{"_id":"6a6f77012156abfe040d961d","slug":"drinking-water-supply-will-improve-with-five-new-ranney-wells-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-76416-2026-08-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: पांच नए रेनीवेल से पेयजल आपूर्ति बेहतर होगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: पांच नए रेनीवेल से पेयजल आपूर्ति बेहतर होगी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाई पावर परचेज कमेटी ने दी मंजूरी, प्रतिदिन 50 एमएलडी अतिरिक्त पेयजल मिलेगा
164.75 करोड़ रुपये से होगा काम
450 एमएलडी पानी की जरूरत है प्रतिदिन
325 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पाता है
150 एमएलडी पानी की कमी झेल रहा विभाग
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जिले में पानी का संकट अब केवल गर्मी का मौसमी मुद्दा नहीं बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हाई पावर परचेज कमेटी (एचपीपीसी) द्वारा 164.75 करोड़ की लागत से यमुना किनारे मंझावली और मोटुका में पांच नए रेनीवेल बनाने की मंजूरी को शहर के लिए महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। पांचों रेनीवेल से प्रतिदिन 50 एमएलडी अतिरिक्त पेयजल मिलेगा जिससे मांग और सप्लाई के बीच का अंतर भी कुछ हद तक हो जाएगा। एफएमडीए के अनुसार अगले साल मई तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार शहर को प्रतिदिन लगभग 450 एमएलडी पानी की जरूरत है जबकि मौजूदा व्यवस्था से 300-325 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पाता है। यानी आज भी शहर 125 से 150 एमएलडी पानी की कमी झेल रहा है। नई परियोजना के बाद कुल उपलब्धता बढ़कर करीब 375 एमएलडी तक पहुंचेगी इससे काफी हद तक राहत मिलेगी की उम्मीद है।
इन इलाकों में रहती है अधिक समस्या
जल संकट का सबसे ज्यादा असर एनआईटी क्षेत्र, जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी, पर्वतीय कॉलोनी, संजय कॉलोनी, सारन के आसपास की बस्तियों और बल्लभगढ़ के कुछ हिस्सों में देखने को मिलता है। दूसरी ओर ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-75 से 89 की कई नई आवासीय सोसाइटियों में आबादी तेजी से बढ़ने के कारण मांग लगातार बढ़ी है। यहां कई सोसाइटियां अपने निजी बोरवेल और टैंकरों के सहारे जरूरत पूरी करती हैं जबकि सरकारी आपूर्ति पर्याप्त नहीं मानी जाती। अरावली की तलहटी से सटे पश्चिमी इलाकों में भी कम दबाव और अनियमित जलापूर्ति लंबे समय से समस्या बनी हुई है जिसके समाधान के लिए एफएमडीए अलग पाइपलाइन और नए जल स्रोत विकसित कर रहा है।
विज्ञापन
सिर्फ पानी की कमी नहीं, वितरण भी बड़ी चुनौती
प्रशासन के सूत्रों के अनुसार कई इलाकों में समस्या केवल पानी की उपलब्धता नहीं बल्कि वितरण प्रणाली भी है। कम दबाव, पुरानी पाइपलाइन, अवैध कनेक्शन और मुख्य रैनी वेल लाइन से सीधे जोड़ लिए गए पाइप भी जलापूर्ति को प्रभावित करते हैं। 2025 में हरियाणा विधानसभा की लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में भी 22 रेनीवेल और 68 बूस्टिंग स्टेशनों पर डिजिटल फ्लो मीटर लगाने का उल्लेख किया गया, ताकि पानी की हानि और वितरण की बेहतर निगरानी हो सके। रिपोर्ट में यह भी माना गया कि बड़खल विधानसभा क्षेत्र के घनी आबादी वाले वार्डों में जल संकट अपेक्षाकृत अधिक है।
बढ़ती आबादी ने बढ़ाया दबाव
2011 की जनगणना में जिले की आबादी 18 लाख से कुछ अधिक थी जबकि अब विभिन्न सरकारी अनुमानों के अनुसार यह 20 से 22 लाख के बीच पहुंच चुकी है। ग्रेटर फरीदाबाद, नई हाउसिंग सोसाइटियों और औद्योगिक विस्तार ने जलापूर्ति नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव डाला है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल नए जल स्रोत बनाना पर्याप्त नहीं होगा। वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पाइपलाइन लीकेज रोकना और उपचारित पानी के पुन: उपयोग जैसे उपाय समान रूप से जरूरी हैं।
