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Delhi NCR News: दिल्ली के 1,080 जलाशयों पर संकट, ज्यादातर अतिक्रमण और प्रदूषण की चपेट में
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एनजीटी में दाखिल दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की रिपोर्ट में खुलासा; जांचे गए 108 में से 95 जलाशयों की जल गुणवत्ता खराब
विभिन्न एजेंसियों को संरक्षण और पुनर्जीवन तेज करने के निर्देश की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में चिह्नित 1,080 जलाशयों (वाटर बॉडीज) में बड़ी संख्या अतिक्रमण, सूखने और गंभीर जल प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझ रही है। यह खुलासा दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की उस स्थिति रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 9 जुलाई के निर्देश पर दाखिल किया गया। इसमें दिल्ली की 16 भूमि स्वामित्व वाली एजेंसियों से प्राप्त आंकड़े शामिल हैं। इनमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), राजस्व विभाग, नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), वन विभाग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) समेत अन्य एजेंसियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में सबसे अधिक 291 जलाशय हैं। इसके बाद आउटर नॉर्थ में 266, दक्षिण दिल्ली में 156, उत्तर-पूर्व में 56, पूर्व में 52, दक्षिण-पूर्व में 49, पश्चिम में 42, उत्तर में 40, सेंट्रल नॉर्थ में 29, सेंट्रल दिल्ली में 14 और नई दिल्ली में केवल पांच जलाशय दर्ज किए गए हैं। स्वामित्व के आधार पर सबसे अधिक 856 जलाशय डीडीए के अधिकार क्षेत्र में हैं। इसके अलावा राजस्व विभाग के पास 130, वन विभाग के पास 28, एमसीडी के पास 24, एएसआई के पास 16, डीजेबी के पास छह और सीपीडब्ल्यूडी के पास पांच जलाशय हैं।
रिपोर्ट में नमभूमि प्राधिकरण ने एनजीटी से सभी संबंधित एजेंसियों को लंबित जलाशयों का सीमांकन समयबद्ध तरीके से पूरा करने, अतिक्रमण हटाने, संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यों में तेजी लाने तथा वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत नियमित अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।
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95 जलाशयों की जल गुणवत्ता बेहद खराब
डीडीए ने 182 जलाशयों के संरक्षण और पुनर्जीवन की कार्ययोजना तैयार की है। हालांकि, जिन 108 जलाशयों की जल गुणवत्ता की जांच की गई, उनमें केवल 11 की गुणवत्ता अच्छी और दो की सामान्य पाई गई, जबकि 95 जलाशयों का पानी खराब श्रेणी में मिला। डीडीए के अनुसार उसके अधिकार क्षेत्र में 181 जलाशय सूख चुके हैं, 126 पर अतिक्रमण है और 111 का सीमांकन पूरा हो चुका है। वहीं, 20 जलाशयों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का उपचारित पानी छोड़ा जा रहा है।
राजस्व विभाग के 38 जलाशयों के पुनर्जीवन की तैयारी
राजस्व विभाग ने बताया कि उसके अधीन 130 जलाशयों में से 94 का सीमांकन पूरा हो चुका है। तीन जलाशयों पर अतिक्रमण है और छह पूरी तरह सूख चुके हैं। विभाग ने 38 जलाशयों के पुनर्जीवन का प्रारंभिक अनुमान तैयार किया है, लेकिन अतिक्रमण हटाने की अंतिम कार्ययोजना अभी तैयार नहीं हो सकी है।
एमसीडी के 22 जलाशयों में पहुंच रहा बिना उपचारित सीवेज
एमसीडी के अनुसार उसके 24 में से 21 जलाशयों का सीमांकन पूरा हो चुका है और चार पर अतिक्रमण है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि 22 जलाशयों में बिना उपचारित सीवेज का पानी पहुंच रहा है। इनमें नौ जलाशय मौसमी हैं, जबकि केवल दो में पूरे वर्ष पानी रहता है।
कुछ जलाशय बने मिसाल, अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त
वन विभाग ने 28 में से 13 जलाशयों का सीमांकन पूरा किया है। एक स्थान पर आवासीय अतिक्रमण और दो जलाशयों के सूखने की जानकारी दी गई है। एएसआई के संरक्षण में 14 जलाशय अच्छी स्थिति में हैं, जबकि दो सूखे और अतिक्रमण की चपेट में हैं। सीपीडब्ल्यूडी ने मेहरौली झील के करीब 200 वर्गमीटर क्षेत्र पर अतिक्रमण की पुष्टि की है और मायापुरी झील के पुनर्जीवन का प्रस्ताव तैयार किया है। वहीं, द्वारका बावली, कुतुब की बावली, डीएसआईआईडीसी के चारों जलाशय और आईजीएससी की झील अतिक्रमण मुक्त हैं तथा उनकी जल गुणवत्ता भी अच्छी पाई गई है। दूसरी ओर, डूसिब के अधीन एकमात्र जलाशय पर 40-50 परिवारों का कब्जा है, जिनके पुनर्वास की योजना बनाई जा रही है।
