Delhi: बीएस मानकों के बाद अब ई-ट्रकों की बारी, ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नई हलचल; सरकार-उद्यमियों में चर्चा तेज
बीएस-3, बीएस-4 और बीएस-6 उत्सर्जन मानकों के बाद अब सरकार की नजर कॉमर्शियल वाहनों, खासकर भारी ट्रकों को इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर समेत देश का ट्रांसपोर्ट सेक्टर फिर बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा दिखाई दे रहा है। बीएस-3, बीएस-4 और बीएस-6 उत्सर्जन मानकों के बाद अब सरकार की नजर कॉमर्शियल वाहनों, खासकर भारी ट्रकों को इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में है। फिलहाल इस संबंध में कोई औपचारिक नीति लागू नहीं हुई है लेकिन केंद्र सरकार के मंत्रालयों, ऑटोमोबाइल कंपनियों और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच लगातार मंथन चल रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में माल ढुलाई का पूरा ढांचा बड़े तकनीकी बदलाव से गुजर सकता है।
उद्योग जगत का मानना है कि इस बदलाव की सफलता काफी हद तक इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन सुविधाओं पर निर्भर करेगी। परिवहन विशेषज्ञ डॉ. अनिल छिकारा के अनुसार, भारत जैसे बड़े देश में इलेक्ट्रिक ट्रकों को व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी सपोर्ट और लंबी दूरी के रूट्स पर सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी होगा। यदि नेशनल हाईवे और बड़े मालवाहक कॉरिडोर पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन विकसित हो जाते हैं तो ट्रांसपोर्ट सेक्टर नई तकनीक को अपनाने के लिए तैयार हो जाएगा। विशेषज्ञों ने सीएनजी मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती दौर में वहां भी चुनौतियां थीं लेकिन जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हुआ, बाजार ने खुद बदलाव को स्वीकार कर लिया। इसी तरह इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के लिए भी मजबूत व्यवस्था सबसे अहम होगी।
वाहनों की वास्तविक तकनीकी स्थिति व मेंटेनेंस को भी दिया जाए महत्व...
दिल्ली में बीएस-4 मालवाहक वाहनों पर लागू प्रतिबंध और पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ईसीसी) को लेकर भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर में चर्चा है। कारोबारियों का कहना है कि बीएस मानकों के आधार पर लागू नियमों के साथ-साथ वाहनों की वास्तविक तकनीकी स्थिति और मेंटेनेंस को भी महत्व दिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क पर चलते वाहनों के वास्तविक उत्सर्जन की जांच के लिए अब आधुनिक तकनीक उपलब्ध है। ऐसे में भविष्य में तकनीकी जांच आधारित व्यवस्था अधिक प्रभावी साबित हो सकती है। उनका कहना है कि अच्छी स्थिति में रखे गए वाहन कई बार अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, इसलिए नीति निर्माण में तकनीकी पक्षों को भी शामिल करना जरूरी है।
विदेशों में ईवी ट्रकों का बढ़ा चलन
चीन, जर्मनी, स्वीडन, नीदरलैंड और अमेरिका में इलेक्ट्रिक ट्रकों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी (आईईए) की रिपोर्ट के अनुसार 2023 में दुनिया भर में लगभग 54,000 इलेक्ट्रिक ट्रक बिके थे और यूरोप में इनकी बिक्री लगभग तीन गुना बढ़ी। वाल्वो ट्रक्स यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों की बड़ी कंपनी मानी जा रही है। कंपनी के इलेक्ट्रिक ट्रक माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स में इस्तेमाल हो रहे हैं।
अमेजन ने भी ब्रिटेन में सैकड़ों ईवी ट्रक सड़कों पर उतारे हैं जो उसके वेयरहाउस और डिलीवरी नेटवर्क के बीच सामान पहुंचाते हैं। सबसे तेजी से इलेक्ट्रिक ट्रक अपनाने वाला देश चीन है जहां हजारों ईवी ट्रक फैक्ट्रियों, बंदरगाहों और शहरों में रोजाना इस्तेमाल हो रहे हैं। हालांकि, भारत की तरह विदेशों में भी लंबी दूरी के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कम होना, डीजल ट्रकों से महंगा और बैटरी चार्ज होने में ज्यादा समय लगने जैसी चुनौती है।