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Faridabad News: इसी सत्र से जिले के सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों में मिलेगा एआई का ज्ञान
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग के कोर्स होंगे लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के सीबीएसई से संबद्ध राजकीय और निजी विद्यालयों में इसी सत्र से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसे आधुनिक विषय पढ़ाए जाएंगे। इस पहल से जिले के एक हजार से अधिक निजी और राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा तीन से आठवीं तक छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित होने वाले इन कोर्स में छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा दी जाएगी, ताकि उनके लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें। इस कोर्स में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, बिग डेटा और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसी तकनीक का ज्ञान दिया जाएगा। कोर्स में थ्योरी के बजाय प्रयोगात्मक गतिविधि अधिक शामिल होंगी।
पढ़ाई को और मजेदार और आसान बनाने के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और वर्चुअल लैब्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बच्चों में रचनात्मकता और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता बढ़ेगी। राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा 2023 में इन कोर्स को संचालित करने के तरीके बताए गए थे।
बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सीखने के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग की नींव मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसमें साइबर सुरक्षा और बेसिक नेटवर्क जैसी चीजें भी शामिल हैं। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि सीबीएसई इसके लिए खास प्लेटफार्म तैयार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इन कोर्स के अध्ययन करने से छात्र गणित और तर्क से जुड़ी मुश्किल समस्याओं को सुलझाना सीखेंगे। इसके साथ ही वे जटिल पैटर्न को पहचानना, बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटना, किसी नियम या पाबंदी के तहत स्टेप-बाय-स्टेप हल (एल्गोरिदम) तैयार करना आदि में निपुण होंगे।
अध्यापक ले चुके हैं एआई का प्रशिक्षण
जिले के राजकीय विद्यालयों में पढ़ाने वाले अध्यापकों के लिए मार्च 2026 में एआई को लेकर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया था। इसमें 50 अध्यापकों ने भाग लिया था। प्रशिक्षण सत्र में एआई की सहायता से पढ़ाने के तरीकों को कैसे बेहतर बना सकते हैं, इसके बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा अध्यापकों को चैट जीपीटी इत्यादि के बारे में भी बताया गया। हालांकि जिले के प्राचार्यों का कहना है कि राजकीय विद्यालयों में एआई जैसे आधुनिक कोर्स को पढ़ाने के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी है। विद्यालयों में एआई जैसे कोर्स संचालन में समय लग सकता है।
वर्जन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग कोर्स के संचालन के लिए सीबीएसई द्वारा पत्र प्राप्त हुआ है। इन कोर्स में छात्रों कौशल आधारित शिक्षा दी जाएगी, जिससे उनके लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। - अनुराधा, प्राचार्या, राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी दो
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के सीबीएसई से संबद्ध राजकीय और निजी विद्यालयों में इसी सत्र से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसे आधुनिक विषय पढ़ाए जाएंगे। इस पहल से जिले के एक हजार से अधिक निजी और राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा तीन से आठवीं तक छात्रों को इसका लाभ मिलेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित होने वाले इन कोर्स में छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा दी जाएगी, ताकि उनके लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकें। इस कोर्स में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, बिग डेटा और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसी तकनीक का ज्ञान दिया जाएगा। कोर्स में थ्योरी के बजाय प्रयोगात्मक गतिविधि अधिक शामिल होंगी।
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पढ़ाई को और मजेदार और आसान बनाने के लिए ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और वर्चुअल लैब्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बच्चों में रचनात्मकता और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता बढ़ेगी। राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा 2023 में इन कोर्स को संचालित करने के तरीके बताए गए थे।
बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सीखने के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग की नींव मजबूत होना बहुत जरूरी है। इसमें साइबर सुरक्षा और बेसिक नेटवर्क जैसी चीजें भी शामिल हैं। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि सीबीएसई इसके लिए खास प्लेटफार्म तैयार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इन कोर्स के अध्ययन करने से छात्र गणित और तर्क से जुड़ी मुश्किल समस्याओं को सुलझाना सीखेंगे। इसके साथ ही वे जटिल पैटर्न को पहचानना, बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटना, किसी नियम या पाबंदी के तहत स्टेप-बाय-स्टेप हल (एल्गोरिदम) तैयार करना आदि में निपुण होंगे।
अध्यापक ले चुके हैं एआई का प्रशिक्षण
जिले के राजकीय विद्यालयों में पढ़ाने वाले अध्यापकों के लिए मार्च 2026 में एआई को लेकर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया था। इसमें 50 अध्यापकों ने भाग लिया था। प्रशिक्षण सत्र में एआई की सहायता से पढ़ाने के तरीकों को कैसे बेहतर बना सकते हैं, इसके बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा अध्यापकों को चैट जीपीटी इत्यादि के बारे में भी बताया गया। हालांकि जिले के प्राचार्यों का कहना है कि राजकीय विद्यालयों में एआई जैसे आधुनिक कोर्स को पढ़ाने के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी है। विद्यालयों में एआई जैसे कोर्स संचालन में समय लग सकता है।
वर्जन
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग कोर्स के संचालन के लिए सीबीएसई द्वारा पत्र प्राप्त हुआ है। इन कोर्स में छात्रों कौशल आधारित शिक्षा दी जाएगी, जिससे उनके लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। - अनुराधा, प्राचार्या, राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी दो