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Delhi NCR News: डीयू में बीए प्रोग्राम में बदलाव की तैयारी, ईसी की बैठक में लग सकती है मुहर
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-बीए प्रोग्राम के कम मांग वाले विषयों को मिलाकर व्यापक संयोजन बनाने की योजना
-इस आशय के प्रस्ताव को बुधवार को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बीए प्रोग्राम में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दरअसल डीयू की बुधवार को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में बीए प्रोग्राम के पुनर्गठन पर फैसला हो सकता है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो नए बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगे। यह प्रस्ताव 15 अप्रैल को अकादमिक परिषद की सिफारिशों के आधार पर तैयार हुआ है।
कार्यकारी परिषद की बैठक में लाए जा रहे प्रस्ताव के तहत कॉलेजों से कहा कि वे उन विषय संयोजनों की समीक्षा करें जिनमें छात्रों की मांग कम है या सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे विषयों को मिलाकर व्यापक संयोजन बनाने की योजना है। उदाहरण के तौर पर उर्दू, अरबी, फारसी, बंगाली और तेलुगु जैसी भाषाओं को एक ही बीए प्रोग्राम में एक अन्य विषय के साथ जोड़ा जा सकता है। वहीं समाजशास्त्र और सोशल वर्क जैसे विषयों को लोकप्रिय विषयों के साथ जोड़ा जा सकता है। प्रस्ताव में फूड टेक्नोलॉजी व एचडीएफई को कम्युनिटी साइंस के तहत लाने का सुझाव दिया गया है।
हालांकि इसमें स्पष्ट किया कि न तो कोई नया कोर्स शुरू होगा और न ही किसी मौजूदा प्रोग्राम को बंद किया जाएगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन कोर्सों में खाली सीटों की समस्या को दूर करना है, जहां सीटों के मुकाबले आवेदन बहुत कम आते हैं। दरअसल कॉमर्स में तो सीटें भर जाती हैं लेकिन भाषा कोर्सेज में काफी सीटें खाली रहती हैं। साथ ही कॉलेजों को उनकी कुल स्वीकृत सीट क्षमता में बदलाव की अनुमति नहीं होगी।
कार्यकारी परिषद की बैठक में केवल बीए प्रोग्राम ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े प्रस्तावों पर भी विचार होना है। इनमें मॉरिस नगर स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के लिए 174.20 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन का निर्माण और ढाका कॉम्प्लेक्स में स्टूडियो अपार्टमेंट्स के लिए 233.35 करोड़ रुपये की संशोधित परियोजना शामिल है। इसके साथ ही एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम को भी मंजूरी के लिए कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया जाएगा। ये कार्यकारी परिषद के महत्वपूर्ण एजेंडे में से एक है। एक वर्षीय पीजी चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के चौथे वर्ष के पूर्ण होने के साथ जुड़ा हुआ है। नए ढांचे के अनुसार जो छात्र चार वर्षीय यूजी पूरा करेंगे, वे अब केवल एक वर्ष में अपना पीजी कोर्स पूरा कर सकेंगे।
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-इस आशय के प्रस्ताव को बुधवार को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बीए प्रोग्राम में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दरअसल डीयू की बुधवार को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक में बीए प्रोग्राम के पुनर्गठन पर फैसला हो सकता है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो नए बदलाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगे। यह प्रस्ताव 15 अप्रैल को अकादमिक परिषद की सिफारिशों के आधार पर तैयार हुआ है।
कार्यकारी परिषद की बैठक में लाए जा रहे प्रस्ताव के तहत कॉलेजों से कहा कि वे उन विषय संयोजनों की समीक्षा करें जिनमें छात्रों की मांग कम है या सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे विषयों को मिलाकर व्यापक संयोजन बनाने की योजना है। उदाहरण के तौर पर उर्दू, अरबी, फारसी, बंगाली और तेलुगु जैसी भाषाओं को एक ही बीए प्रोग्राम में एक अन्य विषय के साथ जोड़ा जा सकता है। वहीं समाजशास्त्र और सोशल वर्क जैसे विषयों को लोकप्रिय विषयों के साथ जोड़ा जा सकता है। प्रस्ताव में फूड टेक्नोलॉजी व एचडीएफई को कम्युनिटी साइंस के तहत लाने का सुझाव दिया गया है।
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हालांकि इसमें स्पष्ट किया कि न तो कोई नया कोर्स शुरू होगा और न ही किसी मौजूदा प्रोग्राम को बंद किया जाएगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन कोर्सों में खाली सीटों की समस्या को दूर करना है, जहां सीटों के मुकाबले आवेदन बहुत कम आते हैं। दरअसल कॉमर्स में तो सीटें भर जाती हैं लेकिन भाषा कोर्सेज में काफी सीटें खाली रहती हैं। साथ ही कॉलेजों को उनकी कुल स्वीकृत सीट क्षमता में बदलाव की अनुमति नहीं होगी।
कार्यकारी परिषद की बैठक में केवल बीए प्रोग्राम ही नहीं, बल्कि अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े प्रस्तावों पर भी विचार होना है। इनमें मॉरिस नगर स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज के लिए 174.20 करोड़ रुपये की लागत से नए भवन का निर्माण और ढाका कॉम्प्लेक्स में स्टूडियो अपार्टमेंट्स के लिए 233.35 करोड़ रुपये की संशोधित परियोजना शामिल है। इसके साथ ही एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम को भी मंजूरी के लिए कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जाएगा। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया जाएगा। ये कार्यकारी परिषद के महत्वपूर्ण एजेंडे में से एक है। एक वर्षीय पीजी चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के चौथे वर्ष के पूर्ण होने के साथ जुड़ा हुआ है। नए ढांचे के अनुसार जो छात्र चार वर्षीय यूजी पूरा करेंगे, वे अब केवल एक वर्ष में अपना पीजी कोर्स पूरा कर सकेंगे।

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