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विभिन्न एजेंसियों को संरक्षण और पुनर्जीवन तेज करने के निर्देश की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में चिह्नित 1,080 जलाशयों (वाटर बॉडीज) में बड़ी संख्या अतिक्रमण, सूखने और गंभीर जल प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझ रही है। यह खुलासा दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की उस स्थिति रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 9 जुलाई के निर्देश पर दाखिल किया गया। इसमें दिल्ली की 16 भूमि स्वामित्व वाली एजेंसियों से प्राप्त आंकड़े शामिल हैं। इनमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), राजस्व विभाग, नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), वन विभाग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) समेत अन्य एजेंसियां शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में सबसे अधिक 291 जलाशय हैं। इसके बाद आउटर नॉर्थ में 266, दक्षिण दिल्ली में 156, उत्तर-पूर्व में 56, पूर्व में 52, दक्षिण-पूर्व में 49, पश्चिम में 42, उत्तर में 40, सेंट्रल नॉर्थ में 29, सेंट्रल दिल्ली में 14 और नई दिल्ली में केवल पांच जलाशय दर्ज किए गए हैं। स्वामित्व के आधार पर सबसे अधिक 856 जलाशय डीडीए के अधिकार क्षेत्र में हैं। इसके अलावा राजस्व विभाग के पास 130, वन विभाग के पास 28, एमसीडी के पास 24, एएसआई के पास 16, डीजेबी के पास छह और सीपीडब्ल्यूडी के पास पांच जलाशय हैं।
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रिपोर्ट में नमभूमि प्राधिकरण ने एनजीटी से सभी संबंधित एजेंसियों को लंबित जलाशयों का सीमांकन समयबद्ध तरीके से पूरा करने, अतिक्रमण हटाने, संरक्षण और पुनर्जीवन कार्यों में तेजी लाने तथा वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत नियमित अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।
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95 जलाशयों की जल गुणवत्ता बेहद खराब
डीडीए ने 182 जलाशयों के संरक्षण और पुनर्जीवन की कार्ययोजना तैयार की है। हालांकि, जिन 108 जलाशयों की जल गुणवत्ता की जांच की गई, उनमें केवल 11 की गुणवत्ता अच्छी और दो की सामान्य पाई गई, जबकि 95 जलाशयों का पानी खराब श्रेणी में मिला। डीडीए के अनुसार उसके अधिकार क्षेत्र में 181 जलाशय सूख चुके हैं, 126 पर अतिक्रमण है और 111 का सीमांकन पूरा हो चुका है। वहीं, 20 जलाशयों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का उपचारित पानी छोड़ा जा रहा है।
राजस्व विभाग के 38 जलाशयों के पुनर्जीवन की तैयारी
राजस्व विभाग ने बताया कि उसके अधीन 130 जलाशयों में से 94 का सीमांकन पूरा हो चुका है। तीन जलाशयों पर अतिक्रमण है और छह पूरी तरह सूख चुके हैं। विभाग ने 38 जलाशयों के पुनर्जीवन का प्रारंभिक अनुमान तैयार किया है, लेकिन अतिक्रमण हटाने की अंतिम कार्ययोजना अभी तैयार नहीं हो सकी है।
एमसीडी के 22 जलाशयों में पहुंच रहा बिना उपचारित सीवेज
एमसीडी के अनुसार उसके 24 में से 21 जलाशयों का सीमांकन पूरा हो चुका है और चार पर अतिक्रमण है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि 22 जलाशयों में बिना उपचारित सीवेज का पानी पहुंच रहा है। इनमें नौ जलाशय मौसमी हैं, जबकि केवल दो में पूरे वर्ष पानी रहता है।
कुछ जलाशय बने मिसाल, अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त
वन विभाग ने 28 में से 13 जलाशयों का सीमांकन पूरा किया है। एक स्थान पर आवासीय अतिक्रमण और दो जलाशयों के सूखने की जानकारी दी गई है। एएसआई के संरक्षण में 14 जलाशय अच्छी स्थिति में हैं, जबकि दो सूखे और अतिक्रमण की चपेट में हैं। सीपीडब्ल्यूडी ने मेहरौली झील के करीब 200 वर्गमीटर क्षेत्र पर अतिक्रमण की पुष्टि की है और मायापुरी झील के पुनर्जीवन का प्रस्ताव तैयार किया है। वहीं, द्वारका बावली, कुतुब की बावली, डीएसआईआईडीसी के चारों जलाशय और आईजीएससी की झील अतिक्रमण मुक्त हैं तथा उनकी जल गुणवत्ता भी अच्छी पाई गई है। दूसरी ओर, डूसिब के अधीन एकमात्र जलाशय पर 40-50 परिवारों का कब्जा है, जिनके पुनर्वास की योजना बनाई जा रही है।