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Faridabad News: 29 किलोमीटर लंबे सीवर नेटवर्क की आधुनिक मशीनों से होगी सफाई
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6.04 करोड़ की परियोजना के तहत किया जाएगा काम, ढाई साल तक रखरखाव भी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। हर बरसात में सीवर ओवरफ्लो, सड़कों पर गंदा पानी और जलभराव से जूझने वाले फरीदाबाद के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने शहर के बादशाहपुर ईस्ट और एनएच-44 के पूर्वी हिस्से की मुख्य सीवरेज लाइनों को दुरुस्त करने के लिए 6.04 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना शुरू की है। इस योजना के तहत करीब 29 किलोमीटर लंबे सीवर नेटवर्क की आधुनिक मशीनों से सफाई, मरम्मत और अगले ढाई साल तक रखरखाव किया जाएगा।
शहर में तेजी से बढ़ती आबादी और पुराने हो चुके सीवर सिस्टम के कारण पिछले कई वर्षों से सेक्टरों और कॉलोनियों में सीवर जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है। खासकर बारिश के दौरान सेक्टर-12, सेक्टर-15, एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, बाटा चौक और एनएच-44 से सटे हिस्सों में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार घरों और दुकानों तक गंदा पानी पहुंचने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। वहीं ग्रेटर फरीदाबाद की ऊंची इमारतों वाले इलाके में सड़कों का हाल काफी खराब है। बारिश होने के बाद यहां हालत खराब हो जाते हैं। जलभराव के कारण पैदल राहगीरों व वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है।
हर मानसून में होती है परेशानी
फरीदाबाद का बड़ा हिस्सा आज भी पुराने सीवरेज नेटवर्क पर निर्भर है। कई मुख्य लाइनें दो दशक से अधिक पुरानी हैं और उनमें वर्षों से जमा सिल्ट, प्लास्टिक व निर्माण मलबा पानी के प्रवाह को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते हल्की बारिश में भी सीवर ओवरफ्लो की स्थिति बन जाती है। जानकारी के अनुसार शहर के इस हिस्से में मुख्य ट्रंक सीवर लाइनों की लंबे समय से व्यापक सफाई नहीं हुई थी। लगातार बढ़ते लोड के कारण नेटवर्क की क्षमता कम हो रही थी। यही वजह है कि अब पूरे सिस्टम की मैकेनाइज्ड सफाई और तकनीकी जांच का फैसला लिया गया है।
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पाइपलाइन के अंदर 360 डिग्री घूमने वाले सीसीटीवी कैमरे भेजे जाएंगे
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सफाई का पूरा काम आधुनिक तकनीक से किया जाएगा। सुपर सकर मशीनों और हाई प्रेशर जेटिंग मशीनों के जरिये लाइन के भीतर जमा गाद निकाली जाएगी। इसके अलावा पाइपलाइन के अंदर 360 डिग्री घूमने वाले सीसीटीवी कैमरे भेजे जाएंगे, जिससे यह पता लगाया जा सके कि लाइन किस जगह से कमजोर या जाम है। करीब 14,620 मीटर लंबाई की लाइन का विस्तृत सीसीटीवी सर्वे भी कराया जाएगा।
चार घंटे में करना होगा शिकायत का समाधान
एफएमडीए ने परियोजना से जुड़ी एजेंसी के लिए सख्त नियम तय किए हैं। यदि कहीं सीवर ओवरफ्लो, ब्लॉकेज या मैनहोल ढक्कन टूटने जैसी शिकायत आती है तो उसे चार घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा। जमीन के नीचे दब चुके पुराने मैनहोल को खोजने के लिए मेटल डिटेक्टर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। निकाली गई गाद को निर्धारित डंपिंग स्टेशन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी एजेंसी की होगी। अधिकारियों का कहना है कि पहले कई बार सफाई के बाद गाद खुले स्थानों पर छोड़ दी जाती थी जिससे दुर्गंध और प्रदूषण फैलता था। इस बार पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
हजारों परिवारों को राहत मिलेगी
यह परियोजना केवल एक बार की सफाई तक सीमित नहीं रहेगी। एफएमडीए ने पूरे नेटवर्क के 30 महीने तक संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी इसमें शामिल की है। यानी यदि इस दौरान किसी क्षेत्र में सीवर जाम या ओवरफ्लो की समस्या आती है तो एजेंसी को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। एफएमडीए अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से बादशाहपुर ईस्ट और एनएच-44 के पूर्वी हिस्से में रहने वाले हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। खासकर मानसून के दौरान जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या में कमी आने की उम्मीद है।
