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Corruption: कमीशनखोरी के जाल में फंसा राजधानी का स्वास्थ्य विभाग, रडार पर 100 डॉक्टर; अब ऊपर तक पहुंची जांच

Mon, 29 Jun 2026 07:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, दिल्ली
धनंजय मिश्रा, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 29 Jun 2026 07:00 AM IST
सार

बताया जा रहा कि घोटाला पूरी तरह से कमीशनखोरी से जुड़ा है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों व निजी लोगों को फायदा पहुंचाया गया।
 

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Corruption: Delhi Health Department caught in the web of kickbacks.
घोटाला। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में दवा एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद में हुए 650 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच अब शीर्ष प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, 100 से अधिक डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। इनमें घोटाले के दौरान स्वास्थ्य विभाग में अहम पदों पर तैनात कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। बताया जा रहा कि घोटाला पूरी तरह से कमीशनखोरी से जुड़ा है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों व निजी लोगों को फायदा पहुंचाया गया।

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 सूत्रों के अनुसार, एसीबी इस मामले की दो स्तरों पर जांच कर रही है। पहले स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक निर्णयों, खरीद संबंधी मंजूरियों और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है, जबकि दूसरे स्तर पर केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस), डॉक्टरों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल, तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब जांच और तेज होगी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि खरीद प्रस्तावों की मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी अनुमोदन और वित्तीय स्वीकृति के विभिन्न स्तरों पर किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही। सूत्रों का कहना है कि घोटाले के दौरान स्वास्थ्य विभाग में तैनात कम से कम पांच से सात आईएएस अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
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अस्पतालों से भेजी गई मांग से लेकर गायब फाइलों तक खंगाल रही एसीबी...
जांच एजेंसियों का फोकस केवल टेंडर प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) को भेजी गई दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और अन्य सामग्री की मांग का सीपीए की ओर से की गई वास्तविक खरीद से बारीकी से मिलान किया जा रहा है। एजेंसियां संबंधित अस्पतालों के मांग पत्र, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड और खरीद फाइलों का भी मिलान कर रही हैं। जांच में कई महत्वपूर्ण खरीद से जुड़े दस्तावेज और मूल फाइलें गायब मिली हैं। गिरफ्तार पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल, पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा और डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा से पूछताछ में इन्हीं पहलुओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जांच एजेंसी गायब रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, भुगतान संबंधी दस्तावेज की कड़ियां तलाश रही है। 
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अपने स्तर पर पसंद के अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती...
सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग में तैनात कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने अपने स्तर पर पसंद के अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती कर खरीद व्यवस्था पर प्रभाव किया है। सीपीए और उससे जुड़े अहम पदों पर की गई इन तैनातियों का फायदा उठाकर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया। यह पूरा मामला कमीशनखोरी के तहत चलाया गया है।

पूर्व डीजीएचएस समेत दो और गिरफ्तार, एसीबी को मिली रिमांड
650 करोड़ रुपये के दवा एवं चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में जांच का शिकंजा अब शीर्ष अधिकारियों तक पहुंच गया है। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस) डॉ. वत्सला अग्रवाल और तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर फाइनेंस नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को राउज एवेन्यू कोर्ट से पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया है। इस मामले में एसीबी 19 जून को तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस (एचओओ) डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार कर चुकी है। अब तक तीन वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है। जल्द ही कई वरिष्ठ अधिकारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे जाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। मामले के वित्तीय लेनदेन और मनी ट्रेल की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी एसीबी की एफआईआर के आधार पर धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसीबी की जांच के बाद ईडी भी आरोपियों से पूछताछ और आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। 


एसीबी ने यह मामला चार जून को दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया था। जांच में सरकारी अस्पतालों के लिए दवा, चिकित्सा उपकरण और अन्य सामग्री की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों का पहले ही तबादला किया जा चुका है ताकि जांच प्रभावित न हो। एसीबी का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई होगी। 

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