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Faridabad News: निजी स्कूलों की मनमानी, हर साल फीस बढ़ने से अभिभावक परेशान
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अभिभावकों ने कहा, जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से नहीं की जाती कार्रवाई
सूरज कुमार
फरीदाबाद। जिले के निजी स्कूल मनमानी पर उतारू हैं। सरकार की ओर से फीस बढ़ोतरी करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। उसके बाद भी स्कूलों ने 20 से 30 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी कर दी है। हर साल फीस बढ़ने से अभिभावक परेशान है। अभिभावकों का कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से स्कूलों पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है।
निजी विद्यालय अलग-अलग फीस के नाम पर अभिभावकों से हजारों रुपये वसूलते हैं। इसमें प्रत्येक विद्यालय के अपने-अपने कायदे कानून हैं। निजी विद्यालय एडमिशन फीस के नाम पर हजारों रुपये लेते हैं। यह फीस 30 से 50 हजार तक होती है। इसके अलावा हर महीने ली जाने वाली मासिक फीस अलग है।
यही नहीं सत्र बदलने के बाद हर साल फीस बढ़ाई जाती है। एक अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी की पिछले सत्र की नर्सरी की फीस तीन हजार रुपये थी, जो इस साल बढ़ाकर चार हजार रुपये कर दी गई है। उन्होंने कहा कि फीस में दो सौ से तीन सौ रुपये तक बढ़ाना तो जायज है। लेकिन सीधे एक हजार रुपये बढ़ाना अनुचित है।
कक्षा बदलने की यह फीस स्कूल प्रत्येक स्कूल की अलग होती है। कक्षा एक से 12वीं तक की यह फीस हर साल बढ़ते -बढ़ते 10 से 12 हजार रुपये मासिक पहुंच जाती है। इसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर बढ़ता है। अगर अभिभावक इस बढ़ती फीस के खिलाफ कुछ भी कहते हैं तो स्कूल संचालक उन्हें स्कूल बदलने तक की बात करने लगते हैं।
अभिभावकों से बातचीत
स्कूल फीस बढ़ाने को लेकर मनमानी करते हैं। बिना किसी नियम कानून के हर साल फीस बढ़ाई जाती है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। -यश मलिक
आज कल निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना काफी महंगा हो गया है। फीस इतनी ज्यादा हो गई है कि अभिभावक के लिए चिंता का विषय बन गया है। - मोहम्मद अली
स्कूल की मासिक फीस के अलावा भी बहुत खर्चे होते हैं, जिसका कोई हिसाब नहीं होता है। प्रशासन को इसको लेकर सख्ती बरतने की आवश्यकता है।- वीरेंद्र
निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। इनको रोकने वाला कोई है। बच्चों को पढ़ाना अभिभावकों की मजबूरी है। ऐसे में वे कुछ बोल नहीं पाते हैं।-- अनिल सागवान
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सूरज कुमार
फरीदाबाद। जिले के निजी स्कूल मनमानी पर उतारू हैं। सरकार की ओर से फीस बढ़ोतरी करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। उसके बाद भी स्कूलों ने 20 से 30 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी कर दी है। हर साल फीस बढ़ने से अभिभावक परेशान है। अभिभावकों का कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से स्कूलों पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है।
निजी विद्यालय अलग-अलग फीस के नाम पर अभिभावकों से हजारों रुपये वसूलते हैं। इसमें प्रत्येक विद्यालय के अपने-अपने कायदे कानून हैं। निजी विद्यालय एडमिशन फीस के नाम पर हजारों रुपये लेते हैं। यह फीस 30 से 50 हजार तक होती है। इसके अलावा हर महीने ली जाने वाली मासिक फीस अलग है।
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यही नहीं सत्र बदलने के बाद हर साल फीस बढ़ाई जाती है। एक अभिभावक ने बताया कि उनकी बेटी की पिछले सत्र की नर्सरी की फीस तीन हजार रुपये थी, जो इस साल बढ़ाकर चार हजार रुपये कर दी गई है। उन्होंने कहा कि फीस में दो सौ से तीन सौ रुपये तक बढ़ाना तो जायज है। लेकिन सीधे एक हजार रुपये बढ़ाना अनुचित है।
कक्षा बदलने की यह फीस स्कूल प्रत्येक स्कूल की अलग होती है। कक्षा एक से 12वीं तक की यह फीस हर साल बढ़ते -बढ़ते 10 से 12 हजार रुपये मासिक पहुंच जाती है। इसका सीधा असर अभिभावकों की जेब पर बढ़ता है। अगर अभिभावक इस बढ़ती फीस के खिलाफ कुछ भी कहते हैं तो स्कूल संचालक उन्हें स्कूल बदलने तक की बात करने लगते हैं।
अभिभावकों से बातचीत
स्कूल फीस बढ़ाने को लेकर मनमानी करते हैं। बिना किसी नियम कानून के हर साल फीस बढ़ाई जाती है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। -यश मलिक
आज कल निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना काफी महंगा हो गया है। फीस इतनी ज्यादा हो गई है कि अभिभावक के लिए चिंता का विषय बन गया है। - मोहम्मद अली
स्कूल की मासिक फीस के अलावा भी बहुत खर्चे होते हैं, जिसका कोई हिसाब नहीं होता है। प्रशासन को इसको लेकर सख्ती बरतने की आवश्यकता है।- वीरेंद्र
निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। इनको रोकने वाला कोई है। बच्चों को पढ़ाना अभिभावकों की मजबूरी है। ऐसे में वे कुछ बोल नहीं पाते हैं।