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Faridabad News: चोरी की कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगाने के मामले में जमानत याचिका खारिज
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रिहाई से गवाह प्रभावित होने और जांच पर असर की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र अदालत ने चोरी की कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर इस्तेमाल करने के मामले में आरोपी गोविंदा कुमार की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं तथा इस स्तर पर आरोपी को जमानत दिए जाने से गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और फरार सह-आरोपियों की गिरफ्तारी प्रभावित होने की आशंका है।
एसजीएम नगर निवासी गौरव ने 21 अक्टूबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 20 अक्टूबर की रात उसकी कार घर के बाहर खड़ी थी, जो अगली सुबह चोरी मिली। प्रारंभिक जांच में आरोपी का पता नहीं चलने पर पुलिस ने अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
बाद में पुलिस को जानकारी मिली कि चोरी की यही कार बिहार के सिवान जिले में शराब तस्करी से जुड़े एक मामले में बरामद हुई थी। उस मामले में गोविंदा कुमार गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद उसे उत्पादन वारंट के जरिये इस मामले में भी शामिल किया गया और 6 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया।
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पुलिस का आरोप है कि गोविंदा कुमार ने सह-आरोपी राजन कुमार यादव और प्रिंस कुमार सिंह के साथ मिलकर चोरी की कार खरीदी थी। इसके बाद वाहन की मूल नंबर प्लेट हटाकर उसकी जगह फर्जी नंबर प्लेट लगा दी गई। पुलिस ने यह भी बताया कि दोनों सह-आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि गोविंदा कुमार को झूठा फंसाया गया है, जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इसलिए उसे नियमित जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की रिहाई से जांच और सह-आरोपियों की गिरफ्तारी प्रभावित हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए गोविंदा कुमार की नियमित जमानत सात जुलाई को याचिका खारिज कर दी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र अदालत ने चोरी की कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर इस्तेमाल करने के मामले में आरोपी गोविंदा कुमार की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं तथा इस स्तर पर आरोपी को जमानत दिए जाने से गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और फरार सह-आरोपियों की गिरफ्तारी प्रभावित होने की आशंका है।
एसजीएम नगर निवासी गौरव ने 21 अक्टूबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 20 अक्टूबर की रात उसकी कार घर के बाहर खड़ी थी, जो अगली सुबह चोरी मिली। प्रारंभिक जांच में आरोपी का पता नहीं चलने पर पुलिस ने अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
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बाद में पुलिस को जानकारी मिली कि चोरी की यही कार बिहार के सिवान जिले में शराब तस्करी से जुड़े एक मामले में बरामद हुई थी। उस मामले में गोविंदा कुमार गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद उसे उत्पादन वारंट के जरिये इस मामले में भी शामिल किया गया और 6 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया।
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पुलिस का आरोप है कि गोविंदा कुमार ने सह-आरोपी राजन कुमार यादव और प्रिंस कुमार सिंह के साथ मिलकर चोरी की कार खरीदी थी। इसके बाद वाहन की मूल नंबर प्लेट हटाकर उसकी जगह फर्जी नंबर प्लेट लगा दी गई। पुलिस ने यह भी बताया कि दोनों सह-आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि गोविंदा कुमार को झूठा फंसाया गया है, जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इसलिए उसे नियमित जमानत दी जानी चाहिए। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की रिहाई से जांच और सह-आरोपियों की गिरफ्तारी प्रभावित हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए गोविंदा कुमार की नियमित जमानत सात जुलाई को याचिका खारिज कर दी।