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Delhi Building Collapse: कोर्ट में MCD ने झूठ न बोला होता तो न होता हादसा, डेढ़ माह पहले डाला 'पाप' पर पर्दा

गौरव बाजपेई, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 01 Jun 2026 03:29 AM IST
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सार

सबसे बड़ा सवाल उस जवाब को लेकर उठ रहा है जो निगम ने हादसे से महज डेढ़ माह पहले दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किया था।

Delhi Building Collapse: Had the MCD not lied in court, the tragedy would not have happened
साकेत में गिरी इमारत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दक्षिण दिल्ली के सैदुल्लाजाब इलाके में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास छह मंजिला इमारत ढहने के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। सबसे बड़ा सवाल उस जवाब को लेकर उठ रहा है जो निगम ने हादसे से महज डेढ़ माह पहले दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किया था।



13 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के दौरान एमसीडी ने अदालत को बताया था कि संबंधित इमारत में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं चल रहा है। लेकिन स्थानीय निवासियों का दावा है कि भवन में लगातार निर्माण और बदलाव का काम जारी था। अब इमारत के ढहने और लोगों की जान जाने के बाद निगम के उस दावे की सच्चाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सैदुल्लाजाब का मामला पहले भी अदालत तक पहुंच चुका था। सितंबर 2025 में इसी क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उस समय निगम ने अदालत को बताया था कि नोटिस और ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन पुलिस सहायता और प्रशासनिक कारणों से कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने तब अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई थी और पूछा था कि उनकी निगरानी में अवैध निर्माण कैसे खड़े हो रहे हैं।
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हादसे वाली इमारत को लेकर भी कई सवाल सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार भवन की ऊपरी मंजिलों पर निर्माण गतिविधियां और बदलाव लगातार किए जा रहे थे। वहीं कुछ हिस्सों में कोचिंग सेंटर, कार्यालय और कैंटीन जैसी व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित हो रही थीं। इसके बावजूद यदि एमसीडी ने अदालत को बताया कि मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा था, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।

पिछले कुछ महीनों में दिल्ली हाईकोर्ट विभिन्न मामलों में एमसीडी को अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देता रहा है। अदालत ने नोटिस जारी करने के साथ-साथ निरीक्षण, ध्वस्तीकरण और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगते रहे हैं।

अब सैदुल्लाजाब हादसे के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि यदि इमारत में वास्तव में निर्माण या संरचनात्मक बदलाव हो रहे थे, तो एमसीडी की निगरानी व्यवस्था उन्हें क्यों नहीं पकड़ सकी। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि अदालत को दी गई जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति में कोई अंतर था या नहीं। यही पहलू अब हादसे की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।

प्रमुख मामले और हाईकोर्ट के निर्देश
19 जनवरी 2026 : जौहरी फार्म, जामिया नगर

  • अवैध निर्माण से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी को तथ्यों की जांच करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद भी
  • विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अदालत ने एमसीडी को अवैध निर्माणों पर नोटिस जारी करने, निरीक्षण करने और जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मार्च-अप्रैल 2026 : बार-बार दायर याचिकाओं पर टिप्पणी

  • कुछ मामलों में अदालत ने अवैध निर्माण को बचाने के लिए बार-बार याचिका दायर करने वालों पर जुर्माना लगाया। साथ ही एमसीडी को अवैध निर्माण हटाने और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।

 

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