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Faridabad News: मधुमेह, तनावपूर्ण जीवनशैली से गंभीर हो रही समस्या
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पीड़ित मरीजों को जीवनभर दवाइयों, नियमित जांच और परामर्श पर निर्भर रहना पड़ता है
नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। जिले में मधुमेह के तेजी से बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ शहर की अर्थ व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यह बीमारी अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर परिवारों की आर्थिक स्थिति और शहर की उत्पादकता पर पड़ रहा है। मधुमेह से पीड़ित मरीजों को जीवनभर दवाइयों, नियमित जांच और परामर्श पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कामकाजी उम्र के लोगों में मधुमेह के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं। बीमारी के कारण बार-बार छुट्टी लेना, कार्यक्षमता में कमी और लंबे समय तक इलाज चलने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर उद्योगों, निजी संस्थानों और छोटे व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। वहीं परिवारों को इलाज पर खर्च करने के कारण शिक्षा, बचत और अन्य आवश्यक जरूरतों पर कटौती करनी पड़ रही है।
डॉक्टरों का मानना है कि गलत खान-पान, जंक फूड की बढ़ती खपत, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनावपूर्ण जीवनशैली इस समस्या को और गंभीर बना रही है। समय पर जांच न होने के कारण कई मामलों में बीमारी तब सामने आती है, जब वह गंभीर रूप ले चुकी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता से न केवल गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है, बल्कि इलाज पर होने वाले भारी खर्च को भी कम किया जा सकता है।
एक हालिया वैश्विक अध्ययन में पता चला है कि भारत में मधुमेह से जुड़ी समस्याओं का बोझ 11.4 ट्रिलियन डॉलर है, जो अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। हमारा देश पहले से ही मधुमेह की राजधानी कहा जाता है। शहरी क्षेत्रों में मधुमेह का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में लगातार अधिक पाया गया है। मधुमेह का स्वास्थ्य के साथ-साथ किसी भी स्थान विशेष की अर्थ व्यवस्था पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।-डॉ. एके यादव, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी
जिलेभर के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर होगी मधुमेह की जांच
गैर संचारी रोग विभाग की जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रैना ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर एक फरवरी को विशेष जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के साथ-साथ तीन सामान्य कैंसर-मुंह, स्तन और सर्वाइकल की जांच की जाएगी। करीब 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग इन जांचों का लाभ उठा सकेंगे।
डॉ. रैना ने लोगों से अपील की कि वे जांच शिविर में पहुंचकर अपनी सेहत की जांच कराएं, संतुलित आहार अपनाएं, नियमित व्यायाम करें और तनाव से दूर रहने की कोशिश करें। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। जिले में मधुमेह के तेजी से बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ शहर की अर्थ व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यह बीमारी अब केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा असर परिवारों की आर्थिक स्थिति और शहर की उत्पादकता पर पड़ रहा है। मधुमेह से पीड़ित मरीजों को जीवनभर दवाइयों, नियमित जांच और परामर्श पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कामकाजी उम्र के लोगों में मधुमेह के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं। बीमारी के कारण बार-बार छुट्टी लेना, कार्यक्षमता में कमी और लंबे समय तक इलाज चलने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर उद्योगों, निजी संस्थानों और छोटे व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। वहीं परिवारों को इलाज पर खर्च करने के कारण शिक्षा, बचत और अन्य आवश्यक जरूरतों पर कटौती करनी पड़ रही है।
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डॉक्टरों का मानना है कि गलत खान-पान, जंक फूड की बढ़ती खपत, शारीरिक गतिविधियों की कमी और तनावपूर्ण जीवनशैली इस समस्या को और गंभीर बना रही है। समय पर जांच न होने के कारण कई मामलों में बीमारी तब सामने आती है, जब वह गंभीर रूप ले चुकी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता से न केवल गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है, बल्कि इलाज पर होने वाले भारी खर्च को भी कम किया जा सकता है।
एक हालिया वैश्विक अध्ययन में पता चला है कि भारत में मधुमेह से जुड़ी समस्याओं का बोझ 11.4 ट्रिलियन डॉलर है, जो अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। हमारा देश पहले से ही मधुमेह की राजधानी कहा जाता है। शहरी क्षेत्रों में मधुमेह का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में लगातार अधिक पाया गया है। मधुमेह का स्वास्थ्य के साथ-साथ किसी भी स्थान विशेष की अर्थ व्यवस्था पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना पड़ेगा।-डॉ. एके यादव, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी
जिलेभर के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर होगी मधुमेह की जांच
गैर संचारी रोग विभाग की जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रैना ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर एक फरवरी को विशेष जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के साथ-साथ तीन सामान्य कैंसर-मुंह, स्तन और सर्वाइकल की जांच की जाएगी। करीब 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग इन जांचों का लाभ उठा सकेंगे।
डॉ. रैना ने लोगों से अपील की कि वे जांच शिविर में पहुंचकर अपनी सेहत की जांच कराएं, संतुलित आहार अपनाएं, नियमित व्यायाम करें और तनाव से दूर रहने की कोशिश करें। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।