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Delhi NCR News: प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड के दोषी को आत्मसमर्पण का आदेश
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1996 में संतोष ने की थी प्रियदर्शिनी मट्टू की हत्या, सोमवार तक करना होगा सरेंडर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 1996 के चर्चित प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड में दोषी संतोष कुमार सिंह को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। पीड़िता के भाई हेमंत मट्टू के दोषी की समय पूर्व रिहाई का विरोध करने पर न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने कहा कि संतोष सिंह की सजा में छूट की याचिका पर तभी विचार किया जाएगा, जब वह जेल में आत्मसमर्पण कर दें। अदालत ने आदेश दिया कि दोषी को सोमवार तक सरेंडर करना होगा।
संतोष सिंह को पिछले साल पैरोल पर रिहा किया गया था। उसके बाद हाईकोर्ट से पैरोल की अवधि बढ़वाकर वह जेल से बाहर ही रहा। हेमंत मट्टू की ओर से पेश अधिवक्ता उर्विका सूरी ने तर्क दिया कि सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) ने संतोष की समय पूर्व रिहाई की मांग को खारिज करके सही फैसला लिया था।
कानून की छात्रा थीं प्रियदर्शिनी
प्रियदर्शिनी मट्टू, जो 25 वर्षीय कानून की छात्रा थीं, की जनवरी 1996 में दिल्ली के वसंत विहार में दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। संतोष सिंह भी दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून का छात्र था। ट्रायल कोर्ट ने 1999 में उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन 27 अक्टूबर 2006 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे दुष्कर्म और हत्या का दोषी ठहराया और मृत्युदंड सुनाया। जिसे अक्टूबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 1996 के चर्चित प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड में दोषी संतोष कुमार सिंह को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। पीड़िता के भाई हेमंत मट्टू के दोषी की समय पूर्व रिहाई का विरोध करने पर न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने कहा कि संतोष सिंह की सजा में छूट की याचिका पर तभी विचार किया जाएगा, जब वह जेल में आत्मसमर्पण कर दें। अदालत ने आदेश दिया कि दोषी को सोमवार तक सरेंडर करना होगा।
संतोष सिंह को पिछले साल पैरोल पर रिहा किया गया था। उसके बाद हाईकोर्ट से पैरोल की अवधि बढ़वाकर वह जेल से बाहर ही रहा। हेमंत मट्टू की ओर से पेश अधिवक्ता उर्विका सूरी ने तर्क दिया कि सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) ने संतोष की समय पूर्व रिहाई की मांग को खारिज करके सही फैसला लिया था।
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कानून की छात्रा थीं प्रियदर्शिनी
प्रियदर्शिनी मट्टू, जो 25 वर्षीय कानून की छात्रा थीं, की जनवरी 1996 में दिल्ली के वसंत विहार में दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। संतोष सिंह भी दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून का छात्र था। ट्रायल कोर्ट ने 1999 में उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन 27 अक्टूबर 2006 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे दुष्कर्म और हत्या का दोषी ठहराया और मृत्युदंड सुनाया। जिसे अक्टूबर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।