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Faridabad News: विकसित देशों की तर्ज पर कूड़े से बिजली और कोयला बनाने की तैयारी

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 12:13 AM IST
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Preparations to produce electricity and coal from garbage on the lines of developed countries
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सरकार ने नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की समिति गठित की, 20 दिन में रोडमैप तैयार होगा
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद अब कूड़े के संकट से निपटने के लिए एक ऐसी छलांग लगाने जा रहा है, जिसकी मिसाल विकसित देशों में देखने को मिलती है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के कारण शहर के लिए गले की हड्डी बन चुके कचरे को अब अवसर के रूप में देखा जा रहा है। फरीदाबाद में यूरोप और अन्य विकसित देशों की तर्ज पर अत्याधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा। शहर में कूड़े से बिजली और कोयला बनाने की तैयारी है। इस परियोजना की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की एक हाई लेवल समिति गठित कर दी है, जो नीति निर्धारण करने के साथ इस प्रोजेक्ट की जमीनी बाधाओं को दूर करने का जिम्मा भी संभालेगी। समिति 20 दिन में रोडमैप तैयार करेगी।

मौजूदा समय में फरीदाबाद के कचरा प्रबंधन की सबसे कमजोर कड़ी बंधवाड़ी लैंडफिल साइट है। शहर से हर दिन निकलने वाला करीब 900 से 1000 मीट्रिक टन कचरा ट्रकों में भरकर वहां भेजा जाता है, लेकिन वह पहाड़ अब अपनी क्षमता से कई गुना अधिक ऊंचा हो चुका है। वहां से निकलने वाला जहरीला लीचेट भूजल को दूषित करने के साथ आसपास की हवा में भी जहर घोल रहा है। प्रशासनिक हलकों में इस बात की प्रबल आशंका है कि जल्द ही वहां कूड़ा डालने पर पूरी तरह रोक लग सकती है। ऐसी आपात स्थिति से बचने के लिए फरीदाबाद को स्थानीय स्तर पर ही कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण का पुख्ता इंतजाम करना होगा। इसी को लेकर फरीदाबाद में ग्रीन कोल बनाने के साथ अब कूड़े से सीधा एनर्जी बनाने पर भी काम कर रहा है।
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मोठूका वाला प्लांट भी जल्द होगा शुरू
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य केंद्र तिगांव क्षेत्र का मोठूका गांव बनने जा रहा है। यह पर स्थानीय स्तर पर चल रही समस्याओं को जल्द दूर करके प्लांट को शुरू कर दिया जाएगा। यहां प्रस्तावित प्लांट में नगर निगम और संबंधित तकनीकी इकाइयों के सहयोग से कचरे से ग्रीन कोल यानी चारकोल बनाने की तैयारी है। 1000 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला यह प्लांट फरीदाबाद के लगभग पूरे कचरे को अकेले संभालने की ताकत रखेगा। यहां तैयार होने वाले ग्रीन कोल को ताप विद्युत संयंत्रों में पारंपरिक कोयले के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाएगा।

पीपीपी मॉडल के तहत होगा काम
आईएएस अधिकारियों की समिति पर बड़ी जिम्मेदारी प्रोजेक्ट को फाइलों से निकालकर जमीन पर उतारने के लिए बनाई गई उच्चस्तरीय समिति को बेहद महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। इसमें शामिल अधिकारी तकनीक का चयन करने के साथ पीपीपी मॉडल के तहत निजी निवेश और बिजली खरीद समझौतों को भी अंतिम रूप देंगे। समिति का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरे। यह समिति लगातार इस बात की निगरानी करेगी कि प्रोजेक्ट का ढांचा ऐसा हो जिससे नगर निगम पर वित्तीय बोझ कम पड़े और कचरे से होने वाली आय से ही इसे संचालित किया जा सके।

कूड़े के ढेरों और अवैध डंपिंग पॉइंट से मिलेगी मुक्ति
अभी फरीदाबाद में जगह जगह कूड़े के ढेर व डंपिंग पॉइंट बने हुए हैं वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनने के बाद शहर को इस समस्या से मुक्ति मिलेगी, जिससे मच्छरों और बीमारियों का प्रकोप कम होगा। इसके अलावा कचरा संग्रहण और प्लांट संचालन से स्थानीय स्तर पर सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो फरीदाबाद कूड़े से बिजली बनाने वाला न सिर्फ प्रदेश का बल्कि उत्तर भारत का एक रोल मॉडल बनकर उभरेगा।


कई देशों में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट काम कर रहे हैं अब फरीदाबाद में भी इसी तरह का प्लांट शुरू करने के लिए काम किया जा रहा है। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त
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