{"_id":"6a54bd3b4a44026d8d02d3dd","slug":"delhi-court-granted-permission-for-cremation-of-remains-of-11-deceased-individuals-following-nia-dna-report-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"लाल किला धमाका मामला: डॉक्टर उमर सहित 11 मृतकों के अवशेषों का रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार, कोर्ट का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लाल किला धमाका मामला: डॉक्टर उमर सहित 11 मृतकों के अवशेषों का रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार, कोर्ट का आदेश
Mon, 13 Jul 2026 03:56 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Mon, 13 Jul 2026 03:56 PM IST
सार
दिल्ली की एक कोर्ट ने एनआईए की डीएनए रिपोर्ट के बाद 11 मृतकों के अवशेषों का अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे दी है। स्पेशल जज पीतांबर दत्त ने मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर के अवशेषों के अंतिम संस्कार की भी अनुमति दी।
विज्ञापन
दिल्ली धमाका (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पटियाला हाउस कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा डीएनए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद 11 मृतकों के अवशेषों का अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे दी है। स्पेशल जज पीतांबर दत्त ने यह आदेश जारी किया। इसमें आत्मघाती हमले में मारे गए मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर के अवशेषों का अंतिम संस्कार भी शामिल है।
विज्ञापन
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। मृतकों की धार्मिक आस्थाओं का अनुपालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह फैसला एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है।
विज्ञापन
डीएनए रिपोर्ट के बाद अंतिम संस्कार
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत में डीएनए रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर सभी 11 मृतकों की पहचान की पुष्टि हुई। यह पहचान प्रक्रिया जटिल थी क्योंकि शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। डीएनए मिलान के बाद ही अवशेषों को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा गया।
विज्ञापन
अदालत ने इस मामले में मानवीय पहलुओं पर भी विचार किया। मृतकों के परिजनों ने अंतिम संस्कार की अनुमति मांगी थी। अदालत ने धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए यह फैसला सुनाया। यह सुनिश्चित किया गया कि अंतिम संस्कार में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।