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अमर उजाला पड़ताल: सैदुल्लाजाब से मुनिरका, दक्षिण दिल्ली में पीजी कोचिंग माफिया के साए में जी रहे हजारों छात्र

अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 01 Jun 2026 03:29 AM IST
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सार

पड़ताल में सामने आया कि समस्या केवल एक इमारत तक सीमित नहीं है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं जिनमें स्वीकृत क्षमता से अधिक मंजिलें, पीजी, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, कैफे और छात्र आवास एक साथ संचालित हो रहे हैं।

thousands of students in South Delhi live under the shadow of the PG coaching mafia
Delhi Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

साकेत के पास सैदुल्लाजाब में शनिवार रात इमारत ढहने की घटना ने दक्षिण दिल्ली के उन छात्र बहुल इलाकों की हकीकत उजागर कर दी है, जहां हजारों छात्र रोजाना जोखिम के बीच रह रहे हैं। हादसे के बाद हमने सैदुल्लाजाब, बेरसराय, कटवारिया सराय, जिया सराय और मुनिरका का दौरा किया। पड़ताल में सामने आया कि समस्या केवल एक इमारत तक सीमित नहीं है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं जिनमें स्वीकृत क्षमता से अधिक मंजिलें, पीजी, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी, कैफे और छात्र आवास एक साथ संचालित हो रहे हैं।



सुबह 10:00 बजे
सैदुल्लाजाब: जगह-जगह बस हादसे की चर्चा
रविवार सुबह सैदुल्लाजाब की गलियों में सामान्य दिनों जैसी रौनक नहीं थी। लोग हादसे की चर्चा कर रहे थे और कई छात्र पीजी बदलने की संभावनाओं पर विचार करते दिखे। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे फैजल ने बताया कि जिस इमारत के सामने से रोज गुजरते थे, उसके गिरने की कभी कल्पना नहीं की थी। अब सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पास ही खड़े स्थानीय निवासी कमलेश बताते हैं कि इलाके में अतिरिक्त मंजिलें जोड़ना आम बात हो गई है। किराये की बढ़ती मांग के कारण भवनों की मजबूती पर कम ध्यान दिया जाता है। कई आवासीय भवन अब व्यावसायिक गतिविधियों और छात्र आवास के मिश्रित केंद्र बन चुके हैं।
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सुबह 11:00 बजे
बेरसराय: सीढ़ियां बेहद संकरी, आपात स्थिति में निकलना मुश्किल
बेरसराय में लगभग हर गली में हमें पीजी और छात्र आवास दिखाई दिए। यहां रहने वाले छात्रों का कहना है कि भवनों की सुरक्षा के बारे में किराया लेते समय कोई जानकारी नहीं दी जाती। कोटा से आए छात्र हिमांशु ने बताया कि यहां सीटें भरने की होड़ अधिक दिखाई देती है। छात्रा लक्ष्मी ने चिंता जताई कि कई इमारतों में सीढ़ियां बेहद संकरी हैं, जिससे किसी आपात स्थिति में बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय दुकानदार मनोज के अनुसार, पिछले दशक में क्षेत्र का स्वरूप तेजी से बदला है और अधिकांश मकान छात्र आवास में बदल गए हैं।
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दोपहर 12:00 बजे
कटवारिया सराय: कोचिंग और आवास का मिला-जुला मॉडल
कटवारिया सराय में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र रहते हैं। कई इमारतों में नीचे कोचिंग और ऊपर छात्र आवास संचालित हो रहे हैं। छात्र आदित्य कुमार का कहना है कि किराया तो लिया जाता है, लेकिन सुरक्षा मानकों की जानकारी शायद ही किसी को दी जाती है। छात्र राहुल ने बताया कि हादसे के बाद पहली बार उन्होंने पीजी संचालक से भवन की सुरक्षा के बारे में पूछा, लेकिन कोई दस्तावेज नहीं दिखाया गया।

दोपहर 01:00 बजे
जिया सराय: पढ़ाई के बीच सुरक्षा की चिंता
विदेशी मेडिकल लाइसेंसिंग और पेशेवर परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रसिद्ध जिया सराय में भी सुरक्षा को लेकर छात्र चिंतित हैं। गोरखपुर के शशांक मिश्रा के अनुसार, कई कमरों में क्षमता से अधिक छात्रों को रखा जाता है। छात्रा शीशम ने बताया कि कई भवनों में केवल एक संकरी सीढ़ी है और कभी कोई फायर सेफ्टी अभ्यास नहीं कराया गया।

दोपहर 02:00 बजे
मुनिरका: सबसे बड़ा छात्र केंद्र, सबसे बड़ी चुनौती
मुनिरका दक्षिण दिल्ली के सबसे बड़े छात्र आवासीय क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां पांच से छह मंजिला भवन आम हैं। छात्रा जैस्मिन ने बताया कि हादसे के बाद परिवार लगातार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। वहीं झारखंड के छात्र मयंक का कहना है कि यहां शायद ही कोई यह जांचता हो कि भवन नियमों के अनुरूप बना है या नहीं। स्थानीय कारोबारी गौरव का मानना है कि हजारों छात्रों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन को नियमित इमारत की मजबूती और अग्नि सुरक्षा जांच करनी चाहिए।

छात्रों की मजबूरी, कमाई का बढ़ता दबाव
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बढ़ती मांग का लाभ उठाकर कई संचालक भवनों में अतिरिक्त कमरे बना रहे हैं। कहीं एक कमरे को दो हिस्सों में बांट दिया गया है तो कहीं छतों पर अस्थायी निर्माण खड़े कर दिए गए हैं। सीमित बजट और विकल्पों की कमी के कारण छात्र भी समझौता करने को मजबूर हैं। सैदुल्लाजाब हादसे ने केवल एक इमारत की कमजोरी नहीं उजागर की, बल्कि दक्षिण दिल्ली के छात्र आवासीय ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या अगली दुर्घटना का इंतजार किए बिना प्रशासन इन इलाकों की व्यापक सुरक्षा जांच करेगा?

छात्र और आमजन बोले
कटवारिया सराय में पहले परिवार रहते थे, लेकिन अब अधिकांश मकान पीजी बन चुके हैं। हर साल नई मंजिलें जुड़ रही हैं। सुरक्षा जांच शायद ही कभी दिखाई देती है।
-रामनिवास

सैदुल्लाजाब और आसपास के इलाकों में क्षमता से अधिक लोगों को रखा जा रहा है। अतिरिक्त मंजिलों और बढ़ते दबाव ने खतरा बढ़ा दिया है।
-नीरज शर्मा

हादसे के बाद पहली बार महसूस हुआ कि जिस इमारत में रह रहे हैं उसकी सुरक्षा के बारे में हमें कुछ पता ही नहीं है।
- फैजल, छात्र

कमरा लेते समय किराया, खाना और इंटरनेट देखा था, लेकिन भवन की मजबूती या सुरक्षा के बारे में किसी ने जानकारी नहीं दी।
-साकिब, छात्र

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