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Save Yamuna: हरियाणा के 6 और 8 नंबर के नाले यमुना में घोल रहे हैं जहर, एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट से खुलासा
Mon, 29 Jun 2026 07:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 29 Jun 2026 07:13 AM IST
सार
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल हरियाणा सरकार की स्थिति रिपोर्ट से यह तस्वीर सामने आई है। हालांकि सैनी सरकार ने इन दोनों ड्रेनों को 31 दिसंबर 2027 तक बंद कर सीवेज को उपचार संयंत्रों तक पहुंचाने की बात कही है।
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एनजीटी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के दावों के बीच हरियाणा के ड्रेन नंबर 6 और 8 अब भी नदी में लाखों लीटर गंदा पानी और औद्योगिक अपशिष्ट उगल रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल हरियाणा सरकार की स्थिति रिपोर्ट से यह तस्वीर सामने आई है। हालांकि सैनी सरकार ने इन दोनों ड्रेनों को 31 दिसंबर 2027 तक बंद कर सीवेज को उपचार संयंत्रों तक पहुंचाने की बात कही है।
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हरियाणा सरकार के पर्यावरण विभाग की सचिव वासवी त्यागी ने बताया कि हरियाणा में कुल सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) हैं, जिनकी कुल क्षमता 92.5 एमएलडी है। साथ ही, पांच सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी) हैं, जिनकी क्षमता 48 एमएलडी है। इनका शोधित पानी पानीपत और सोनीपत जिले से ड्रेन नंबर 6 में छोड़ा जाता है। उन्होंने बताया कि एसटीपी और सीईटीपी की अनुपालन स्थिति अदालत को सौंप दी गई है।
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गोहाना एसटीपी महारा हेड के डाउनस्ट्रीम में होने के कारण ड्रेन नंबर 8 की गुणवत्ता पर असर नहीं डालता। खरखौदा एसटीपी का पानी वेस्टर्न जुआ ड्रेन में जाकर आगे मुंगेशपुर ड्रेन में मिलता है, इसलिए इसका भी ड्रेन नंबर 8 पर प्रभाव नहीं है।
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ड्रेन का पानी नजफगढ़ नाले के रास्ते वजीराबाद के बाद यमुना में छोड़ा जा रहा
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ड्रेन का पानी अबैंडन्ड ड्रेन नंबर 6 के जरिये वजीराबाद के डाउनस्ट्रीम में यमुना में छोड़ा जा रहा है। ड्रेन नंबर 6 पानीपत के समालखा से शुरू होकर सोनीपत के नरेला बॉर्डर तक जाती है, जिसमें लगभग 42.17 एमएलडी गंदा पानी पाया गया है।
इसे रोकने की योजना है और कार्य पूरा करने की अंतिम तिथि 30 जून 2028 तय की गई है। यह ड्रेन मूल रूप से स्टॉर्म वाटर ड्रेन है। ड्रेन नंबर 6 की डिजाइन के अनुसार यह बारिश के पानी के लिए बनाई गई थी और अब इसे ट्विन कंड्यूट पाइपलाइन में बदला जा रहा है जिसका लगभग 98 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
यह है मामला
यह मामला 4 जुलाई 2024 को एक मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित खबर से जुड़ा है। इसका शीर्षक बुराड़ी में यमुना किनारे मृत अवस्था में मिली हजारों मछलियां, दुर्गंध से ग्रामीण परेशान’ है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लिया था। इससे पहले एनजीटी ने 1 दिसंबर 2025 के आदेश में ड्रेन की स्थिति के बारे में जवाब मांगा था।
31 दिसंबर 2027 तक बंद होंगे सारे नाले
रिपोर्ट के अनुसार, ड्रेन नंबर 8 महारा हेड (आरडी 15700) से शुरू होकर सोनीपत के गांव दहेसरा में यमुना नदी में मिलती है। इसकी लंबाई लगभग 68 किलोमीटर है। हाल ही में सर्वे में इसमें 15 गंदे पानी के डिस्चार्ज पॉइंट मिले थे, जिनमें से आठ को टैप कर दिया गया है। अब केवल सात पॉइंट से लगभग 0.8 एमएलडी गंदा पानी निकल रहा है। इन सभी स्रोतों को रोकने की योजना बनाई गई है और इसे 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सचिव त्यागी ने बताया कि ड्रेन नंबर 6 के गंदे पानी के लिए बंद पाइपलाइन बनाई जा रही है।