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Delhi NCR News: खेल प्रशिक्षकों की मांग... सुविधाएं बढ़ें, तभी निखरेंगी राजधानी की प्रतिभाएं
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- स्पोर्ट्स संवाद में कोचों ने खेल ढांचे, महंगे मैदान, रोजगार और प्रशिक्षण सुविधाओं पर रखे सुझाव
- खिलाड़ियों के आर्थिक और शारीरिक विकास के लिए अलग खेल नीति बनाने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में खेलों के विकास और खिलाड़ियों की चुनौतियों को लेकर आयोजित स्पोर्ट्स संवाद कार्यक्रम में विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों ने मजबूत खेल नीति, बेहतर आधारभूत ढांचे और खिलाड़ियों के लिए अधिक सुविधाओं की मांग उठाई। पंडित पंत मार्ग स्थित अमर उजाला ब्यूरो में आयोजित कार्यक्रम में फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबॉल, बॉडीबिल्डिंग और स्केटिंग सहित कई खेलों के कोच मोहम्मद रीजवान, रहीस अहमद, हरदीप ठाकुर, आलम सैफी, नासिर, माइकल, आंनद कुमार, श्रवण कुमार, के.पी राणा, मोहित गुप्ता और देवंद्र कुमार सैन शामिल हुए। प्रशिक्षकों ने कहा कि दिल्ली में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर पर्याप्त सुविधाएं और सहयोग न मिलने से उनका विकास प्रभावित हो रहा है। उनका मानना है कि युवाओं की खेलों में भागीदारी पहले की तुलना में कम हुई है, जिसका असर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन में भी दिखाई दे रहा है।
फुटबॉल कोचों ने बताया कि राजधानी में उपलब्ध मैदानों का किराया काफी अधिक है। कई स्थानों पर एक घंटे का किराया चार हजार रुपये से ज्यादा है, जिससे छोटे क्लबों और अकादमियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कराना मुश्किल हो जाता है। क्रिकेट और वॉलीबॉल प्रशिक्षकों ने अभिभावकों की बढ़ती अपेक्षाओं को भी चिंता का विषय बताया। उनका कहना है कि कुछ दिनों के अभ्यास के बाद ही सफलता की उम्मीद खिलाड़ियों पर अनावश्यक दबाव बनाती है, जिससे कई युवा खेल छोड़ देते हैं। बॉडीबिल्डिंग से जुड़े प्रशिक्षकों ने खेलों में बढ़ती व्यावसायिक प्रवृत्तियों पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी संस्थाएं खिलाड़ियों से भारी शुल्क लेकर पुरस्कार और सम्मान प्रदान करती हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाओं को नुकसान होता है। स्केटिंग प्रशिक्षकों ने कहा कि दिल्ली में अब तक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 200 मीटर का स्केटिंग ट्रैक नहीं है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए ऐसी सुविधा बेहद जरूरी है। प्रशिक्षकों ने ओडिशा के खेल मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि वहां खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आवास और सुविधाओं पर लगातार निवेश किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने दिल्ली में भी खिलाड़ियों के आर्थिक और शारीरिक विकास को प्राथमिकता देने, खेल आधारित रोजगार बढ़ाने और सभी खेलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रशिक्षकों की राय-
मैदानों का किराया कम होगा तो ज्यादा खिलाड़ी और क्लब खेल से जुड़ पाएंगे। -माइकल, फुटबॉल कोच
हर खिलाड़ी को निखरने के लिए समय चाहिए, जल्द सफलता की उम्मीद नुकसान पहुंचाती है। -श्रवण कुमार, क्रिकेट कोच
स्कूल स्तर पर अधिक प्रतियोगिताएं युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ा सकती हैं। -आनंद कुमार, वॉलीबॉल कोच
खिलाड़ियों का सम्मान उनकी प्रतिभा और प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए, पैसे के आधार पर नहीं। -देवेंद्र कुमार सैन, बॉडीबिल्डिंग कोच
दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्केटिंग ट्रैक जल्द विकसित करना चाहिए। -मोहित गुप्ता, स्केटिंग कोच
ओडिशा मॉडल की तरह दीर्घकालिक निवेश से खेलों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। -के.पी. राणा, वॉलीबॉल कोच
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- खिलाड़ियों के आर्थिक और शारीरिक विकास के लिए अलग खेल नीति बनाने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में खेलों के विकास और खिलाड़ियों की चुनौतियों को लेकर आयोजित स्पोर्ट्स संवाद कार्यक्रम में विभिन्न खेलों के प्रशिक्षकों ने मजबूत खेल नीति, बेहतर आधारभूत ढांचे और खिलाड़ियों के लिए अधिक सुविधाओं की मांग उठाई। पंडित पंत मार्ग स्थित अमर उजाला ब्यूरो में आयोजित कार्यक्रम में फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबॉल, बॉडीबिल्डिंग और स्केटिंग सहित कई खेलों के कोच मोहम्मद रीजवान, रहीस अहमद, हरदीप ठाकुर, आलम सैफी, नासिर, माइकल, आंनद कुमार, श्रवण कुमार, के.पी राणा, मोहित गुप्ता और देवंद्र कुमार सैन शामिल हुए। प्रशिक्षकों ने कहा कि दिल्ली में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर पर्याप्त सुविधाएं और सहयोग न मिलने से उनका विकास प्रभावित हो रहा है। उनका मानना है कि युवाओं की खेलों में भागीदारी पहले की तुलना में कम हुई है, जिसका असर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन में भी दिखाई दे रहा है।
फुटबॉल कोचों ने बताया कि राजधानी में उपलब्ध मैदानों का किराया काफी अधिक है। कई स्थानों पर एक घंटे का किराया चार हजार रुपये से ज्यादा है, जिससे छोटे क्लबों और अकादमियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कराना मुश्किल हो जाता है। क्रिकेट और वॉलीबॉल प्रशिक्षकों ने अभिभावकों की बढ़ती अपेक्षाओं को भी चिंता का विषय बताया। उनका कहना है कि कुछ दिनों के अभ्यास के बाद ही सफलता की उम्मीद खिलाड़ियों पर अनावश्यक दबाव बनाती है, जिससे कई युवा खेल छोड़ देते हैं। बॉडीबिल्डिंग से जुड़े प्रशिक्षकों ने खेलों में बढ़ती व्यावसायिक प्रवृत्तियों पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी संस्थाएं खिलाड़ियों से भारी शुल्क लेकर पुरस्कार और सम्मान प्रदान करती हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाओं को नुकसान होता है। स्केटिंग प्रशिक्षकों ने कहा कि दिल्ली में अब तक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 200 मीटर का स्केटिंग ट्रैक नहीं है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए ऐसी सुविधा बेहद जरूरी है। प्रशिक्षकों ने ओडिशा के खेल मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि वहां खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आवास और सुविधाओं पर लगातार निवेश किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने दिल्ली में भी खिलाड़ियों के आर्थिक और शारीरिक विकास को प्राथमिकता देने, खेल आधारित रोजगार बढ़ाने और सभी खेलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की।
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प्रशिक्षकों की राय-
मैदानों का किराया कम होगा तो ज्यादा खिलाड़ी और क्लब खेल से जुड़ पाएंगे। -माइकल, फुटबॉल कोच
हर खिलाड़ी को निखरने के लिए समय चाहिए, जल्द सफलता की उम्मीद नुकसान पहुंचाती है। -श्रवण कुमार, क्रिकेट कोच
स्कूल स्तर पर अधिक प्रतियोगिताएं युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ा सकती हैं। -आनंद कुमार, वॉलीबॉल कोच
खिलाड़ियों का सम्मान उनकी प्रतिभा और प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए, पैसे के आधार पर नहीं। -देवेंद्र कुमार सैन, बॉडीबिल्डिंग कोच
दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्केटिंग ट्रैक जल्द विकसित करना चाहिए। -मोहित गुप्ता, स्केटिंग कोच
ओडिशा मॉडल की तरह दीर्घकालिक निवेश से खेलों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। -के.पी. राणा, वॉलीबॉल कोच