इस परियोजना को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है। अगले साल तक इसको पूरा कर लिया जाएगा इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।- अंकित भारद्वाज, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
विज्ञापन
164.75 करोड़ रुपये से होगा काम
450 एमएलडी पानी की जरूरत है प्रतिदिन
325 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पाता है
150 एमएलडी पानी की कमी झेल रहा विभाग
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जिले में पानी का संकट अब केवल गर्मी का मौसमी मुद्दा नहीं बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हाई पावर परचेज कमेटी (एचपीपीसी) द्वारा 164.75 करोड़ की लागत से यमुना किनारे मंझावली और मोटुका में पांच नए रेनीवेल बनाने की मंजूरी को शहर के लिए महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। पांचों रेनीवेल से प्रतिदिन 50 एमएलडी अतिरिक्त पेयजल मिलेगा जिससे मांग और सप्लाई के बीच का अंतर भी कुछ हद तक हो जाएगा। एफएमडीए के अनुसार अगले साल मई तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार शहर को प्रतिदिन लगभग 450 एमएलडी पानी की जरूरत है जबकि मौजूदा व्यवस्था से 300-325 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पाता है। यानी आज भी शहर 125 से 150 एमएलडी पानी की कमी झेल रहा है। नई परियोजना के बाद कुल उपलब्धता बढ़कर करीब 375 एमएलडी तक पहुंचेगी इससे काफी हद तक राहत मिलेगी की उम्मीद है।
विज्ञापन
इन इलाकों में रहती है अधिक समस्या
जल संकट का सबसे ज्यादा असर एनआईटी क्षेत्र, जवाहर कॉलोनी, डबुआ कॉलोनी, पर्वतीय कॉलोनी, संजय कॉलोनी, सारन के आसपास की बस्तियों और बल्लभगढ़ के कुछ हिस्सों में देखने को मिलता है। दूसरी ओर ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-75 से 89 की कई नई आवासीय सोसाइटियों में आबादी तेजी से बढ़ने के कारण मांग लगातार बढ़ी है। यहां कई सोसाइटियां अपने निजी बोरवेल और टैंकरों के सहारे जरूरत पूरी करती हैं जबकि सरकारी आपूर्ति पर्याप्त नहीं मानी जाती। अरावली की तलहटी से सटे पश्चिमी इलाकों में भी कम दबाव और अनियमित जलापूर्ति लंबे समय से समस्या बनी हुई है जिसके समाधान के लिए एफएमडीए अलग पाइपलाइन और नए जल स्रोत विकसित कर रहा है।
विज्ञापन
सिर्फ पानी की कमी नहीं, वितरण भी बड़ी चुनौती
प्रशासन के सूत्रों के अनुसार कई इलाकों में समस्या केवल पानी की उपलब्धता नहीं बल्कि वितरण प्रणाली भी है। कम दबाव, पुरानी पाइपलाइन, अवैध कनेक्शन और मुख्य रैनी वेल लाइन से सीधे जोड़ लिए गए पाइप भी जलापूर्ति को प्रभावित करते हैं। 2025 में हरियाणा विधानसभा की लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में भी 22 रेनीवेल और 68 बूस्टिंग स्टेशनों पर डिजिटल फ्लो मीटर लगाने का उल्लेख किया गया, ताकि पानी की हानि और वितरण की बेहतर निगरानी हो सके। रिपोर्ट में यह भी माना गया कि बड़खल विधानसभा क्षेत्र के घनी आबादी वाले वार्डों में जल संकट अपेक्षाकृत अधिक है।
बढ़ती आबादी ने बढ़ाया दबाव
2011 की जनगणना में जिले की आबादी 18 लाख से कुछ अधिक थी जबकि अब विभिन्न सरकारी अनुमानों के अनुसार यह 20 से 22 लाख के बीच पहुंच चुकी है। ग्रेटर फरीदाबाद, नई हाउसिंग सोसाइटियों और औद्योगिक विस्तार ने जलापूर्ति नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव डाला है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल नए जल स्रोत बनाना पर्याप्त नहीं होगा। वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पाइपलाइन लीकेज रोकना और उपचारित पानी के पुन: उपयोग जैसे उपाय समान रूप से जरूरी हैं।
इस परियोजना को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है। अगले साल तक इसको पूरा कर लिया जाएगा इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।- अंकित भारद्वाज, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए