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Faridabad News: डिजिटल मैपिंग से संवरेंगे जिले के सरकारी स्कूल
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जीआईएस और सैटेलाइट तकनीक से बनेगा मास्टर प्लान
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचना और निर्माण कार्यों को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जिले के सभी 378 सरकारी स्कूलों की जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) और सैटेलाइट आधारित डिजिटल मैपिंग कराई जाएगी।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस आधुनिक तकनीक के जरिए प्रत्येक स्कूल परिसर का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार होगा, जिससे स्कूल की एक-एक इंच जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज रहेगा। इससे भविष्य में होने वाले नए कमरों, शौचालयों, लैब और बाउंड्री वॉल के निर्माण बिना किसी योजनागत चूक के बेहद सुनियोजित तरीके से किए जा सकेंगे। डिजिटल मैपिंग के दौरान स्कूल परिसर में मौजूद भवनों, खेल के मैदानों, बाउंड्री वॉल, खाली जमीन और यहां तक कि पेड़-पौधों का भी सटीक भौगोलिक विवरण जुटाया जाएगा।
इस डाटा के आधार पर हर स्कूल का एक मास्टर प्लान तैयार होगा, जिससे आर्किटेक्ट और इंजीनियर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही निर्माण की रूपरेखा बनाएंगे। इसके अलावा, इस मैपिंग से स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण रोकने, संपत्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने और जिले भर के स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर का एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी। बिना पूर्व योजना के होने वाले निर्माण से स्कूल परिसरों में जगह के बेजा इस्तेमाल या कमी जैसी समस्याएं खत्म होंगी। उप जिला शिक्षा अधिकारी मनोज मित्तल ने कहा कि वर्ष 2013 से लंबित पड़ी इस योजना को अब राज्य सरकार के निर्देशों के बाद जिले में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचना और निर्माण कार्यों को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जिले के सभी 378 सरकारी स्कूलों की जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) और सैटेलाइट आधारित डिजिटल मैपिंग कराई जाएगी।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस आधुनिक तकनीक के जरिए प्रत्येक स्कूल परिसर का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार होगा, जिससे स्कूल की एक-एक इंच जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज रहेगा। इससे भविष्य में होने वाले नए कमरों, शौचालयों, लैब और बाउंड्री वॉल के निर्माण बिना किसी योजनागत चूक के बेहद सुनियोजित तरीके से किए जा सकेंगे। डिजिटल मैपिंग के दौरान स्कूल परिसर में मौजूद भवनों, खेल के मैदानों, बाउंड्री वॉल, खाली जमीन और यहां तक कि पेड़-पौधों का भी सटीक भौगोलिक विवरण जुटाया जाएगा।
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इस डाटा के आधार पर हर स्कूल का एक मास्टर प्लान तैयार होगा, जिससे आर्किटेक्ट और इंजीनियर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही निर्माण की रूपरेखा बनाएंगे। इसके अलावा, इस मैपिंग से स्कूलों की जमीन पर अतिक्रमण रोकने, संपत्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने और जिले भर के स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर का एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी। बिना पूर्व योजना के होने वाले निर्माण से स्कूल परिसरों में जगह के बेजा इस्तेमाल या कमी जैसी समस्याएं खत्म होंगी। उप जिला शिक्षा अधिकारी मनोज मित्तल ने कहा कि वर्ष 2013 से लंबित पड़ी इस योजना को अब राज्य सरकार के निर्देशों के बाद जिले में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
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