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Saket Building Collapse: 60 से अधिक ट्रकों से ले जाया गया मलबा, लैपटॉप देखते ही छलके आंसू; टूट गए सपने
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 01 Jun 2026 01:57 AM IST
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सार
मलबे से जैसे-जैसे घायलों और मृतकों को बाहर निकाला गया, परिजनों की चीख-पुकार और मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
Saket Building Collapse
- फोटो : PTI
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विस्तार
साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुल्लाजाब में शनिवार शाम इमारत ढहने के बाद शुरू हुआ राहत एवं बचाव अभियान रविवार देर रात तक जारी रहा। मलबे से जैसे-जैसे घायलों और मृतकों को बाहर निकाला गया, परिजनों की चीख-पुकार और मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। रविवार दोपहर मलबे से 20 से अधिक छात्रों के लैपटॉप निकलने पर माहौल और भी गमगीन हो गया। बचाव अभियान के दौरान करीब 60 से अधिक ट्रकों में मलबा हटाया गया।
हादसे की सूचना शनिवार शाम करीब 7:40 बजे मिलने के तुरंत बाद पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ, दमकल विभाग और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। पूरी तरह जमींदोज हुई इमारत के मलबे में फंसे लोगों को निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। शनिवार रात तक एक दर्जन से अधिक लोगों को बाहर निकाला गया। शुरुआती चरण में जेसीबी मशीनों की मदद से सावधानीपूर्वक मलबा हटाया गया, लेकिन भारी कंक्रीट और लेंटर हटाने के लिए बाद में पोकलेन मशीनें मंगानी पड़ीं। अभियान में 800 से अधिक पुलिसकर्मी, एनडीआरएफ, डीएफएस और सिविल डिफेंस के जवान जुटे रहे।
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20 फीट चौड़ी गली बनी चुनौती
जिस गली में इमारत स्थित थी, उसकी चौड़ाई मात्र 20 फीट है। मुख्य सड़क तक राहत वाहनों की पहुंच आसान रही, लेकिन इमारत तक भारी मशीनें पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संकरी गली के कारण बचाव कार्य की गति भी प्रभावित हुई। राहत अभियान के दौरान लगभग हर 15 मिनट में एक ट्रक मलबा भरकर घटनास्थल से निकल रहा था। अधिकारियों के अनुसार शनिवार शाम से रविवार रात तक 60 से अधिक ट्रकों में मलबा हटाया गया।
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लैपटॉप देखकर लोग बोले-सपने लेकर आए...सब बिखर गया
रविवार दोपहर मलबे से एक-एक कर 20 से अधिक छात्रों के लैपटॉप निकाले गए। यह दृश्य देखकर बचावकर्मी और स्थानीय लोग भावुक हो गए। लोगों का कहना था कि बेहतर भविष्य का सपना लेकर आए छात्रों की जिंदगी इस हादसे में उजड़ गई।
कंक्रीट काटने में टूटे कटर
बचाव कार्य के दौरान भारी कंक्रीट और लेंटर काटने में टीमों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई बार कटर मशीनें भी टूट गईं। शुरुआती घंटों में पर्याप्त क्षमता वाले कटर उपलब्ध न होने से राहत कार्य प्रभावित हुआ, हालांकि बाद में अतिरिक्त उपकरण मंगाकर अभियान को गति दी गई।