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Faridabad News: स्मार्ट सिटी परियोजना पर सवाल, सीवर लाइन का पता नहीं, नाले की सफाई भी अटकी

Wed, 15 Jul 2026 12:18 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:18 AM IST
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Questions raised over Smart City project; no trace of sewer line, and drain cleaning work also stalled.
स्मार्ट रोड की सबसे बड़ी चूक सीवर लाइन का रिकॉर्ड गायब, डेढ़ करोड़ खर्च के बाद भी नहीं मिली 20 फीट नीचे दबी लाइन
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सेक्टर-29 की करोड़ों रुपये की स्मार्ट रोड पर निर्माण के दौरान सीवर लाइन की सटीक मैपिंग नहीं हुई
एफएमडीए नाले की सफाई और जलनिकासी सुधारने के लिए महीनों से लाइन तलाश रहा पर सफलता नहीं


मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। शहर की पहली स्मार्ट रोड आज प्रशासन के लिए बड़ी तकनीकी चुनौती बन गई है। सेक्टर-29 में करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क के नीचे डाली गई सीवर लाइन का रिकॉर्ड और सटीक स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) महीनों की कोशिश और करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी उसे चालू नहीं कर पाया है। यह सड़क स्मार्ट सिटी की तरफ से बनाई गई है लेकिन उनके पास सीवर लाइन के रास्तों को लेकर कोई जानकारी नहीं है। इसका सीधा असर सेक्टर-21 से एत्मादपुर तक जाने वाले पुराने बड़े नाले की सफाई पर पड़ रहा है।

करीब पांच वर्ष पहले स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत सेक्टर-29 से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की ओर शहर की पहली स्मार्ट रोड बनाई गई थी। इसी सड़क से केंद्रीय राज्य मंत्री के आवास की ओर भी आवागमन होता है। परियोजना के दौरान सड़क के नीचे नई सीवर लाइन भी डाली गई लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद उसका वास्तविक एलाइनमेंट, मैनहोल की ऊंचाई और सटीक लोकेशन का समुचित रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया। परिणाम यह हुआ कि लाइन सड़क के नीचे करीब 20 फीट गहराई में दब गई और पूरी लाइन आज तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी।
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एफएमडीए ने आधुनिक उपकरणों और कई स्थानों पर खुदाई के जरिये लाइन खोजने का प्रयास किया। अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक चली कवायद और अतिरिक्त खर्च के बावजूद पूरी लाइन का पता नहीं चल सका। इससे परियोजना की योजना, समन्वय और दस्तावेजीकरण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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सीवर लाइन चालू नहीं होने से योजना आगे नहीं बढ़ पा रही
सेक्टर-21 से एत्मादपुर तक जाने वाला बड़ा नाला शहर की सबसे पुरानी जलनिकासी व्यवस्थाओं में शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यह नाला अंग्रेजों के समय का बना हुआ है और आज भी बड़ी मात्रा में वर्षा जल की निकासी इसी से होती है। योजना यह है कि नाले में जाने वाले सीवेज को नई भूमिगत सीवर लाइन में स्थानांतरित किया जाए ताकि नाले की पूरी क्षमता वर्षा जल के लिए उपलब्ध हो सके लेकिन सीवर लाइन चालू नहीं होने से यह योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब वर्षा जल और सीवेज एक ही तंत्र में मिलते हैं तो नालों में सिल्ट तेजी से जमा होती है और जलभराव का खतरा बढ़ जाता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर मामलों में भी फरीदाबाद की वर्षा जल निकासी और सीवेज प्रबंधन को लेकर सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।


हर मानसून में सामने आती है समस्या

सेक्टर-21, 28, 29 और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के दौरान जलभराव की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्मार्ट रोड बनने के समय उम्मीद थी कि जलनिकासी व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन सीवर लाइन चालू न होने से अपेक्षित लाभ नहीं मिला। सड़क के नीचे बनी बुनियादी संरचना उपयोग में नहीं आने से सार्वजनिक धन का पूरा लाभ भी लोगों तक नहीं पहुंच पाया। एफएमडीए पिछले कुछ वर्षों से शहर के प्रमुख नालों और सीवर नेटवर्क को व्यवस्थित करने की योजना पर काम कर रहा है। वर्ष 2024 में एजेंसी ने मास्टर प्लान-2031 के तहत शहर की पुरानी सीवर लाइनों के सर्वे और सुधार की प्रक्रिया भी शुरू की थी ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।



समन्वय की कमी से बढ़ी मुश्किल

शहरी अवसंरचना विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी सड़क परियोजना में भूमिगत उपयोगिताओं की डिजिटल मैपिंग और ऐज-बिल्ट ड्रॉइंग तैयार करना आवश्यक होता है। इससे भविष्य में मरम्मत, विस्तार या आपातकालीन कार्यों के दौरान खुदाई कम करनी पड़ती है और लागत भी बचती है। सेक्टर-29 का मामला बताता है कि निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भविष्य में कितनी बड़ी प्रशासनिक और वित्तीय चुनौती बन सकती है। हालांकि इस मामले में संबंधित निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी तय किए जाने संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।


करीब आधी सीवर लाइन मिल गई है। अब किसी और तकनीक का इस्तेमाल कर पूरी लाइन को ढूंढकर चालू कर दिया जाएगा।
- समुद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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