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Delhi NCR News: यूजीसी नियम 2026 के समर्थन में जंतर-मंतर पर किया प्रदर्शन
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-प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर व तख्तियां लिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे हुए थे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। यूजीसी नियम, 2026 को लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी संगठनों के परिसंघ (डोमा परिसंघ) के बैनर तले जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर व तख्तियां लिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नए नियमों को गलत तरीके से समझा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम में केवल यह सुनिश्चित किया गया है कि विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व हो। साथ ही, किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा।
इस दौरान डोमा परिसंघ के अध्यक्ष और पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन इस नियम के खिलाफ अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती और अन्य आलोचकों की प्रतिक्रिया को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में चलाया जाएगा, जब तक नियम पूरी तरह लागू नहीं होते। उन्होंने कहा कि यूपीएससी साक्षात्कार में दलित, आदिवासी और ओबीसी उम्मीदवारों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। उन्होंने पर्सनालिटी टेस्ट के तरीकों में सुधार और निष्पक्ष मूल्यांकन की मांग की। उन्होंने बताया कि यदि उन्हें भी सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों जैसा अंक दिया गया होता, तो उनकी रैंक और ऊंची हो सकती थी।
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नई दिल्ली। यूजीसी नियम, 2026 को लागू करने की मांग को लेकर बुधवार को दलित, ओबीसी, माइनॉरिटीज और आदिवासी संगठनों के परिसंघ (डोमा परिसंघ) के बैनर तले जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी हाथों में बैनर व तख्तियां लिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नए नियमों को गलत तरीके से समझा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम में केवल यह सुनिश्चित किया गया है कि विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व हो। साथ ही, किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा।
इस दौरान डोमा परिसंघ के अध्यक्ष और पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और संगठन इस नियम के खिलाफ अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती और अन्य आलोचकों की प्रतिक्रिया को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में चलाया जाएगा, जब तक नियम पूरी तरह लागू नहीं होते। उन्होंने कहा कि यूपीएससी साक्षात्कार में दलित, आदिवासी और ओबीसी उम्मीदवारों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। उन्होंने पर्सनालिटी टेस्ट के तरीकों में सुधार और निष्पक्ष मूल्यांकन की मांग की। उन्होंने बताया कि यदि उन्हें भी सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों जैसा अंक दिया गया होता, तो उनकी रैंक और ऊंची हो सकती थी।
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