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Faridabad News: निचले और संकरे इलाकों में तुरंत पानी निकासी पर फोकस, तैनात रहेंगे टैंकर
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छह महीने तक लागू रहेगी विशेष व्यवस्था, जलभराव से राहत की बड़ी तैयारी
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। मानसून से पहले जलभराव की समस्या से जूझ रहे फरीदाबाद के लोगों के लिए राहत की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम ने अब केवल एक वार्ड तक सीमित रहने के बजाय पूरे शहर में विशेष जल निकासी योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत निचले, घनी आबादी वाले और संकरे इलाकों में ट्रैक्टर माउंटेड पंप सेट (सक्शन टैंकर) तैनात किए जाएंगे जो बारिश के दौरान जमा पानी को तुरंत निकालने का काम करेंगे। यह व्यवस्था करीब छह महीने तक प्रभावी रहेगी।
शहर में हर साल मानसून के दौरान सैकड़ों स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनती है। निगम के आंतरिक आकलन के अनुसार करीब 150 से अधिक लो-लाइन प्वाइंट ऐसे हैं जहां थोड़ी देर की बारिश में भी पानी भर जाता है। एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद, पर्वतीय कॉलोनी, सेक्टर-21, 22, 23, 24 और डबुआ जैसे इलाकों में यह समस्या अधिक गंभीर रहती है।
निचले इलाकों की पहचान, मौके पर तुरंत पहुंचेगा टैंकर
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के ऐसे क्षेत्रों की पहचान पहले ही कर ली गई है, जहां पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित होता है। कई कॉलोनियों में ड्रेनेज सिस्टम कमजोर है या ढलान सही नहीं होने के कारण पानी सड़कों और गलियों में जमा हो जाता है। नई व्यवस्था के तहत जैसे ही किसी इलाके से जलभराव की सूचना मिलेगी वहां नजदीकी तैनात सक्शन टैंकर तुरंत भेजा जाएगा। ट्रैक्टर माउंटेड पंप सेट संकरी गलियों में भी आसानी से पहुंच सकते हैं जिससे उन क्षेत्रों में भी राहत मिलेगी जहां बड़ी मशीनें नहीं पहुंच पातीं।
केवल मानसून नहीं बाद की स्थिति पर भी नजर
अक्सर देखा गया है कि बारिश खत्म होने के बाद भी कई इलाकों में पानी जमा रहता है जिससे सड़कों को नुकसान और बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस योजना की अवधि छह महीने तय की गई है। निगम का मानना है कि लंबे समय तक तैनाती रहने से जलभराव की समस्या पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
हर साल जलभराव से जूझता है शहर
फरीदाबाद में पिछले वर्षों में जलभराव के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता रहा है। कई मुख्य सड़कों पर घंटों जाम की स्थिति बन जाती है जबकि कॉलोनियों में घरों तक पानी पहुंचने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शहर की आबादी 20 लाख के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम उसी अनुपात में विकसित नहीं हो पाया। कई पुराने नाले अतिक्रमण और सिल्ट के कारण अपनी क्षमता खो चुके हैं जिससे बारिश का पानी तेजी से नहीं निकल पाता।
बीमारियों और आर्थिक नुकसान पर भी असर
जलभराव केवल आवाजाही की समस्या नहीं है बल्कि इसका सीधा असर लोगों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है जिससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा हर साल बढ़ जाता है। इसके अलावा छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और कामकाजी लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार बाजारों में पानी भरने से कारोबार ठप हो जाता है।
जवाबदेही तय, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
नगर निगम ने इस व्यवस्था के संचालन में जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, टैंकरों की तैनाती, संचालन और समय पर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है। यदि किसी क्षेत्र में शिकायत के बावजूद देरी होती है या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी या कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
लंबी रणनीति का हिस्सा है पहल
निगम अधिकारियों का कहना है कि सक्शन टैंकर तैनाती केवल अस्थायी राहत का उपाय नहीं है बल्कि इसे शहर की व्यापक जल निकासी योजना से जोड़ा गया है। इसके साथ ही नालों की सफाई, ड्रेनेज नेटवर्क सुधार, पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने और नए जल निकासी मार्ग विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