मुख्य सीवर लाइनों की सफाई के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। मानसून से पहले सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे । - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर, एफएमडीए
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। हर बरसात में सीवर ओवरफ्लो, सड़कों पर गंदा पानी और जलभराव से जूझने वाले फरीदाबाद के लोगों के लिए राहत भरी खबर है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने शहर के बादशाहपुर ईस्ट और एनएच-44 के पूर्वी हिस्से की मुख्य सीवरेज लाइनों को दुरुस्त करने के लिए 6.04 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना शुरू की है। इस योजना के तहत करीब 29 किलोमीटर लंबे सीवर नेटवर्क की आधुनिक मशीनों से सफाई, मरम्मत और अगले ढाई साल तक रखरखाव किया जाएगा।
शहर में तेजी से बढ़ती आबादी और पुराने हो चुके सीवर सिस्टम के कारण पिछले कई वर्षों से सेक्टरों और कॉलोनियों में सीवर जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है। खासकर बारिश के दौरान सेक्टर-12, सेक्टर-15, एनआईटी, ओल्ड फरीदाबाद, बाटा चौक और एनएच-44 से सटे हिस्सों में लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार घरों और दुकानों तक गंदा पानी पहुंचने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। वहीं ग्रेटर फरीदाबाद की ऊंची इमारतों वाले इलाके में सड़कों का हाल काफी खराब है। बारिश होने के बाद यहां हालत खराब हो जाते हैं। जलभराव के कारण पैदल राहगीरों व वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है।
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हर मानसून में होती है परेशानी
फरीदाबाद का बड़ा हिस्सा आज भी पुराने सीवरेज नेटवर्क पर निर्भर है। कई मुख्य लाइनें दो दशक से अधिक पुरानी हैं और उनमें वर्षों से जमा सिल्ट, प्लास्टिक व निर्माण मलबा पानी के प्रवाह को प्रभावित कर रहा है। इसके चलते हल्की बारिश में भी सीवर ओवरफ्लो की स्थिति बन जाती है। जानकारी के अनुसार शहर के इस हिस्से में मुख्य ट्रंक सीवर लाइनों की लंबे समय से व्यापक सफाई नहीं हुई थी। लगातार बढ़ते लोड के कारण नेटवर्क की क्षमता कम हो रही थी। यही वजह है कि अब पूरे सिस्टम की मैकेनाइज्ड सफाई और तकनीकी जांच का फैसला लिया गया है।
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पाइपलाइन के अंदर 360 डिग्री घूमने वाले सीसीटीवी कैमरे भेजे जाएंगे
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सफाई का पूरा काम आधुनिक तकनीक से किया जाएगा। सुपर सकर मशीनों और हाई प्रेशर जेटिंग मशीनों के जरिये लाइन के भीतर जमा गाद निकाली जाएगी। इसके अलावा पाइपलाइन के अंदर 360 डिग्री घूमने वाले सीसीटीवी कैमरे भेजे जाएंगे, जिससे यह पता लगाया जा सके कि लाइन किस जगह से कमजोर या जाम है। करीब 14,620 मीटर लंबाई की लाइन का विस्तृत सीसीटीवी सर्वे भी कराया जाएगा।
चार घंटे में करना होगा शिकायत का समाधान
एफएमडीए ने परियोजना से जुड़ी एजेंसी के लिए सख्त नियम तय किए हैं। यदि कहीं सीवर ओवरफ्लो, ब्लॉकेज या मैनहोल ढक्कन टूटने जैसी शिकायत आती है तो उसे चार घंटे के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा। जमीन के नीचे दब चुके पुराने मैनहोल को खोजने के लिए मेटल डिटेक्टर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। निकाली गई गाद को निर्धारित डंपिंग स्टेशन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी एजेंसी की होगी। अधिकारियों का कहना है कि पहले कई बार सफाई के बाद गाद खुले स्थानों पर छोड़ दी जाती थी जिससे दुर्गंध और प्रदूषण फैलता था। इस बार पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
हजारों परिवारों को राहत मिलेगी
यह परियोजना केवल एक बार की सफाई तक सीमित नहीं रहेगी। एफएमडीए ने पूरे नेटवर्क के 30 महीने तक संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी इसमें शामिल की है। यानी यदि इस दौरान किसी क्षेत्र में सीवर जाम या ओवरफ्लो की समस्या आती है तो एजेंसी को तुरंत कार्रवाई करनी होगी। एफएमडीए अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से बादशाहपुर ईस्ट और एनएच-44 के पूर्वी हिस्से में रहने वाले हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। खासकर मानसून के दौरान जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या में कमी आने की उम्मीद है।
मुख्य सीवर लाइनों की सफाई के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। मानसून से पहले सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे । - विशाल बंसल, चीफ इंजीनियर, एफएमडीए