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दिल्ली में आपदा से बचने की तैयारी: आईटीओ बैराज पर खुले रहेंगे 32 गेट, डिजिटल निगरानी से मिलेगी बाढ़ की चेतावनी

Fri, 07 Aug 2026 03:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन राजपूत, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 07 Aug 2026 03:07 AM IST
सार

साल 2023 में आई भीषण बाढ़ के दौरान आईटीओ बैराज के गेट समय पर नहीं खुलने पर सवाल उठे थे।

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Delhi: 32 gates at ITO Barrage to remain open; digital monitoring to provide flood warnings
file pic - फोटो : X @ANI

विस्तार

दिल्ली में वर्ष 2023 की भीषण बाढ़ से सबक लेते हुए यमुना के जल प्रबंधन में बड़ा बदलाव किया गया है। हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि अब आईटीओ बैराज के सभी 32 गेट स्थायी रूप से खुले रखे जा रहे हैं, ताकि यमुना का पानी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके जिससे बाढ़ के दौरान जलभराव का खतरा कम हो। साथ ही बैराज पर अत्याधुनिक पर्यवेक्षी नियंत्रण और डाटा अधिग्रहण (स्काडा) प्रणाली स्थापित की जाएगी। इससे यमुना के जलस्तर, पानी के बहाव और अन्य अहम आंकड़ों की रियल टाइम निगरानी संभव होगी।

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हरियाणा सरकार का मानना है कि इससे बाढ़ के दौरान पानी का दबाव कम होगा और दिल्ली में जलभराव से काफी हद तक बचाव हो सकेगा। हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि बैराज के सभी गेट खुले रखे गए हैं और उनकी नियमित जांच व रखरखाव भी किया जा रहा है,। रिपोर्ट के मुताबिक, आईटीओ बैराज का निर्माण कभी राजघाट थर्मल पावर प्लांट को कूलिंग के लिए पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। अब यह पावर प्लांट बंद हो चुका है, इसलिए बैराज की भूमिका भी बदल गई है। इसे अब यमुना के जलस्तर और पानी के प्रवाह की निगरानी करने वाले आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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बाढ़ के बाद बदली व्यवस्था
साल 2023 में आई भीषण बाढ़ के दौरान आईटीओ बैराज के गेट समय पर नहीं खुलने पर सवाल उठे थे। आरोप था कि पानी के बहाव में रुकावट आने से दिल्ली के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। इसके बाद बैराज की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई और अब इसे नई व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है।
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स्काडा तकनीक रखेगी हर पल नजर
यमुना की निगरानी को हाईटेक बनाने के लिए आईटीओ बैराज पर स्काडा प्रणाली लगाई जाएगी। इस डिजिटल सिस्टम के जरिए नदी के जलस्तर, पानी के बहाव और अन्य अहम आंकड़ों की रियल टाइम जानकारी मिलेगी। इससे बाढ़ जैसी आपात स्थिति में अधिकारियों को तुरंत निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इस परियोजना को जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्का संडा एक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का एकयुक्त औद्योगिक नियंत्रण तंत्र है। इसका उपयोग दूरस्थ स्थानों की मशीनों व प्रक्रियाओं पर वास्तविक समय में नजर रखने, डाटा जुटाने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

वैज्ञानिक तरीके से होगी बाढ़ क्षेत्र की पहचान
हरियाणा सरकार ने एनजीटी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हथनीकुंड बैराज से दिल्ली सीमा तक के आवश्यक आंकड़े केंद्रीय जल आयोग को उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसके अलावा सर्वे ऑफ इंडिया और आईआईटी रुड़की की मदद से यमुना के फ्लड प्लेन की मैपिंग और फ्लड प्लेन जोनिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। इसे 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सरकार का कहना है कि खुले गेट, आधुनिक डिजिटल निगरानी प्रणाली और वैज्ञानिक आधार पर तैयार फ्लड प्लेन मैपिंग से यमुना के जल प्रबंधन को पहले से अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।


सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की तैयारी

  • यमुना के तटबंधों एवं रेगुलेटरों को मजबूत किया गया है।
  • प्रमुख पंप हाउसों का उन्नयन कार्य पूरा हो गया है।
  • 22 प्रमुख नालों सहित कुल 77 नालों से 30 लाख टन से अधिक गाद साफ की गई। अभी भी यह काम चल रहा है।
  • पानी निकालने के लिए 243 पंप लगाए गए हैं।
  • आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए 41 नाव, 31 मोटरबोट इंजन और 12 बोट कैरिज ट्रालियां उपलब्ध।
  •  यमुना तटबंध और नालों से पानी निकासी की निगरानी के लिए सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, पीडब्ल्यूडी और एमसीडी की संयुक्त निरीक्षण समितियां गठित की गई है। नियमित गश्त।
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