मानसून को लेकर नगर निगम ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। लोगों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जाएगी।- धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। मानसून से पहले जलभराव की समस्या से जूझ रहे फरीदाबाद के लोगों के लिए राहत की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम ने अब केवल एक वार्ड तक सीमित रहने के बजाय पूरे शहर में विशेष जल निकासी योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत निचले, घनी आबादी वाले और संकरे इलाकों में ट्रैक्टर माउंटेड पंप सेट (सक्शन टैंकर) तैनात किए जाएंगे जो बारिश के दौरान जमा पानी को तुरंत निकालने का काम करेंगे। यह व्यवस्था करीब छह महीने तक प्रभावी रहेगी।
शहर में हर साल मानसून के दौरान सैकड़ों स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनती है। निगम के आंतरिक आकलन के अनुसार करीब 150 से अधिक लो-लाइन प्वाइंट ऐसे हैं जहां थोड़ी देर की बारिश में भी पानी भर जाता है। एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद, पर्वतीय कॉलोनी, सेक्टर-21, 22, 23, 24 और डबुआ जैसे इलाकों में यह समस्या अधिक गंभीर रहती है।
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निचले इलाकों की पहचान, मौके पर तुरंत पहुंचेगा टैंकर
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के ऐसे क्षेत्रों की पहचान पहले ही कर ली गई है, जहां पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित होता है। कई कॉलोनियों में ड्रेनेज सिस्टम कमजोर है या ढलान सही नहीं होने के कारण पानी सड़कों और गलियों में जमा हो जाता है। नई व्यवस्था के तहत जैसे ही किसी इलाके से जलभराव की सूचना मिलेगी वहां नजदीकी तैनात सक्शन टैंकर तुरंत भेजा जाएगा। ट्रैक्टर माउंटेड पंप सेट संकरी गलियों में भी आसानी से पहुंच सकते हैं जिससे उन क्षेत्रों में भी राहत मिलेगी जहां बड़ी मशीनें नहीं पहुंच पातीं।
केवल मानसून नहीं बाद की स्थिति पर भी नजर
अक्सर देखा गया है कि बारिश खत्म होने के बाद भी कई इलाकों में पानी जमा रहता है जिससे सड़कों को नुकसान और बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस योजना की अवधि छह महीने तय की गई है। निगम का मानना है कि लंबे समय तक तैनाती रहने से जलभराव की समस्या पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
हर साल जलभराव से जूझता है शहर
फरीदाबाद में पिछले वर्षों में जलभराव के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता रहा है। कई मुख्य सड़कों पर घंटों जाम की स्थिति बन जाती है जबकि कॉलोनियों में घरों तक पानी पहुंचने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शहर की आबादी 20 लाख के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम उसी अनुपात में विकसित नहीं हो पाया। कई पुराने नाले अतिक्रमण और सिल्ट के कारण अपनी क्षमता खो चुके हैं जिससे बारिश का पानी तेजी से नहीं निकल पाता।
बीमारियों और आर्थिक नुकसान पर भी असर
जलभराव केवल आवाजाही की समस्या नहीं है बल्कि इसका सीधा असर लोगों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है जिससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा हर साल बढ़ जाता है। इसके अलावा छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और कामकाजी लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार बाजारों में पानी भरने से कारोबार ठप हो जाता है।
जवाबदेही तय, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
नगर निगम ने इस व्यवस्था के संचालन में जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, टैंकरों की तैनाती, संचालन और समय पर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है। यदि किसी क्षेत्र में शिकायत के बावजूद देरी होती है या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी या कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
लंबी रणनीति का हिस्सा है पहल
निगम अधिकारियों का कहना है कि सक्शन टैंकर तैनाती केवल अस्थायी राहत का उपाय नहीं है बल्कि इसे शहर की व्यापक जल निकासी योजना से जोड़ा गया है। इसके साथ ही नालों की सफाई, ड्रेनेज नेटवर्क सुधार, पंपिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने और नए जल निकासी मार्ग विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
मानसून को लेकर नगर निगम ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। लोगों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होने दी जाएगी।- धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
