के लिए 320 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। फ्लाईओवर, ऊंची सड़कें और एक नई समानांतर रिंग रोड बनाने की योजना पर भी जल्द काम शुरू होगा।