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Faridabad News: स्टोव खरीदना आसान, केरोसिन मिलना मुश्किल
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लोग किराना और सरकारी राशन की दुकानों पर केरोसीन की तलाश कर रहे हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बाजारों में स्टोव की बिक्री में तेजी देखी जा रही है, लेकिन उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या केरोसिन की कमी और बढ़ती कीमतें बनी हुई हैं। इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद, लोग स्टोव पर भरोसा कर रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि स्टोव तो बिक रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी केरोसिन की कमी है। कई दुकानदारों ने बताया कि पहले एक लीटर केरोसिन की कीमत सामान्य थी, लेकिन अब बढ़ गई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में लोग किराना की दुकानों और सरकारी राशन की दुकानों पर केरोसीन की तलाश कर रहे हैं।
कई दुकानदारों का कहना है कि केरोसीन के दाम पिछले साल की तुलना में लगभग 20-30 प्रतिशत बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा, ईंधन की कीमत बढ़ने के कारण ग्राहक सोच-समझकर ही खरीदारी करते हैं। छोटे परिवार के लिए यह रोजमर्रा का खर्च बढ़ा देता है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि स्टोव खरीदना आसान है, लेकिन ईंधन के बिना इसका इस्तेमाल मुश्किल हो गया है। स्टोव तो है, लेकिन केरोसिन नहीं मिलता और अगर मिलता भी है तो महंगा है। इससे रोजमर्रा का खर्च बढ़ रहा है।
केरोसिन की कमी और बढ़ती कीमतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल स्टोव उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। सस्ता और पर्याप्त ईंधन भी उतना ही जरूरी है ताकि उपभोक्ता स्टोव का उपयोग नियमित रूप से कर सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बाजारों में स्टोव की बिक्री में तेजी देखी जा रही है, लेकिन उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ी समस्या केरोसिन की कमी और बढ़ती कीमतें बनी हुई हैं। इंडक्शन चूल्हों के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद, लोग स्टोव पर भरोसा कर रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि स्टोव तो बिक रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी परेशानी केरोसिन की कमी है। कई दुकानदारों ने बताया कि पहले एक लीटर केरोसिन की कीमत सामान्य थी, लेकिन अब बढ़ गई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में लोग किराना की दुकानों और सरकारी राशन की दुकानों पर केरोसीन की तलाश कर रहे हैं।
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कई दुकानदारों का कहना है कि केरोसीन के दाम पिछले साल की तुलना में लगभग 20-30 प्रतिशत बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा, ईंधन की कीमत बढ़ने के कारण ग्राहक सोच-समझकर ही खरीदारी करते हैं। छोटे परिवार के लिए यह रोजमर्रा का खर्च बढ़ा देता है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि स्टोव खरीदना आसान है, लेकिन ईंधन के बिना इसका इस्तेमाल मुश्किल हो गया है। स्टोव तो है, लेकिन केरोसिन नहीं मिलता और अगर मिलता भी है तो महंगा है। इससे रोजमर्रा का खर्च बढ़ रहा है।
केरोसिन की कमी और बढ़ती कीमतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल स्टोव उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। सस्ता और पर्याप्त ईंधन भी उतना ही जरूरी है ताकि उपभोक्ता स्टोव का उपयोग नियमित रूप से कर सकें।