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Delhi Weather: मानसून में देरी, जुलाई के पहले सप्ताह तक पहुंचने के आसार; विलंबित चाल का यह है कारण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 20 Jun 2026 02:12 AM IST
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सार

मौसम विभाग के अनुसार, सामान्य तौर पर 27 जून के आसपास राजधानी पहुंचने वाला मानसून अब जुलाई के पहले सप्ताह तक दस्तक दे सकता है।

Delhi Weather: Monsoon delayed; likely to arrive by the first week of July
इस वर्ष अब तक बंगाल की खाड़ी में अनुकूल सिस्टम विकसित नहीं हुआ है। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

दिल्ली में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन में इस बार देरी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, सामान्य तौर पर 27 जून के आसपास राजधानी पहुंचने वाला मानसून अब जुलाई के पहले सप्ताह तक दस्तक दे सकता है। इसकी मुख्य वजह मानसून को आगे बढ़ाने वाली आवश्यक मौसम प्रणालियों का अभी तक सक्रिय नहीं होना है।



भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वैज्ञानिक कृष्णा मिश्रा ने बताया कि सामान्यतः 18-19 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनता है। यह प्रणाली नमी से भरी हवाओं को उत्तर-पश्चिम भारत की ओर खींचती है और मानसून को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह सिस्टम ओडिशा, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से होते हुए दिल्ली तक पहुंचता है।
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हालांकि, इस वर्ष अब तक बंगाल की खाड़ी में ऐसा अनुकूल सिस्टम विकसित नहीं हुआ है। इसके चलते मानसून की प्रगति धीमी पड़ गई है। मिश्रा के अनुसार, 25-26 जून के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं और उसके जुलाई के पहले सप्ताह तक दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।
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उन्होंने बताया कि अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएं भी फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं और दो हिस्सों में बंट गई हैं। मानसून को आगे बढ़ाने में इन हवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनके कमजोर होने से भी मानसून की रफ्तार प्रभावित हुई है।

4 जून से 18 जून के बीच देश में सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश
आईएमडी के आंकड़े भी मानसून की सुस्त चाल की पुष्टि करते हैं। 4 जून से 18 जून के बीच देश में सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इस अवधि में सामान्य 72.2 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 42.6 मिमी बारिश हुई।

मध्य भारत में 67 प्रतिशत तक कम हुई बारिश
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, मध्य भारत में 67 प्रतिशत, पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत में 42 प्रतिशत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 22 प्रतिशत तथा उत्तर-पश्चिम भारत में 6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में अनुकूल सिस्टम बनने के बाद मानसून की रफ्तार बढ़ सकती है, जिससे वर्षा गतिविधियों में सुधार की उम्मीद है।

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