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Faridabad News: 7 करोड़ रुपये प्रति एकड़ सर्कल रेट के लिए किसानों ने भरी हुंकार
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मोहना में दर्जनभर गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने एक संयुक्त पंचायत का आयोजन किया
संवाद न्यूज़ एजेंसी।
छांयसा। मोहना में रविवार को दर्जनभर गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने एक संयुक्त पंचायत का आयोजन किया। पंचायत में मोहना, छांयसा, हीरापुर जलहाका, अटेरणा, सोलड़ा, भोलडा, बागपुर, थंतरी, हसापुर, पंचायत झुग्गी, शेखपुर, राजूपुर व माला सिंह फार्म सहित कई गांवों की सरदारी मौजूद रही। पंचायत की अध्यक्षता वीर सिंह थानेदार ने की।
पंचायत में क्षेत्र से जुड़े तीन अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें प्रति गांव सर्कल रेट, किसानों की मिल्कियत से यमुना नदी का बहना तथा ग्रीन एक्सप्रेसवे के पुल पर बनाए जा रहे बंदा से किसानों की जमीन प्रभावित होने का विषय प्रमुख रहा।
सबसे पहले सर्कल रेट के मुद्दे पर चर्चा हुई। किसानों ने एक स्वर में कहा कि क्षेत्र के सर्कल रेट बाजार भाव की तुलना में बेहद कम हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पंचायत में मांग रखी गई कि क्षेत्र के सभी गांवों के सर्कल रेट को बाजार दर के अनुरूप बढ़ाकर 6 से 7 करोड़ रुपये प्रति एकड़ किया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को पुनः ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया।
दूसरा मुद्दा यमुना नदी को लेकर रहा। किसानों ने बताया कि छांयसा से मोहना होते हुए बलई, थंतरी व चांदहट तक यमुना नदी किसानों की निजी मिल्कियत की भूमि से होकर बहती है। सरकार द्वारा समय-समय पर खनन के ठेके तो दिए जाते हैं, लेकिन आज तक संबंधित किसानों को किसी प्रकार की सहायता या मुआवजा नहीं मिला। पंचायत ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार से इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
तीसरा और सबसे गंभीर मुद्दा ग्रीन एक्सप्रेसवे के पुल पर बनाए जा रहे बंदा निर्माण का रहा। पंचायत में बताया गया कि बंदा बनने से खादर व बांगर की लगभग एक हजार एकड़ भूमि प्रभावित होगी, जिससे बाढ़ का पानी इसी क्षेत्र में रोका जाएगा। इससे किसानों की जमीन की कीमत शून्य हो जाएगी और खेती भी असंभव हो जाएगी। किसानों ने आरोप लगाया कि इस संबंध में उनसे कोई सहमति नहीं ली गई।
पंचायत में निर्णय लिया गया कि यदि 10 फरवरी 2026 तक सरकार द्वारा कोई ठोस समाधान नहीं किया गया, तो किसान एकजुट होकर बंदा निर्माण कार्य को रोकने पर मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की होगी।
पंचायत में ईश्वर नंबरदार, किशनलाल, प्रभु मास्टर, राजेश भाटी, नरेंद्र अत्रि, लखमी सरपंच सोल्डा, राघवेंद्र सरपंच माला सिंह फार्म, जयपाल फौजी, कमल सिंह, हंसराज, प्रेम मेंबर, भूदेव सिंह, सतवीर मैनेजर, गिर्राज मास्टर, सुरेंद्र तंवर, तंतपाल सरपंच सहित बड़ी संख्या में किसान व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज़ एजेंसी।
छांयसा। मोहना में रविवार को दर्जनभर गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने एक संयुक्त पंचायत का आयोजन किया। पंचायत में मोहना, छांयसा, हीरापुर जलहाका, अटेरणा, सोलड़ा, भोलडा, बागपुर, थंतरी, हसापुर, पंचायत झुग्गी, शेखपुर, राजूपुर व माला सिंह फार्म सहित कई गांवों की सरदारी मौजूद रही। पंचायत की अध्यक्षता वीर सिंह थानेदार ने की।
पंचायत में क्षेत्र से जुड़े तीन अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें प्रति गांव सर्कल रेट, किसानों की मिल्कियत से यमुना नदी का बहना तथा ग्रीन एक्सप्रेसवे के पुल पर बनाए जा रहे बंदा से किसानों की जमीन प्रभावित होने का विषय प्रमुख रहा।
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सबसे पहले सर्कल रेट के मुद्दे पर चर्चा हुई। किसानों ने एक स्वर में कहा कि क्षेत्र के सर्कल रेट बाजार भाव की तुलना में बेहद कम हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पंचायत में मांग रखी गई कि क्षेत्र के सभी गांवों के सर्कल रेट को बाजार दर के अनुरूप बढ़ाकर 6 से 7 करोड़ रुपये प्रति एकड़ किया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को पुनः ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया।
दूसरा मुद्दा यमुना नदी को लेकर रहा। किसानों ने बताया कि छांयसा से मोहना होते हुए बलई, थंतरी व चांदहट तक यमुना नदी किसानों की निजी मिल्कियत की भूमि से होकर बहती है। सरकार द्वारा समय-समय पर खनन के ठेके तो दिए जाते हैं, लेकिन आज तक संबंधित किसानों को किसी प्रकार की सहायता या मुआवजा नहीं मिला। पंचायत ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार से इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
तीसरा और सबसे गंभीर मुद्दा ग्रीन एक्सप्रेसवे के पुल पर बनाए जा रहे बंदा निर्माण का रहा। पंचायत में बताया गया कि बंदा बनने से खादर व बांगर की लगभग एक हजार एकड़ भूमि प्रभावित होगी, जिससे बाढ़ का पानी इसी क्षेत्र में रोका जाएगा। इससे किसानों की जमीन की कीमत शून्य हो जाएगी और खेती भी असंभव हो जाएगी। किसानों ने आरोप लगाया कि इस संबंध में उनसे कोई सहमति नहीं ली गई।
पंचायत में निर्णय लिया गया कि यदि 10 फरवरी 2026 तक सरकार द्वारा कोई ठोस समाधान नहीं किया गया, तो किसान एकजुट होकर बंदा निर्माण कार्य को रोकने पर मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की होगी।
पंचायत में ईश्वर नंबरदार, किशनलाल, प्रभु मास्टर, राजेश भाटी, नरेंद्र अत्रि, लखमी सरपंच सोल्डा, राघवेंद्र सरपंच माला सिंह फार्म, जयपाल फौजी, कमल सिंह, हंसराज, प्रेम मेंबर, भूदेव सिंह, सतवीर मैनेजर, गिर्राज मास्टर, सुरेंद्र तंवर, तंतपाल सरपंच सहित बड़ी संख्या में किसान व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।