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Faridabad News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दुर्गा बिल्डर कॉलोनी की 234.67 एकड़ जमीन के सीमांकन की तैयारी
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विभाग ने विशेषज्ञ और अनुभवी सर्वे एजेंसियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) और कोटेशन मांगे
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। वर्षों से कानूनी विवाद में फंसी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी की 234.67 एकड़ जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया अब आगे बढ़ने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों की अनुपालना में नगर एवं ग्राम योजना विभाग (डीटीसीपी), हरियाणा ने विवादित लाइसेंस प्राप्त भूमि का सजरा आधारित सीमांकन कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसके लिए विभाग ने विशेषज्ञ और अनुभवी सर्वे एजेंसियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) और कोटेशन मांगे हैं। दुर्गा बिल्डर कॉलोनी का विवाद लंबे समय से अदालतों में चल रहा है। ओखला एन्क्लेव प्लॉट होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान 25 अप्रैल 2025 को अंतरिम आदेश पारित किए गए थे। इन्हीं आदेशों की अनुपालना में अब जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमाओं को स्पष्ट करने के लिए सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सीमांकन पूरा होने के बाद विवादित जमीन की वास्तविक सीमा को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
विभाग के अनुसार विवादित लाइसेंस प्राप्त भूमि दो चरणों में बंटी हुई है। फेज-1 में 126.725 एकड़ और फेज-2 में 107.950 एकड़ जमीन शामिल है। दोनों हिस्सों का सजरा नक्शे के आधार पर सीमांकन किया जाएगा। इसके लिए डिजिटल मैपिंग और आधुनिक सर्वे तकनीक का भी इस्तेमाल किए जाने की संभावना है ताकि जमीन की सीमा को सटीक तरीके से चिन्हित किया जा सके। सीमांकन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती जमीन की मौजूदा स्थिति होगी। लंबे समय से विवादित और उपेक्षित पड़े क्षेत्र के कई हिस्सों में गंदा पानी और जलभराव होने की जानकारी विभाग की सार्वजनिक सूचना में दी गई है। ऐसे में सामान्य तरीके से जमीन की पैमाइश करना आसान नहीं होगा। इसी कारण विभाग ने ऐसी विशेषज्ञ सर्वे एजेंसियों से ईओआई मांगी है जिन्हें सजरा आधारित सीमांकन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सर्वे करने का अनुभव हो।
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15 दिन में जमा करनी होगी पेशकश
डीटीसीपी की ओर से जारी सूचना के अनुसार इच्छुक एजेंसियां प्रकाशन की तारीख से 15 दिन के भीतर अपनी ईओआई और कोटेशन जमा कर सकती हैं। विभाग के अनुसार ईओआई प्राप्त होने के बाद प्रस्तावित कार्य का विस्तृत ब्योरा संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।
प्लॉट धारकों को मिल सकती है बड़ी राहत
दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के विवाद के कारण लंबे समय से बड़ी संख्या में प्लॉट धारक अपने भूखंडों को लेकर असमंजस में हैं। कई लोग वर्षों से अपने निवेश और भूखंड पर अधिकार को लेकर कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में जमीन का आधिकारिक सीमांकन होने से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि लाइसेंस प्राप्त भूमि की वास्तविक सीमा कहां तक है और मौके पर उसकी स्थिति क्या है।
सीमांकन की रिपोर्ट आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। इससे संबंधित जमीन, भूखंडों और मौके की स्थिति को लेकर अदालत के समक्ष तथ्य अधिक स्पष्ट तरीके से रखे जा सकेंगे। हालांकि सीमांकन अपने आप में प्लॉट धारकों को कब्जा मिलने की गारंटी नहीं है लेकिन विवादित जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। वर्षों से कानूनी विवाद में फंसी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी की 234.67 एकड़ जमीन के सीमांकन की प्रक्रिया अब आगे बढ़ने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेशों की अनुपालना में नगर एवं ग्राम योजना विभाग (डीटीसीपी), हरियाणा ने विवादित लाइसेंस प्राप्त भूमि का सजरा आधारित सीमांकन कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
इसके लिए विभाग ने विशेषज्ञ और अनुभवी सर्वे एजेंसियों से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) और कोटेशन मांगे हैं। दुर्गा बिल्डर कॉलोनी का विवाद लंबे समय से अदालतों में चल रहा है। ओखला एन्क्लेव प्लॉट होल्डर वेलफेयर एसोसिएशन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान 25 अप्रैल 2025 को अंतरिम आदेश पारित किए गए थे। इन्हीं आदेशों की अनुपालना में अब जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमाओं को स्पष्ट करने के लिए सीमांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सीमांकन पूरा होने के बाद विवादित जमीन की वास्तविक सीमा को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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विभाग के अनुसार विवादित लाइसेंस प्राप्त भूमि दो चरणों में बंटी हुई है। फेज-1 में 126.725 एकड़ और फेज-2 में 107.950 एकड़ जमीन शामिल है। दोनों हिस्सों का सजरा नक्शे के आधार पर सीमांकन किया जाएगा। इसके लिए डिजिटल मैपिंग और आधुनिक सर्वे तकनीक का भी इस्तेमाल किए जाने की संभावना है ताकि जमीन की सीमा को सटीक तरीके से चिन्हित किया जा सके। सीमांकन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती जमीन की मौजूदा स्थिति होगी। लंबे समय से विवादित और उपेक्षित पड़े क्षेत्र के कई हिस्सों में गंदा पानी और जलभराव होने की जानकारी विभाग की सार्वजनिक सूचना में दी गई है। ऐसे में सामान्य तरीके से जमीन की पैमाइश करना आसान नहीं होगा। इसी कारण विभाग ने ऐसी विशेषज्ञ सर्वे एजेंसियों से ईओआई मांगी है जिन्हें सजरा आधारित सीमांकन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सर्वे करने का अनुभव हो।
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15 दिन में जमा करनी होगी पेशकश
डीटीसीपी की ओर से जारी सूचना के अनुसार इच्छुक एजेंसियां प्रकाशन की तारीख से 15 दिन के भीतर अपनी ईओआई और कोटेशन जमा कर सकती हैं। विभाग के अनुसार ईओआई प्राप्त होने के बाद प्रस्तावित कार्य का विस्तृत ब्योरा संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा।
प्लॉट धारकों को मिल सकती है बड़ी राहत
दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के विवाद के कारण लंबे समय से बड़ी संख्या में प्लॉट धारक अपने भूखंडों को लेकर असमंजस में हैं। कई लोग वर्षों से अपने निवेश और भूखंड पर अधिकार को लेकर कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में जमीन का आधिकारिक सीमांकन होने से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि लाइसेंस प्राप्त भूमि की वास्तविक सीमा कहां तक है और मौके पर उसकी स्थिति क्या है।
सीमांकन की रिपोर्ट आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। इससे संबंधित जमीन, भूखंडों और मौके की स्थिति को लेकर अदालत के समक्ष तथ्य अधिक स्पष्ट तरीके से रखे जा सकेंगे। हालांकि सीमांकन अपने आप में प्लॉट धारकों को कब्जा मिलने की गारंटी नहीं है लेकिन विवादित जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।