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Faridabad News: खराब जॉब वर्क का आरोप नहीं हुआ सिद्ध, अपील खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जॉब वर्क भुगतान विवाद में दो निजी कंपनियों के बीच दायर अपील को अदालत ने खारिज कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने 23 मार्च को फैसला सुनाया। यह अपील 19 जनवरी 2026 को उस निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें 17 दिसंबर 2025 को निचली अदालत ने वादी के पक्ष में करीब 1.38 लाख की रिकवरी का आदेश दिया था।
मामले में प्रतिवादी ने याचिका इस आधार पर दायर की थी कि वादी द्वारा किया गया हार्डनिंग का जॉब वर्क खराब था, जिसके कारण दस अक्तूबर 2023 को ग्राहक ने माल रिजेक्ट कर दिया और उसे नुकसान हुआ। इसी वजह से भुगतान रोकने की दलील दी गई। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह आरोप साक्ष्यों से साबित नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि यदि दस अक्तूबर 2023 को ही काम खराब होने की जानकारी थी, तो उसके बाद 12 अक्तूबर से नौ नवंबर 2023 तक लगातार उसी काम को स्वीकार करना तर्कसंगत नहीं है।
सबसे अहम आधार यह रहा कि प्रतिवादी के अपने लेजर खाते (एक अप्रैल 2020 से तीन अक्तूबर 2024) में वादी के पक्ष में बकाया राशि दर्ज थी। इसके बावजूद कथित नुकसान से जुड़े डेबिट नोट्स को खातों में समायोजित नहीं किया गया और खराब बताए गए माल को भी वापस नहीं किया गया। इन तथ्यों के आधार पर माना कि खराब जॉब वर्क का आरोप सिद्ध नहीं हुआ और निचली अदालत का फैसला सही है। इसी आधार पर अपील को खारिज करते हुए प्रतिवादी को बकाया राशि ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए गए।
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फरीदाबाद। जॉब वर्क भुगतान विवाद में दो निजी कंपनियों के बीच दायर अपील को अदालत ने खारिज कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने 23 मार्च को फैसला सुनाया। यह अपील 19 जनवरी 2026 को उस निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें 17 दिसंबर 2025 को निचली अदालत ने वादी के पक्ष में करीब 1.38 लाख की रिकवरी का आदेश दिया था।
मामले में प्रतिवादी ने याचिका इस आधार पर दायर की थी कि वादी द्वारा किया गया हार्डनिंग का जॉब वर्क खराब था, जिसके कारण दस अक्तूबर 2023 को ग्राहक ने माल रिजेक्ट कर दिया और उसे नुकसान हुआ। इसी वजह से भुगतान रोकने की दलील दी गई। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि यह आरोप साक्ष्यों से साबित नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि यदि दस अक्तूबर 2023 को ही काम खराब होने की जानकारी थी, तो उसके बाद 12 अक्तूबर से नौ नवंबर 2023 तक लगातार उसी काम को स्वीकार करना तर्कसंगत नहीं है।
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सबसे अहम आधार यह रहा कि प्रतिवादी के अपने लेजर खाते (एक अप्रैल 2020 से तीन अक्तूबर 2024) में वादी के पक्ष में बकाया राशि दर्ज थी। इसके बावजूद कथित नुकसान से जुड़े डेबिट नोट्स को खातों में समायोजित नहीं किया गया और खराब बताए गए माल को भी वापस नहीं किया गया। इन तथ्यों के आधार पर माना कि खराब जॉब वर्क का आरोप सिद्ध नहीं हुआ और निचली अदालत का फैसला सही है। इसी आधार पर अपील को खारिज करते हुए प्रतिवादी को बकाया राशि ब्याज सहित अदा करने के निर्देश दिए गए।