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Strike: ई-फार्मेसी के विरोध में हड़ताल से ढाई हजार करोड़ का कारोबार ठप, दिल्ली में 90 फीसदी दुकानें रहीं बंद

अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 21 May 2026 03:04 AM IST
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सार

देशभर में 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों और ड्रगिस्टों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। वहीं, व्यापारिक संगठनों के अनुसार, इस बंद से पूरे देश में करीब ढाई हजार करोड़ रुपये का खुदरा कारोबार प्रभावित हुआ।

Strike: Business worth Rs 2500 crore stalled due to strike against e-pharmacy, 90% shops closed in Delhi
demo - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार

दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री, बिना नुस्खे के होम डिलीवरी और भारी छूट के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के आह्वान पर बुधवार को देशभर में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सफल रही। देशभर में 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों और ड्रगिस्टों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। वहीं, व्यापारिक संगठनों के अनुसार, इस बंद से पूरे देश में करीब ढाई हजार करोड़ रुपये का खुदरा कारोबार प्रभावित हुआ।



दिल्ली में लगभग 20 हजार मेडिकल स्टोरों में से करीब 18 हजार यानी 90 फीसदी दुकानें बंद रहीं। सुबह से ही हरि नगर, सुभाष नगर, तिलक नगर, जनकपुरी, उत्तम नगर, पालम, महरौली, नजफगढ़, लक्ष्मी नगर, करोल बाग समेत कई इलाकों में दवा दुकानों के शटर बंद रहे। हालांकि एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया जैसे बड़े अस्पतालों के आसपास की दुकानें खुली रहीं। सरकारी अस्पतालों की फार्मेसी, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र और कुछ बड़े रिटेल नेटवर्क भी चालू रहे। शाम चार बजे के बाद दिल्ली के कई इलाकों में दुकानें दोबारा खुलनी शुरू हो गई।
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प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन, रखी मुख्य मांगें
एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि हड़ताल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन देशभर में जिला कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदारों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। इसमें अवैध और अनियंत्रित ई-फार्मेसी (ऑनलाइन दवा बिक्री) पर सख्त रोक लगाने, बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवा बिक्री और होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध, ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों द्वारा शिकारी मूल्य निर्धारण और डीप डिस्काउंटिंग पर कार्रवाई जैसी मांगें की गई।
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इसके अलावा, मुख्य मांगों में कोविड काल की अस्थायी अधिसूचनाओं जीएसआर 817(ई) और जीएसआर 220(ई) को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया गया। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि दवाएं कोई सामान्य वस्तु नहीं हैं। बिना डॉक्टर की देखरेख के ऑनलाइन बिक्री से मरीजों की सुरक्षा को खतरा है और छोटे लाइसेंसधारी केमिस्टों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस (आरडीसीए) के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने बताया कि बड़े ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स की अनियंत्रित नीतियों से पारंपरिक केमिस्टों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है।

कोविड में योगदान याद दिलाया
एसोसिएशन ने याद दिलाया कि कोविड महामारी के दौरान केमिस्ट फ्रंटलाइन वॉरियर बनकर दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करते रहे। फिर भी अवैध ऑनलाइन गतिविधियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हड़ताल पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। संगठन ने मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए आपातकालीन और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की। ऐसे में अब केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जल्द और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र ने किया हड़ताल का बहिष्कार
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों (पीएमबीजेके) के रिटेलर्स ने इस हड़ताल में हिस्सा नहीं लिया और पूरा दिन दुकानें खुली रखी। पीएमबीजे के रिटेलर्स एसोसिएशन के महासचिव सुरेश मित्तल ने बताया कि इस हड़ताल से आम लोगों पर बहुत असर पड़ता है, इसलिए वह इसके समर्थन में नहीं है। उन्होंने बताया कि वह सरकार के साथ है, इससे केवल मरीजों का ही नुकसान होगा। इसलिए ऐसे हड़ताल के बजाए लोगों को जागरूक करना चाहिए।

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