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Faridabad News: जिले में 7 लाख से अधिक आयुष्मान-चिरायु कार्ड, इलाज की सुविधा सीमित

Sat, 01 Aug 2026 10:41 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:41 PM IST
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Over 7 lakh Ayushman-Chirayu cards in the district, but treatment facilities are limited.
निजी अस्पताल सीमित संख्या में मरीज करते हैं भर्ती, जिला और ईएसआई अस्पताल पर दबाव
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44 अस्पतालों में इलाज मिल रहा है जो काफी कम है

मोहित शुक्ला

फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में आयुष्मान भारत चिरायु और आयुष्मान वयोवंदना योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विभाग के बीआईएस के ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले में 7,03,173 आयुष्मान-चिरायु कार्ड बन चुके हैं जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के 17,489 वरिष्ठ नागरिक आयुष्मान वयोवंदना योजना से जुड़े हैं। इस श्रेणी में फरीदाबाद हरियाणा में दूसरे स्थान पर है। हालांकि कार्ड बनने की रफ्तार तेज रही है लेकिन इलाज की सुविधा बढ़ाने की गति अपेक्षाकृत धीमी है। इसका असर यह है कि बड़ी संख्या में मरीज आज भी सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। योजना के तहत प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज का प्रावधान है। जिले में करीब 44 अस्पतालों में इस योजना के तहत इलाज मिल रहा है जो काफी कम है।

फरीदाबाद हरियाणा का सबसे बड़ा औद्योगिक जिला है जहां अनुमानित 25 लाख से अधिक आबादी निवास करती है। बड़ी संख्या में श्रमिक, निम्न आय वर्ग और असंगठित क्षेत्र से जुड़े परिवार यहां रहते हैं। इन्हें गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत योजना लागू की गई थी। बाद में हरियाणा सरकार ने चिरायु योजना के जरिये परिवार पहचान पत्र के आधार पर अधिक परिवारों को इसमें शामिल किया। वर्ष 2024 में केंद्र सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान वयोवंदना योजना शुरू की जिससे पात्र बुजुर्गों को भी पांच लाख रुपये तक की अतिरिक्त स्वास्थ्य सुरक्षा मिली।
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बीके अस्पताल और ईएसआई पर सबसे अधिक दबाव
जिले में बादशाह खान नागरिक अस्पताल और ईएसआई मेडिकल कॉलेज आयुष्मान लाभार्थियों के प्रमुख सरकारी उपचार केंद्र हैं। रोजाना हजारों मरीज इन अस्पतालों में पहुंचते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में लगातार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं लेकिन मरीजों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ रही है। दूसरी ओर कई निजी अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध होने के बावजूद सीमित संख्या में मरीज भर्ती करते हैं। कई बार तकनीकी प्रक्रिया, प्री-ऑथराइजेशन या अन्य औपचारिकताओं के कारण मरीजों को देरी का सामना करना पड़ता है। परिणामस्वरूप गंभीर मरीजों का दबाव फिर सरकारी अस्पतालों पर आ जाता है।
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कार्ड की संख्या बढ़ी, उपचार व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी स्वास्थ्य बीमा योजना की सफलता केवल कार्ड वितरण से नहीं मापी जा सकती। वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि जरूरत पड़ने पर मरीज को बिना आर्थिक बोझ के समय पर इलाज मिले। फरीदाबाद जैसे औद्योगिक जिले में हृदय रोग, दुर्घटनाएं, कैंसर, किडनी और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की भागीदारी नहीं बढ़ी तो आने वाले समय में सरकारी अस्पतालों पर दबाव और बढ़ सकता है। अभी करीब 44 अस्पतालों में इस योजना तहत इलाज मिल रहा है। अस्पतालों की संख्या कम होने के कारण लोगों को इस योजना का लाभ ठीक से नहीं मिल पा रहा है। कई जगहों पर धक्के खाने के बाद वह दोबारा सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।


निगरानी और अस्पतालों का नेटवर्क बढ़ाना जरूरी

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि फरीदाबाद में कार्डधारकों की संख्या सात लाख पार कर चुकी है इसलिए अब प्राथमिकता अस्पताल नेटवर्क मजबूत करने की होनी चाहिए। अधिक निजी अस्पतालों को प्रभावी ढंग से पैनल में जोड़ना, क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाना और मरीजों की शिकायतों का त्वरित समाधान करना आवश्यक होगा। इससे सरकारी अस्पतालों का भार कम होगा और लाभार्थियों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लोगों में योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने, अस्पतालों में आयुष्मान हेल्प डेस्क को मजबूत करने तथा डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया को और आसान बनाने की जरूरत है। तभी इतनी बड़ी संख्या में बने कार्ड वास्तव में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन पाएंगे।


नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखते हुए इंतजाम किए जा रहे हैं। - विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल

बीके अस्पताल में सुबह से लाइन में खड़ा हूं। पहले पर्ची, फिर जांच और उसके बाद डॉक्टर को दिखाने में ही कई घंटे लग जाते हैं। अगर अधिक अस्पताल इस योजना से जुड़ जाएं तो मरीजों को इतनी परेशानी नहीं होगी। - कलराजी देवी, पल्ला


सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। सरकार को इस योजना के तहत और अस्पताल जोड़ने चाहिए ताकि समय पर इलाज मिल सके।-रुपेश, बल्लभगढ़
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